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तीनों सेनाओं के बीच रणनीतिक समन्वय बढ़ाने की पहल

एकीकृत थिएटर कमांड भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर युद्ध के समय त्वरित निर्णय लेने में मदद करेगी। यह व्यवस्था संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ चीन, पाकिस्तान और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने की भारत की क्षमता को और मजबूत बनाएगी।
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जयपुर

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Opinion Desk

Aug 06, 2026

armed forces

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एन.के. सोमानी,(अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार)

देश की उत्तरी व पश्चिमी सीमा पर चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने व हिंद महासागर में भारत के प्रभुत्व को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने देश के सशस्त्र बलों की सैन्य दक्षता बढ़ाने, रक्षा संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने और युद्ध के समय त्वरित निर्णय लेने के लिए एकीकृत थिएटर कमांड (आइटीसी ) के गठन का निर्णय लिया है। आइटीसी के गठन का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युद्ध प्रणाली में तीनों बलों अर्थात सेना, नौसेना तथा वायु सेना के बीच रणनीतिक समन्वय बढ़ाना है। इस व्यवस्था के तहत एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में सशस्त्र बलों के सभी संसाधन एक ही कमांडर के अधीन रखने की व्यवस्था की जाएगी ताकि जरूरत पडऩे पर तीनों सेनाएं एक साथ मिलकर मोर्चा ले सकें।

इससे न केवल दुश्मन को समय रहते मुंह तोड़ जवाब दिया जा सकेगा बल्कि संसाधनों का दोहराव रुकेगा और युद्ध के मोर्चे पर हमारी प्रभावशीलता बढ़ेगी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की ओर से कमांड के गठन का अंतिम प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपा जा चुका है और केबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा। आइटीसी के तहत तीनों सेनाओं की टुकड़ी एक ही कमांडर के अधीन होने के कारण युद्ध व अन्य आपात स्थिति में अलग-अलग बलों से मंजूरी लेने में लगने वाला समय बचता है, जिससे रणनीतिक फैसले बहुत तेजी से लिए जा सकते हैं। कमांड के एकीकरण के बाद युद्ध व आक्रमण के समय तीनों सेनाओं के कमांडो आवश्यकता पडऩे पर एयर स्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई को एक साथ अंजाम दे सकेंगे और दुश्मन पर प्रभावी ढंग से हमला कर सकेंगे। यही कारण है कि साइबर, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे आधुनिक और बहु-डोमेन खतरों से निपटने में 'एकीकृत कमान' सबसे सक्षम प्रणाली कही जाती है। वैश्विक स्तर पर थिएटर कमांड के गठन के इतिहास की बात की जाए तो एकीकृत थिएटर कमांड की अवधारणाा का विचार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमरीकी सैन्य नेतृत्व और रणनीतिकारों द्वारा दिया गया था ताकि युद्ध के विभिन्न मोर्चो पर सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा सके। अमरीका ने 'यूनिफाइट कॉमबेटमेंट कमांड' का गठन किया। इसका सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक उपयोग 1991 में खाड़ी युद्ध और बाद में इराक व अफगानिस्तान अभियानों में किया गया। वहीं फ्रांस सरकार ने सेना के एकीकृत अभियानों के संचालन के लिए 1992 में 'कमांडमेंट डेस ऑपरेशन स्पेशल' की स्थापना की।

रूस दुनिया का तीसरा ऐसा देश बना जिसने 2010 से 2014 के बीच (दो चरणों में) एकीकृत थिएटर कमांड का गठन किया। इस कड़ी में अप्रेल 2012 में ब्रिटेन का नाम भी जुड़ गया। हालांकि ब्रिटेन अपने सशस्त्र बलों में संयुक्त अभियानों को एकीकृत करने के लिए अप्रेल 1996 में पहला स्थायी संयुक्त मुख्यालय बना चुका था। लेकिन 'ज्वांइट फोर्सेज कमांड' का निर्माण 2012 में ही किया गया। चीन ने वर्ष 2016 में व्यापक सैन्य सुधारों को लागू करते हुए 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' को 5 थिएटर कमांड में पुनर्गठित किया है। इसमें से एक 'वेस्टर्न थिएटर कमांड' भारत से लगने वाली सीमाओं को नियंत्रित करती है। जहां तक भारत का सवाल है तो भारत में 'एकीकृत थिएटर कमांड' का विचार सबसे पहले 1999 के कारगिल युद्ध के बाद आया था।

भारत में सेना, नौसेना तथा वायु सेना को एकीकृत युद्ध प्रणाली में पुनर्गठित करने की शुरुआत कारगिल समीक्षा समिति (1999) और नरेश चंद्र समिति (2012) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। इस दिशा में पहला ठोस कदम उठाते हुए अक्टूबर 2001 में पोर्ट ब्लेयर में देश की पहली त्रि-सेवा 'अंडमान और निकोबार कमान' का गठन किया गया और बाद में शेकातकर समिति (2016) की सिफारिशों के आधार पर भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और अधिक सुदृढ़ और एकीकृत करने के लिए विधिवत रूप से तीन एकीकृत थिएटर कमांड नॉर्दर्न (उत्तरी), वेस्टर्न (पश्चिमी) और मैरीटाइम (समुद्री) अर्थात दक्षिणी थिएटर कमांड बनाने की योजना बनाई। उत्तरी थिएटर कमांड चीन से सटी सीमा (एलएसी) की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा। पश्चिमी थिएटर कमांड पाकिस्तान सीमा से जुड़े मोर्चे को संभालेगा और समुद्री मैरिटाइम थिएटर कमांड को हिंद महासागर और भारत की समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। वर्तमान परिस्थितियों में भारत को उत्तर (चीन) और पश्चिम (पाकिस्तान) दो तरफा खतरों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर हमने अपनी तीनों सेनाओं को 17 अलग-अलग कमांड में विभाजित किया हुआ है, संकट के समय इसमें तालमेल बिठाने में समय लगता है।

नई व्यवस्था के तहत एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में थिएटर के सभी संसाधन एक ही कमांडर के अधीन होने से युद्ध व संकट के समय अलग-अलग बलों के उपयोग के लिए अलग-अलग कमांड से स्वीकृति लेने की आवश्यकता पड़ती थी। अब तीनों सेनाओं को एक ही युद्ध प्रणाली के अधीन ले आने से संसाधनों की स्वीकृति व अन्य तरह की औपचारिकताओं को पूरा करने में लगने वाला समय बच सकेगा और रणनीतिक निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे। कोई दो राय नहीं कि आने वाले समय के युद्ध केवल जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि इनमें साइबर और अंतरिक्ष जैसे डोमेन भी शामिल होंगे। एकीकृत कमांड इन सभी आधुनिक युद्ध तकनीकों को एक साथ संभालने में सक्षम होगी। ऐसे में नई एकीकृत थिएटर कमांड के निर्माण की पहल भारत की सैन्य संरचना में सुधार का ऐतिहासिक कदम है।