ओपिनियन

आपकी बात: दहेज हत्या की रोकथाम के लिए सामाजिक स्तर पर कैसे प्रयास हों?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

4 min read
Jan 05, 2026

दहेज को प्रतिष्ठा का पैमाना न मानें
समाज सुधार के दृष्टिकोण से दहेज हत्या की रोकथाम एक सामूहिक दायित्व है। इसके लिए समाज को अपनी रूढ़ मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा। दहेज को प्रतिष्ठा से जोड़ने की सोच समाप्त कर सादगी और समानता को अपनाना आवश्यक है। परिवार और समुदाय स्तर पर बेटियों को सम्मान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर दिया जाए। सामाजिक संस्थाएं, पंचायतें और स्वयंसेवी संगठन दहेज विरोधी संकल्प और जागरूकता कार्यक्रम चलाएं। दहेज लेने-देने वालों का सामाजिक बहिष्कार हो तथा पीड़ित महिलाओं को संरक्षण और सहयोग मिले। इस प्रकार निरंतर सामाजिक प्रयासों से स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव हो सकता है। - सत्तार खान, नागौर

दहेज-मुक्त विवाह की शपथ लें
दहेज हत्या भारतीय समाज की घोर सामाजिक बुराई है, जो दहेज प्रथा से जन्म लेती है। इसे रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर ठोस प्रयास जरूरी हैं। शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाकर दहेज के दुष्परिणामों को उजागर करें। स्कूलों-गांवों में कार्यशालाएं आयोजित करें। महिलाओं को शिक्षा व आर्थिक स्वतंत्रता देकर सशक्त बनाएं, ताकि वे दहेज की मांग का विरोध कर सकें। समुदाय स्तर पर दहेज-मुक्त विवाह की शपथ लें और ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करें। युवा पीढ़ी दहेज न लेने-देने का संकल्प ले। सामाजिक बहिष्कार व सम्मान से मानसिकता बदले। - राजेन्द्र कुमार जांगिड़, बालोतरा

दहेज की सामूहिक अस्वीकृति हो
दहेज हत्या जैसी अमानवीय प्रवृत्ति की रोकथाम के लिए समाज को निर्णायक भूमिका निभानी होगी। दहेज को सामाजिक अपराध मानते हुए सामूहिक अस्वीकृति जरूरी है। विवाह में दिखावे और लेन-देन का विरोध हो तथा सादगी को प्रोत्साहन मिले। परिवारों को बेटियों को बोझ नहीं, समान अधिकारों वाला सदस्य मानने की सोच विकसित करनी होगी। पंचायत, धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं जागरूकता अभियान चलाकर दहेज विरोधी संदेश दें। पीड़ित महिलाओं को सामाजिक समर्थन और कानूनी सहायता मिले। साथ ही, दहेज मांगने वालों का सामाजिक बहिष्कार हो। जब समाज एकजुट होकर खड़ा होगा, तभी दहेज हत्या पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा। -राकेश खुडिया, श्रीगंगानगर

ग्राम पंचायतें सामाजिक बहिष्कार करें
दहेज हत्या की रोकथाम के लिए स्थानीय सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन दहेज लेने वालों का बहिष्कार करने की नीति बनाएं। महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिलाने, उन्हें सशक्त करने की पहल हो। शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए दहेज विरोधी अभियान चलाया जाए। नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाओं और मीडिया अभियानों के माध्यम से लोगों को दहेज प्रथा के कानूनी परिणामों और अनैतिकता के बारे में जागरूक करने की पहल हो। कानूनी जागरूकता और शिकायत तंत्र की मजबूती दहेज हत्या की रोकथाम के लिए मददगार बन सकेंगी। - शिवजी लाल मीना, जयपुर

महिलाओं को जागरूक होना पडे़गा
दहेज जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए सरकार को सख्त व समाज को जागरूक होना होगा। पुत्रवधू को बेटी के समान समझा जाए और पुत्रवधू भी अपने सास, ससुर को माता-पिता के समान समझे तो दहेज जैसी बुराई पर रोक लग सकेगी। महिलाओं को भी जागरूक होना होगा, अपराध को सहने के स्थान पर तत्काल कानूनी मदद लेनी चाहिए। धन ही सब कुछ नहीं है संस्कारवान वधु ही सबसे बड़ा धन है, समाज को यह समझना चाहिए। - आजाद पूरण सिंह, जयपुर

दहेज की सोच को खत्म करें
दहेज जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध बुनियादी स्तर पर शिक्षा व सामाजिक जन जागरुकता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। सामाजिक स्तर पर उस सोच को खत्म किया जाना चाहिए जो स्त्रियों को वस्तु और विवाह को केवल व्यापार समझता है, साथ ही दहेज प्रतिषेध कानूनों का जमीनी स्तर पर कठोरता से पालन किया जाना चाहिए। प्रशासन की इन मामलों को रोकने में सक्रिय और संवेदना पूर्ण भागीदारी होनी चाहिए। - नरेन्द्र योगी, सांभर लेक

सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी
दहेज हत्या की रोक थाम के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं। दहेज के हत्यारे एवं लोभियों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए। दहेज लेने वालों पर दहेज निषेध अधिनियम के तहत तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। सामाजिक जागरूकता बढ़ाई जाए। दहेज प्रथा एवं दहेज हत्या के खिलाफ सामाजिक सोच एवं व्यवहार में बदलाव किया जाए। - सतीश उपाध्याय, मनेद्रगढ़

वर-वधू आत्मनिर्भर बनें
दहेज हत्या की रोकथाम के लिए शादी में न तो लड़की वाले दहेज दें और न ही लड़के वाले दहेज लें। वर-वधू के माता-पिता बच्चों के भविष्य पर चर्चा करें। शादी से पहले या बाद में दहेज की मांग न हो। जब लड़का-लड़की वयस्क हो और आत्मनिर्भर हो तभी उनका विवाह किया जाए। गांव-शहरों में दहेज के खिलाफ शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर बनाए जाएं। दहेज प्रथा समाप्त कर गरीब परिवारों को कर्ज से बचाया जाए। - मुकेश सोनी, जयपुर

सामूहिक विवाह को प्रोत्साहित करें
दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक चेतना और मानसिक बदलाव की भी उतनी ही आवश्यकता है। दहेज हत्या को रोकने में युवाओं की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। आज के शिक्षित युवाओं को संकल्प लेना होगा कि वे बिना दहेज के विवाह करेंगे। जब युवा पीढ़ी इसे सम्मान के बजाय अपमान मानेगी, तभी बदलाव आएगा। दहेज की मांग करने वाले परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए ताकि ऐसे कृत्यों को हतोत्साहित किया जा सके। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ-साथ बेटियों को संपत्ति और शिक्षा में समान अधिकार देना उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाता है। समाज में सामूहिक विवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे फिजूलखर्ची और दिखावे की होड़ कम हो। दहेज मुक्त समाज ही वास्तव में एक विकसित और सभ्य समाज की पहचान है। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली

दहेज मांगना सामाजिक अपमान समझें
दहेज हत्या को रोकने के लिए समाज की मानसिकता में बदलाव लाना सबसे प्राथमिक और आवश्यक कदम है। दहेज की मांग करने वाले परिवारों का सामाजिक स्तर पर बहिष्कार किया जाना चाहिए। सामुदायिक बैठकों और पंचायतों में इस मुद्दे पर कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है। समाज में बेटियों की शिक्षा और उनके आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देना चाहिए। बेटी को शिक्षित करें और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके। दहेज देना या लेना सामाजिक अपमान है, यह सोच विकसित करें। - प्रवेश भूतड़ा, सूरत

दहेज रहित विवाह को सम्मानित करें
दहेज की बुराई को खत्म करने के लिए सर्वोत्तम रूप से समाज के हर वर्ग को जागरूक करना होगा कि दहेज एक गैरकानूनी और बुरी प्रथा है। नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाएं और सोशल मीडिया इसके लिए बेहतर माध्यम सिद्ध हो सकता है। साथ ही वर-वधू एवं दोनों पक्ष के माता पिता को खुद आगे आकर इस कुप्रथा का विरोध करना होगा। अगर लड़के दहेज लेने से मना करें और लड़कियां दहेज वाले परिवारों में शादी करने से इनकार करें, तो ये बुराई खुद खत्म हो जाएगी। साथ ही सामूहिक विवाह सम्मेलन एवं अन्य समाजिक कार्यक्रमों में उन परिवारों को सम्मानित करना चाहिए जो बिना दहेज के सादगी से शादी करते हैं। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, बेटियों को पढ़ाई और रोजगार के अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाना चाहिए, ताकि उन्हें किसी पर बोझ न समझा जाए। - प्रीति गांधी, कोटा

Updated on:
05 Jan 2026 04:42 pm
Published on:
05 Jan 2026 04:41 pm
Also Read
View All

अगली खबर