पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं
सामूहिक रूप से दायित्व निभाएं
नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए औद्योगिक अपशिष्ट का उपचार जरूरी है। औद्योगिक और घरेलू कचरे को नदियों में जाने से रोकना होगा। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कूड़ा-कचरा नदियों या नालों में न फेंकेने और कूड़ेदान का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना होगा। प्लास्टिक का उपयोग कम करें। सरकार, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिल कर काम करें।सामूहिक दायित्व ही नदियों को प्रदूषण से बचा सकेगा। - शिवजी लाल मीना, जयपुर
गंदे नाले शामिल ना करें
देश के शहरों में स्थापित कल कारखानों, फेक्ट्रियों का प्रदूषित अपशिष्ट पदार्थ नालों से होकर वर्षाकाल में वर्षा जल के साथ मिलकर नदियों में प्रवेश करता है इसलिए इन कल कारखानों, फेक्ट्रियों का अपशिष्ट प्रबंधन होना चाहिए। इस अपशिष्ट पदार्थ के लिए एक टैंक होना नितांत आवश्यक है ताकि प्रदूषित पदार्थ धरती में समा जाए या इस अपशिष्ट जल को फिल्टर कर नालो में प्रवाहित किया जाए। - वंश प्रदीप सिंह, अजमेर
कानूनों का सख्त पालन हो
नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए समग्र और बहुस्तरीय प्रयास आवश्यक हैं। इसके तहत औद्योगिक इकाइयों व शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले तरल अपशिष्ट का बिना शोधन नदी में प्रवाह पूरी तरह रोका जाए। प्रत्येक नगर में प्रभावी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। धार्मिक अनुष्ठानों, मूर्ति-विसर्जन के लिए पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाए जाएं। नदी तटों पर ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक प्रतिबंध और हरित पट्टी (ग्रीन बफर जोन) का विकास किया जाए। कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग पर नियंत्रण तथा जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही जन-जागरूकता, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, कड़े पर्यावरणीय कानूनों का सख्त पालन और सतत जल-गुणवत्ता निगरानी के माध्यम से ही नदियों को प्रदूषण से प्रभावी रूप से बचाया जा सकता है। - डॉ. राजीव कुमार, जयपुर
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं
जन-भागीदारी और सख्त सरकारी कानून एक साथ आए तो नदियों को बचाना संभव है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट को शोधन संयंत्रों से साफ कर ही नदी में छोड़ा जाना चाहिए। कृषि रसायनों व प्लास्टिक कचरे पर अंकुश लगाएं शहरों और कस्बों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि गंदा पानी सीधे नदियों में न जाए। सरकार द्वारा मासिक सफाई अभियान, जागरूकता अभियान, स्वच्छता अभियान चलाना चाहिए। सरकार व जनभागीदारी के समन्वित प्रयासों से नदियों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा सकता है। - राजेन्द्र कुमार जांगिड़, बालोतरा
प्लास्टिक का सीमित उपयोग करें
हमारे देश में अभी भी नदी किनारे खुले में शौच, औद्योगिक अपशिष्ट व केमिकल, पूजा सामग्री, घरेलू कचरा आदि नदियों में डाला जाता है। जिससे नदी प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। नदियों को स्वच्छ रखने के लिए नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन और जल शक्ति अभियान जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ उद्योगों पर कठोर नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही आमजन में जागरूकता बढ़ाकर कचरा न फेंकने, प्लास्टिक कम उपयोग करने और वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया जाए। स्थानीय लोगों को नदी निगरानी, सफाई और पुनरुद्धार कार्यों में शामिल कर सामुदायिक सहभागिता से ही नदियों को प्रदूषण मुक्त रखा जा सकता है। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली
निगरानी तंत्र मजबूत हो
नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए नदी किनारे वृक्षारोपण के साथ, नदी संरक्षण अभियान चलाया जाना चाहिए। अवैध अतिक्रमण एवं खनन पर कानूनी शिकंजा कसा जाए। लोगों को व्यक्तिगत रूप से अपने दायित्व को समझते हुए रासायनिक उर्वरक और प्लास्टिक पूजा सामग्री नदियों में नहीं डालनी चाहिए। - सतीश उपाध्याय, मनेद्रगढ़
प्लास्टिक का बहिष्कार करें
नदियों को अगर प्रदूषण से बचाना है तो सबसे पहले हमें प्लास्टिक का बहिष्कार करना ही होगा। प्लास्टिक गलता नहीं हैं और ये पानी में मिलकर जल प्रदूषण बढ़ाने का काम भी करता हैं। कारखानों के अपशिष्ट पदार्थ गंदे नाले से होते हुए नदियों में मिलाए जाते हैं। नदियों का यह पानी ही खेतों में इस्तेमाल होता हैं जिससे फसल भी जहरीली होती है। नदी सफाई और पुनरुद्धार परियोजनाओं में स्वयंसेवकों की भागीदारी बढाकर पानी के प्राकृतिक प्रवाह को स्वच्छ रखा जा सकता है। - प्रियव्रत चारण जोधपुर
नदी किनारे वृक्ष लगाएं
नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए औद्योगिक अपशिष्ट का शोधन अनिवार्य किया जाए, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावी रूप से चलाए जाएं, प्लास्टिक और ठोस कचरा नदी में डालने पर सख्त रोक लगे। नदी किनारे वृक्षारोपण, जन-जागरूकता अभियान, धार्मिक गतिविधियों में पर्यावरण-अनुकूल विकल्प, तथा नियमित निगरानी व कड़े कानूनों का सख्ती से पालन आवश्यक है। - डॉ. अभिनव शर्मा, झालावाड़
जनभागीदारी सुनिश्चित करें
नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए निर्मित कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ जनभागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
नदियों के किनारे बसी आबादी को नदियों के जल दोहन एवं उसके संरक्षण के गुणवत्तापूर्ण उपाय के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। इसे प्रदूषण मुक्त करने के लिए ग्राम सभाओं को भी विशेष अधिकार प्रदान करने होंगे जिससे उनमें नदियों के प्रति विशेष अपनत्व का भाव उतपन्न हो। - राजेश पाठक, झारखण्ड