तीरंदाजी के प्रति कोमालिका का जुनून देखकर पिता ने उसे एक बांस का धनुष खरीदकर दिया जो 5000 रुपए में आया था। कोमालिका उस बांस के धनुष से ही प्रतियोगिता की तैयारी करती थी।
वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में भारत की दीपिका कुुमारी, अंकिता भगत और कोमालिका बारी ने तीसरे चरण के फाइनल में मेक्सिको को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जमशेदपुर की रहने वाली तीरंदाज के घर पहुंचने पर शहर के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। कोमालिका बहुत साधारण परिवार से हैं। गोल्ड मेडलिस्ट कोमालिका को धनुष दिलाने के लिए उनके पिता ने अपना मकान तक बेच दिया था। कोमालिका के पिता एलआईसी एजेंट का काम करते हैं और मां आंगनबाड़ी में 1450 रुपए में काम करती हैं। कोमालिका को बचपन से तीरंदाजी का शौक था।
बांस के धनुष से करती थी प्रैक्टिस
कोमोलिका के पिता का कहना है कि जब कोमालिका छोटी थी तो घर में पड़ी लकड़ी को धनुष बनाकर उससे खेलती थी। तीरंदाजी के प्रति कोमालिका का जुनून बढ़ता गया। ऐसे में पिता ने उसे एक बांस का धनुष खरीदकर दिया जो 5000 रुपए में आया था। कोमालिका उस बांस के धनुष से ही प्रतियोगिता की तैयारी करती थी।
बेच दिया मकान
शुरुआत में तो ठीक था लेकिन जब कोमालिका का चयन टाटा आर्चरी अकादमी में हुआ और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की बात सामने आई तो कोमालिका के लिए प्रोफेशनल धनुष चाहिए था। पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बेटी के लिए प्रोफेशनल धनुष खरीद सके इसलिए उन्होंने ढाई लाखा रुपए में अपना छोटा सा घर बेचकर बेटी के लिए धनुष खरीदा। मकान बेचने के बाद वे लोग किराए के मकान में रहने चले गए।
बेटी कर रही सपना पूरा
कोमालिका की मां ने मीडिया को बताया कि वह खुद बचपन में हॉकी प्लेयर रह चुकी हैं, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हो सका था। अब उन्हें इस बात की खुशी है कि बेटी अपना सपना पूरा कर रही है। वहीं पिता का कहना है कि आगामी समय में उनकी बेटी का ओलंपिक में भी चयन होगा और वह ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतेगी।