पाकिस्तान में दो हिन्दू लड़कियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन करने के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रधानमंत्री इमरान खान ने मामला सामने आने के बाद दिए थे जांच के आदेश। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त से मांगा था जवाब।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में बीते शुक्रवार होली के मौके पर दो हिन्दू लड़कियों को अगवा कर धर्मांतरण कराने के मामले में पाकिस्तान सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें निकाह कराने वाला मौलवी भी शामिल है। बता दें कि सिंध प्रांत के घोटकी जिले से 13 वर्षीय रवीना और 15 वर्षीय रीना को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था। उसके कुछ समय बाद एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक काजी कथित तौर पर दोनों का निकाह कराते हुए दिखाई दे रहा है। इसके बाद भारत में इसको लेकर गुस्से का माहौल पैदा कर दिया। भारत सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसकी जानकारी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्यायुक्त से मांगी। प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग वीडियो वायरल हो जाने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए थे।
20 मार्च को दर्ज कराई गई थी प्राथमिकी
यह मामला सामने आने के बाद से पीड़ित लड़कियों के परिवार वालों ने कथित तौर पर इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने को लेकर 20 मार्च को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक रविवार रात पंजाब के रहीम यार खान जिले में पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की गई और कई लोगों को गिरफ्तार किया। इसमें दोनों की शादी कराने वाले निकाह खान, पाकिस्तान सुन्नी तहरीक के एक नेता और लड़कियों से शादी करने वाले दो पुरुषों के कुछ रिश्तेदार शामिल हैं। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि हिरासत में लिए गए संदिग्धों को सिंध पुलिस को सौंप दिया गया है। जियो टीवी के मुताबिक, नाबालिग लड़कियों ने पंजाब प्रांत के बहावलपुर की एक अदालत का रुख कर संरक्षण मांगा है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधीक्षक फारुख लंझार ने अपने बयान में कहा है कि लड़कियों का पता लगाने के लिए सभी उपलब्ध जानकारियों पर कार्रवाई की गई है।
धर्म परिवर्तन के खिलाफ बनना चाहिए कानून
बता दें कि पाकिस्तान में पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) पार्टी के हिन्दू सांसद रमेश कुमर वंकवानी ने कहा है कि धर्म परिवर्तन को लेकर एक सख्त कानून बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जबरन धर्मांतरण के खिलाफ तैयार किए गए विधेयक को प्राथमिकता के आधार पर असेंबली में पेश एवं पारित कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “धर्म के नाम पर नफरत की शिक्षा देने वाले सभी लोगों से सख्ती से निपटना जाना चाहिए।
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