
PoJK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालिया अशांति को लेकर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने गंभीर चिंता जताई है। HRCP के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ता संस्थागत अविश्वास, अभिव्यक्ति और संचार की आजादी पर प्रतिबंध के अलावा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य की सख्त कार्रवाई ने हालात को और तनावपूर्ण बनाया है। आयोग ने कहा कि कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल के इस्तेमाल ने भी स्थिति को बिगाड़ने में भूमिका निभाई।
HRCP ने जारी अपने बयान में कहा कि इन सभी कारणों ने क्षेत्र में ध्रुवीकरण बढ़ाया है। इससे लोगों का सरकारी और अन्य संस्थानों पर भरोसा कमजोर हुआ है। आयोग ने कहा कि उसे हिंसा के स्तर और प्रदर्शन के तरीकों को लेकर अलग-अलग दावे मिले हैं। जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के रवैये को लेकर भी अलग-अलग पक्षों ने अलग-अलग बातें बताई हैं।
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, राजनीतिक और सामुदायिक पक्षों के बीच एक बात पर काफी हद तक सहमति दिखाई दी। JKJAAC के समर्थक हों या विरोधी, दोनों पक्षों का मानना है कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान राजनीतिक बातचीत के जरिए होना चाहिए। आयोग ने कहा कि समस्याओं का हल जबरन कार्रवाई या दमन के जरिए निकालने के बजाय राजनीतिक स्तर पर किया जाना चाहिए।
HRCP ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों पर विशेष चिंता जताई है। आयोग ने कम से कम 147 JKJAAC कार्यकर्ताओं को फोर्थ शेड्यूल में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया। इसके अलावा राजनीतिक विरोध में शामिल लोगों पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के कथित इस्तेमाल की भी आयोग ने आलोचना की।
आयोग ने कहा कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारियों ने भी क्षेत्र में नागरिक स्वतंत्रता को प्रभावित किया है। आयोग के अनुसार, सरकार के साथ-साथ JKJAAC समर्थकों की ओर से मीडिया पर दबाव बनाए जाने की खबरों ने स्थिति को और मुश्किल बनाया है।
आयोग ने बाग में विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का भी जायजा लिया। जिन मतदान केंद्रों का टीम ने दौरा किया, वहां मतदाताओं को व्यवस्थित रूप से डराने-धमकाने के सीमित सबूत मिले। कुछ इलाकों में कम मतदान की वजह लोगों का स्वैच्छिक बहिष्कार और व्यवस्था से निराशा बताई गई, न कि सीधे तौर पर मतदान रोकना। हालांकि, आयोग ने व्यापक चुनावी माहौल को लेकर चिंता जताई। भारी सुरक्षा तैनाती, संचार प्रतिबंध, चरणबद्ध मतदान और कुछ सीटों पर चुनाव टलने को लेकर सवाल बने हुए हैं।
आयोग ने जून 2026 से अब तक हुई सभी मौतों और घायलों के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आयोग ने कहा कि जहां सबूत किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी साबित करते हैं, वहां राज्य अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों, दोनों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।