
-राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। एयर वाइस मार्शल चंदनसिंह बागावास ने वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की बाजी पलट दी थी। असम के जोरहट एयरफोर्स स्टेशन के एओसी रहते हुए गु्रप कैप्टन चंदनसिंह ने भारत-पाक युद्ध में ढाका पोस्ट पर रात को हैलीकॉप्टर्स उड़ाकर 3 हजार सैनिकों और 40 टन से अधिक हथियार व अन्य उपकरण पहुंचाकर पाकिस्तान को हार के रास्ते धकेल दिया था। 1971 के युद्ध में अदम्स साहस और पराक्रम का अनूठा उदाहरण देने के लिए सिंह को महावीर चक्र से सुशोभित किया गया। उन्होंने हैलीकॉप्टर संचालन में प्रमुख भूमिका निभाई, जिससे मेघना नदी को पार कर भारतीय सेना को ढाका तक पहुंचने में सफलता मिली।
3 दिसम्बर 1925 को पाली जिले के बागावास में जन्मे सिंह ने 16 साल की उम्र में जोधपुर लांसर्स में सैकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमिशन प्राप्त किया था। द्वितीय विश्व युद्ध में इराक, मिश्र, फारस और फिलीस्तीन में अपनी रेजिमेंट के साथ प्रतिनिधित्व किया। बाद में वे रॉयल इंडियन एयर फोर्स में शामिल हो गए। वे ऐसे योद्धा रहे हैं जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध से लेकर 1948 के कबायली आक्रमण, 1962 में चीन तथा 1965-1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध तक में वीरता और शौर्य का प्रदर्शन किया। सिंह ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के ऊपर कई उड़ानें भरी थीं। 1962 की जंग में उड़ीसा के चारबतिया में एविएशन रीसर्च सेंटर को बढ़ाने में मदद की। वे लड़ाकू विमान ही नहीं, मालवाहक विमान और हैलीकॉप्टर्स उड़ाने में पारंगत पाए गए हैं।
1980 में हुए सेवानिवृत, इसी साल छोड़ गए यादें
फाइटर पायलट के रूप में वायुसेना में दाखिल हुए सिंह 1980 में सेवानिवृत हो गए। वे मिग-21 की पहली स्क्वॉड्रन में भी शामिल थे। 1971 की जंग के आइकन रहे सिंह मार्च 2020 को 95 साल की उम्र में दुनिया से अलविदा कर गए।
पराक्रम से गौरवान्वित किया
एवीएम चंदनसिंह समेत कई भारतीय जाबांजों ने 1971 की जंग में अपने साहस और शौर्य का बेहतर प्रदर्शन किया। उनकी वीरता की कहानियां हमें गौरव का अहसास कराती है। इस युद्ध में पाली जिले से पांच वीरों ने देश की रक्षार्थ शहादत दी थी। थल, वायु और नौ सैना के सैकड़ों वीरों ने युद्ध जीतने में अपना योगदान दिया। ऐसे वीरों को नमन।
-कर्नल, जीएस राठौड़, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी, पाली