
पाली। शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर आबाद मणिहारी गांव। यहां की मिट्टी चना, सरसों, मूंग और बाजरा ही नहीं, हीरे-मोती भी उपजती है। इसी गांव के जाए जन्मे दिग्विजयसिंह शेखावत ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट (कमिशन रैंक) पद पर चयनित होकर गांव का गौरव बढ़ाया हैं। दिग्विजय की बहन उर्वशी भी पिछले साल भारतीय प्रशासनिक सेवा में चुनी गई थीं।
देश सेवा में समर्पित तीन पीढिय़ां
दिग्विजय के दादा अमरसिंह शेखावत जोधपुर लांसर्स में सूबेदार थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी वीरता और साहस का परिचय दिया था। पिता केशरसिंह शेखावत सेना में कर्नल पद पर रहे हैं। दादा और पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए दिग्विजय ने भी देश सेवा की राह चुनी। हिमाचल में एनडीए में चयनित होने के बाद तीन वर्ष तक राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पूणे में प्रशिक्षण लिया। शनिवार को पासिंग परेड के दौरान दिग्विजय को लेफ्टिनेंट पद पर कमिशन दिया गया। अब वे भारतीय सेना की टैंक रेजिमेंट में अपनी सेवाएं देंगे।
आइएमए में 12वीं रैंक, खेल में भी अग्रणी
दिग्विजय की प्रतिभा का अंदाजा उसकी रैंक से लगाया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने 12वीं रैंक हासिल की। दिग्विजय ने प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही सेना में जाने का सपना बुन लिया था। स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने एनडीए के लिए यूपीएससी परीक्षा 73वीं रैंक से उत्तीर्ण की। प्रशिक्षण के साथ-साथ पढ़ाई को पूरा महत्व दिया और कम्प्यूटर विज्ञान में स्नात्तक किया। पढ़ाई के साथ खेलों में भी उसकी पूरी रुचि है। फुटबॉल में टीम का नेतृत्व करते हैं।
सेवा में समर्पित पूरा परिवार
लेफ्टिनेंट दिग्विजय का सेना और सेवा से पूराना नाता रहा है। दादा और पिता सेना में रहे। चाचा भैरूसिंह शेखावत सेना से सेवानिवृत होने के बाद वर्तमान में गांव के सरपंच है। छोटे चाचा बख्तावरसिंह पुलिस में एएसआइ है। परिवार के अन्य कई सदस्य भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। कुछ सदस्य शिक्षक व नर्सिंग में सेवाएं दे रहे हैं।
गांव में खुशी का माहौल
गांव के लाल का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयन होने पर खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने खुशी जताई है। दिग्विजय के चाचा एएसआई बख्तावरसिंह शेखावत ने बताया कि दिग्विजय बचयन से ही होनहार रहा है। उसकी सफलता से गांव के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।