पाली

Patrika Guest Writer : बापू के अहिंसा सिद्धांत की वर्तमान में ज्यादा आवश्यकता, विश्व भी गांधी दर्शन का मुरीद

महात्मा गांधी जयंती 2023 विशेष :
2 min read
Oct 02, 2023
Patrika Guest Writer : बापू के अहिंसा सिद्धांत की वर्तमान में ज्यादा आवश्यकता, विश्व भी गांधी दर्शन का मुरीद
Patrika Guest Writer : बापू के अहिंसा सिद्धांत की वर्तमान में ज्यादा आवश्यकता, विश्व भी गांधी दर्शन का मुरीद

Mahatma Gandhi Jayanti 2023 : आज भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता और अहिंसा के दर्शन और रणनीति के प्रणेता महात्मा गांधी का जन्मदिन है। संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में पारित एक प्रस्ताव के बाद पूरा विश्व 2007 के बाद से इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मना रहा है। ये दिवस शिक्षा और सार्वजनिक जागरूकता सहित अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता और शांति, सहिष्णुता, समझ और अहिंसा की संस्कृति को सुरक्षित करने की इच्छा की पुष्टि करता है।

अहिंसा मानव जाति के लिए सबसे बड़ी शक्ति है। यह मनुष्य की ओर से तैयार किए गए विनाश के सबसे शक्तिशाली हथियार से भी अधिक शक्तिशाली है। अहिंसा का सामान्य अर्थ है हिंसा न करना। इसका व्यापक अर्थ है किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुंचाना। बापू के अनुसार अहिंसा एक दर्शन नहीं है, बल्कि कार्य करने की एक पद्धति है, हृदय परिवर्तन का साधन है। उन्होंने अहिंसा को व्यक्तिक आचरण तक ही सीमित न रखकर मानव जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में लागू किया। भारतीय संस्कृति अध्यात्म प्रधान है।

अध्यात्म की आत्मा अहिंसा है और अहिंसा भारतीय संस्कृति की एक धरोहर है। प्राचीन ऋषि महाऋषि से लेकर वर्तमान के महापुरुषों ने न सिर्फ अहिंसात्मक भावना पर बल दिया, अपितु अहिंसा को आदर्श बनाने का हर सम्भव प्रयास किया है। महात्मा गांधी के अनुसार अहिंसा एक दर्शन नहीं है बल्कि कार्य करने की एक पद्धति है।

विश्व भी गांधी दर्शन का मुरीद
गांधी के दर्शन का विश्व भी मुरीद है। उनके विचारों के अनुयायियों में मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला, हो ची मीन्ह, अब्दुल गफ्फार खान सरीखे कद्दावर नेता शामिल है, जो दमन के अहिंसक प्रतिरोध की गांधीवादी पद्धतियों से बेहद प्रभावित रहे हैं और उनका अनुकरण किया है। हाल ही में भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी.20 का ध्येय वाक्य वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर... अहिंसा के सिद्धांतों से ही प्रेरित है, जिसे अपनाकर उच्च मानवीय मूल्यों की स्थापना की जा सकेगी।

अहिंसा का दर्शन और गांधी
सत्याग्रह, अहिंसा और सादगी को ही एक सफल मनुष्य जीवन का मूलमंत्र मानने वाले गांधी के इन्ही आदर्शो से प्रभावित होने के बाद रविंद्र नाथ टैगोर ने पहली बार उन्हें महात्मा का दर्जा दिया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें राष्ट्रपिता कह कर पुकारा था। गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत एवं उसके प्रयोग की जितनी आवश्यकता उनके जीवित रहते थी, आज इसकी आवश्यकता उससे ज्यादा महसूस की जा रही है । गांधी की अहिंसा लोगों को समाज से विमुक्त नहीं करती, बल्कि उसे समाज में अहिंसा के प्रयोग करने को प्रेरित करती है। उनके विचार में राजनीति में सुधार का सर्वोत्तम साधन अहिंसा ही हो सकता है। अहिंसा के व्रतियों के लिए यह जरूरी है कि वह लोभ, दंभ, वासना, ईर्ष्या, घृणा तथा कपट से मुक्ति का पूरे मन से प्रयत्न करे।

Published on:
02 Oct 2023 04:37 pm