सर्दी, खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ी, सांस से जुड़ी बीमारी की निगरानी जरूरी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सीजन प्लांट व कंसंट्रेटर आदि को किया तैयार, चिकित्सालयों में कोविड की तरह तैयारी।
चीन में फैली बीमारी को लेकर जिले के साथ प्रदेश में प्रशासन सतर्क है। पाली के बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के साथ उप जिला अस्पतालों, सीएचसी व पीएचसी आदि में इन दिनों सर्दी, खांसी व जुकाम आदि के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। हालांकि इनमें अभी तक गंभीर रोगी नहीं मिले है और चीन की बीमारी जैसे लक्षण भी नहीं है। इसके बावजूद चिकित्सा विभाग सतर्क है। विभाग की ओर से फ्लू के लिए दवाएं व टीके, ऑक्सीजन, एंटीबायोटिक दवाइयां, उपकरण, जांच किट, ऑक्सीजन प्लांट, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर की स्थिति की जांच कर उनको तैयार कर लिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों को कोरोना की तरह तैयार किया गया है। जिससे जरूरत पड़ने पर तुरन्त उपचार करवाया जा सके।
यह है बीमारी का जिम्मेदार
चिकित्सकों के अनुसार चाइनीज इन्फ्लूएंजा बीमारी के लिए इन्फ्लूएंजा, माइकोप्लाज्मा निमोनिया और सार्स कोव 2 वायरस जिम्मेदार हैं। इससे लड़ने के लिए विभाग के पल्मोनरी, मेडिसिन व शिशु रोग विभागों खांसी, जुकाम के मरीजों को ध्यान से देख रहे हैं।
निमोनिया जैसे लक्षण
चीन में फैल रही बीमारी के निमोनिया जैसे लक्षण है। बच्चों को बिना खांसी के तेज बुखार और फेफड़ों में सूजन आ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए इस समय आवश्यक उपाय करने चाहिए। मास्क का उपयोग भी करना चाहिए।
मरीजों पर विशेष ध्यान
हमारे यहां चीनी बीमारी जैसा कुछ नहीं है। इसके बावजूद अस्पतालों में आने वाले सर्दी, जुकाम आदि के मरीजों का विशेष ध्यान रखकर जांच कर उपचार किया जा रहा है। चीन की बीमारी को लेकर आवश्यक तैयारियां भी पूरी है।
डॉ. इन्द्रसिंह राठौड़, सीएमएचओ, पाली
टॉपिक एक्सपर्ट
सर्दी, खांसी व जुकाम के मरीज आ रहे हैं। वे मरीज दो से तीन दिन में दवा लेकर ठीक हो रहे है। चीन के इंफ्लूएंजा जैसा कुछ नहीं है। फ्लू से बचने के लिए छह माह से ऊपर के बच्चों के साथ हर उम्र के लोग स्वाइन फ्लू का टीका लगवा सकते हैं। जो इंफ्लूएंजा लाइक इलेनस को कम करता है।
डॉ. आरके बिश्नोई, उप अधीक्षक, बांगड़ चिकित्सालय, पाली