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राजस्थान में जहां एक तरफ गोवंश की रक्षा और सेवा के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ मारवाड़ की धरती पर बेजुबान जानवरों के साथ क्रूरता की सारी हदें पार करने वाली एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। पाली जिले के समौखी गांव में एक खेत की खाई के नजदीक शिकारियों द्वारा छिपाकर रखे गए अवैध विस्फोटक सामग्री के संपर्क में आने से एक गाय गंभीर रूप से मौत और जिंदगी की जंग लड़ रही है। बताया जा रहा है कि धमाका इतना भीषण था कि उसकी गूंज दूर तक सुनाई दी। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक खून से लथपथ गोवंश दर्द से तड़प रहा था। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के किसानों और गौरक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय निवासी और चश्मदीद पन्नालाल मेघवाल ने ग्राउंड जीरो की आपबीती बताते हुए कहा कि सोमवार सुबह मोहराई ग्राम पंचायत के समौखी गांव के पास स्थित 'झालरा बेरा' नामक कृषि क्षेत्र के पास अचानक एक तेज धमाके की आवाज आई।
खून से लथपथ मिला गोवंश: जब पन्नालाल और अन्य ग्रामीण आवाज की दिशा में दौड़े, तो वहां का खौफनाक मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई।
क्षत-विक्षत हुआ जबड़ा: एक बेजुबान गाय वहां खड़ी तड़प रही थी, जिसके मुंह से लगातार खून की धारा बह रही थी। बारूद चबाने के कारण उसका पूरा मुंह और जबड़ा क्षत-विक्षत होकर बिखर चुका था।
ग्रामीणों ने तुरंत बिना एक पल गंवाए इस दिल दहला देने वाली घटना की जानकारी आस-पास के अन्य ग्रामीणों को दी और भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई।
घटनास्थल पर तनाव बढ़ने के बीच ग्रामीणों ने तुरंत पशु चिकित्सा टीम और सामाजिक संगठनों से संपर्क साधा। इस दौरान कामधेनु युवा फोर्स नागौर की टीम को विशेष रूप से सूचित किया गया।
त्वरित एम्बुलेंस सेवा: सूचना मिलते ही कामधेनु युवा फोर्स की रेस्क्यू टीम एक विशेष वाहन लेकर समौखी गांव पहुंची।
बिलाड़ा किया रेफर: गाय की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत पाली सीमा से सटे जोधपुर के बिलाड़ा सरकारी पशु अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों की टीम मुस्तैद: बिलाड़ा अस्पताल में अनुभवी सर्जनों की टीम ने गाय के फटे हुए जबड़े का जटिल उपचार और ड्रेसिंग शुरू की। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण फैलने का खतरा है और अगले 48 घंटे बेहद नाजुक हैं।
समौखी निवासी पन्नालाल मेघवाल और स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पिछले लंबे समय से एक अवैध शिकारी गिरोह सक्रिय है, जो जंगली सूअर, रोजड़े (नीलगाय) और अन्य वन्यजीवों का शिकार करने के लिए बेहद खतरनाक हथकंडे अपनाता है।
ग्रामीण बताते हैं कि ये शिकारी गिरोह आटे की लोई, गूंथे हुए आटे, या अन्य खाद्य पदार्थों के भीतर अत्यधिक संवेदनशील और अवैध बारूदी पटाखे/विस्फोटक (Explosives) छिपाकर खेतों की बाड़ और खाइयों के पास छोड़ देते हैं।
जब कोई भी जंगली जानवर या चरने वाला मवेशी इसे भोजन समझकर अपने मुंह में चबाता है, तो दबाव के कारण मुंह के भीतर ही एक बड़ा रासायनिक विस्फोट हो जाता है। इससे जानवर का जबड़ा टूट जाता है और वह भागने में असमर्थ हो जाता है, जिसका फायदा उठाकर शिकारी उसका शिकार कर लेते हैं।
इस दर्दनाक हादसे के बाद मोहराई और समौखी गांव के पंच-पटेलों ने स्थानीय पुलिस थाने में अज्ञात शिकारियों और बारूद रखने वाले अपराधियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है।
सघन तलाशी अभियान: समौखी, बेरी और आस-पास के खेतों व खाइयों की तुरंत मेटल डिटेक्टर या खोजी कुत्तों से जांच करवाई जाए, ताकि कहीं और छिपे हुए ऐसे खूनी बमों को बरामद कर नष्ट किया जा सके।
शिकारी गिरोह की गिरफ्तारी: जंगलों और खेतों के रास्ते अवैध हथियारों और बारूद के साथ घूमने वाले संदिग्धों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
पशुपालक को मुआवजा: पीड़ित गोवंश के मालिक की पहचान कर उसे उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर पुलिस ने दोषियों को नहीं पकड़ा, तो वे पाली-जोधपुर हाईवे पर चक्का जाम करने और उग्र प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
Published on:
19 May 2026 03:17 pm
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