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Exclusive : क्या राजस्थान में भी मिलता है आंध्र प्रदेश जैसा ‘ज्यादा बच्चे’ पर कैश इनाम? जानिए Inside Story

आंध्र प्रदेश में तीसरा बच्चा पैदा करने पर ₹30,000 का इनाम, तो राजस्थान में क्या है नियम? जानें चंद्रबाबू नायडू के चौंकाने वाले फैसले और मरुधरा की जनसंख्या नीति के बीच की पूरी इनसाइड स्टोरी।

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AP vs Rajasthan on Population Policy

AP vs Rajasthan on Population Policy

भारत में जनसांख्यिकी का एक ऐसा नया दौर शुरू हो चुका है, जिसने देश को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ दक्षिण भारत के राज्य हैं, जहाँ साक्षरता और आर्थिक विकास के चलते प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से काफी नीचे गिर चुकी है, जिससे वहां युवाओं की कमी और बुजुर्गों की संख्या बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। इसी खतरे को भांपते हुए आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने बड़ा दांव खेलते हुए तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर सीधे कैश रिवॉर्ड देने की घोषणा की है।

दूसरी तरफ राजस्थान जैसे राज्य हैं, जहां अभी भी जनसंख्या वृद्धि दर को स्थिर करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में यह जानना बेहद दिलचस्प है कि आंध्र प्रदेश और राजस्थान की वर्तमान जनसांख्यिकीय स्थिति क्या है और दोनों राज्यों में बच्चों के जन्म को लेकर सरकारें किस तरह की नीतियां अपना रही हैं।

आंध्र प्रदेश VS राजस्थान: जनसांख्यिकी और आबादी का पूरा गणित

दोनों राज्यों की आबादी की प्रकृति, विकास दर और प्रजनन क्षमता (Total Fertility Rate - TFR) में जमीन-आसमान का अंतर है। नीचे दिए गए आंकड़ों से इसे आसानी से समझा जा सकता है:

जनसांख्यिकीय मानक आंध्र प्रदेश राजस्थान(Rajasthan)मुख्य अंतर / प्रभाव
अनुमानित वर्तमान आबादी
(Estimated Population 2026)
लगभग 5.4 - 5.5 करोड़लगभग 8.3 - 8.5 करोड़राजस्थान क्षेत्रफल के साथ-साथ आबादी में भी आंध्र प्रदेश से काफी बड़ा राज्य है।
टोटल फर्टिलिटी रेट
(TFR - SRS 2021)
1.7
(रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से बहुत नीचे)
2.4
(रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से अधिक)
आंध्र प्रदेश में प्रति महिला बच्चों का औसत कम होने से आबादी घट रही है, जबकि राजस्थान में आबादी अभी भी बढ़ रही है।
क्रूड बर्थ रेट
(Crude Birth Rate - CBR)
राष्ट्रीय औसत से काफी तेजी से गिर रहा है।राष्ट्रीय औसत से धीमी गति (-0.48%) से गिर रहा है।आंध्र प्रदेश में जन्म दर में भारी गिरावट देखी जा रही है, जबकि मरुधरा में यह गिरावट बेहद धीमी है।
जनसंख्या नीति का मुख्य फोकस
(Population Policy Focus)
आबादी को बूढ़ा होने से बचाना और युवाओं की संख्या बढ़ाना।जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना और स्थिर करना।आंध्र प्रदेश 'बेबी बूम' (ज्यादा बच्चे) को प्रमोट कर रहा है, जबकि राजस्थान 'टू-चाइल्ड पॉलिसी' पर सख्त है।
सरकारी प्रोत्साहन / नियम
(Govt Schemes & Norms)
तीसरे बच्चे पर ₹30,000 और चौथे बच्चे पर ₹40,000 का कैश इनाम।तीसरे बच्चे पर पाबंदी; 2 से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी और चुनाव लड़ने पर रोक।दक्षिण भारत आबादी बढ़ाने के लिए बजट खर्च कर रहा है, वहीं उत्तर भारत नियंत्रण के लिए कड़े कानून अपना रहा है।


आंध्र प्रदेश का संकट: क्यों पैसे बांट रहे हैं चंद्रबाबू नायडू?

आंध्र प्रदेश का फर्टिलिटी रेट (TFR) घटकर 1.7 रह गया है। इसका मतलब है कि वहां औसतन एक महिला अपने जीवनकाल में 2 से भी कम बच्चों को जन्म दे रही है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले 20 सालों में आंध्र प्रदेश में कार्यशील युवाओं की भारी कमी हो जाएगी और राज्य पर बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा का आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।

इसी 'एजिंग पॉपुलेशन' के खतरे को रोकने के लिए नायडू सरकार तीसरे बच्चे पर ₹30,000 और चौथे बच्चे पर ₹40,000 की वित्तीय मदद दे रही है।

राजस्थान में क्यों नहीं दी जा सकती ऐसी छूट?

इसके विपरीत, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS 2021) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान का टीएफआर (TFR) 2.4 है। यानी मरुधरा में आबादी बढ़ने की रफ्तार अभी भी राष्ट्रीय रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से काफी ऊपर है। राजस्थान में अभी भी प्रति महिला बच्चों का औसत अधिक है, जिसके कारण संसाधनों (जैसे पानी, रोजगार, स्वास्थ्य) पर भारी दबाव है। इसलिए राजस्थान सरकार का पूरा ध्यान आबादी बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उसे नियंत्रित करने और मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने पर है।

राजस्थान में तीसरे या चौथे बच्चे के जन्म पर कोई प्रोत्साहन राशि (Incentive) नहीं मिलती है। इसके विपरीत, राजस्थान में 'टू-चाइल्ड पॉलिसी' (Two-Child Policy) के तहत तीसरे बच्चे के जन्म पर कई कड़े प्रतिबंध और प्रशासनिक पाबंदियां लागू हैं।

राजस्थान में तीसरे बच्चे के जन्म पर 'सजा' के प्रावधान:

सरकारी नौकरी पर संकट: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम और सरकारी सेवा नियमों के तहत, यदि किसी व्यक्ति के 1 जून 2002 के बाद दो से अधिक जीवित संतानें (तीसरा बच्चा) होती हैं, तो वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं माना जाता।

प्रमोशन में रुकावट: सरकारी कर्मचारियों के तीसरा बच्चा होने पर उनकी पदोन्नति (Promotion) को 5 साल तक के लिए टाला या रोका जा सकता है।

चुनाव लड़ने पर पाबंदी: चुनावों में दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकते। हालांकि पंचायती राज और स्थानीय निकाय (Municipal) चुनावों के लिए शर्तों को ख़त्म कर दिया गया है, जिससे दो से ज़्यादा संतान वाले भी चुनाव लड़ सकते हैं।

राजस्थान सरकार की प्रसूति और बाल कल्याण योजनाएं

राजस्थान सरकार तीसरे बच्चे को प्रमोट नहीं करती, लेकिन पहली और दूसरी संतान (विशेषकर बालिकाओं) के जन्म पर स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक संबल देने के लिए कई बेहतरीन योजनाएं चलाती है।

लाडो प्रोत्साहन योजना

राजस्थान सरकार ने बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए इस मेगा योजना शुरु की है।

किसे मिलता है लाभ: गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में पहली और दूसरी बेटी के जन्म पर।

कितनी मिलती है राशि: कुल ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) की आर्थिक सहायता 7 अलग-अलग किश्तों में दी जाती है।

उद्देश्य: बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, कॉलेज ग्रेजुएशन (21 वर्ष की आयु होने तक) का पूरा खर्च सरकार उठाती है ताकि कन्या भ्रूण हत्या रुके।

जननी सुरक्षा योजना (केंद्रीय व राजकीय समन्वय)

पात्रता: संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रसूताओं को (विशेषकर ग्रामीण और बीपीएल श्रेणी)।

कितनी मिलती है राशि: ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर माता को ₹1,400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1,000 की नकद सहायता सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।