
कोरोना महामारी के बाद मरीजों का आयुर्वेद पर भरोसा तो बढ़ा है, लेकिन उपचार की यह प्राचीन पद्धति मरीजों का दर्द कम नहीं कर पा रही है। आयुर्वेद चिकित्सालयों में कई बीमारियों की दवा ही नहीं पहुंच रही। हालात यह है कि पिछले काफी समय से जुकाम व खांसी जैसी बीमारी की दवा भी कई चिकित्सालयों में नहीं है। इस कारण आयुर्वेद पद्धति से उपचार कराने पहुंचने वाले लोगों को बाजार से दवा लानी पड़ रही है।
आयुर्वेद विभाग में प्रदेश की रसायनशालाओं से दवाओं की आपूर्ति होती है। आयुष मिशन के तहत एनआरएचएम से दवाओं की राशि मिलती है। इस पर काफी समय से रोक थी। जिससे चिकित्सालयों में गंभीर बीमारियों के उपचार की कई दवाओं की कमी हो गई। एनआरएचएम के तहत अब प्रदेश स्तर पर 8 करोड़ रुपए मिले हैं, लेकिन दवा खरीद अभी शुरू नहीं हुई है।
दो दिन पहले भेजी 28 दवा
जोधपुर संभाग के जिलों में जोधपुर रसायनशाला से दवाओं की आपूर्ति होती है। वहां से दो दिन पहले ही पाली, जैसलमेर, बाड़मेर, सिरोही व बीकानेर के चिकित्सालयों के लिए 28 तरह की दवा भेजी गई है। जबकि एनआरएचएम के माध्यम से करीब 50 से अधिक तरह की दवाओं की आपूर्ति की जाती है। जो अधिकांश चिकित्सालयों में अभी उपलब्ध नहीं है।
जोधपुर में बनते हैं 16 चूर्ण
आयुर्वेद में कई दवाएं चूर्ण के रूप में होती है। जोधपुर की रसायनशाला में 16 तरह के चूर्ण तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा प्रदेश की अजमेर, उदयपुर व भरतपुर आदि की रसायनशालाओं में दवाओं का निर्माण होता है। इन सभी रसायनशालाओं से आयुर्वेद चिकित्सालयाें में करीब 28 तरह की दवा भेजी जाती है। इनमे आंवला, त्रिफला, हरितिकी अग्निसंदीपन आदि दवाएं शामिल है।
आयुष मिशन से नहीं मिली दवा
आयुष मिशन के तहत एनआरएचएम से दवा की राशि आती है। जिससे दवा खरीदी जाती है। मिशन से अब 8 करोड़ रुपए मिले है। इस राशि से दवाओं का टेंडर जल्द करेंगे।
-डॉ. आनन्द शर्मा, निदेशक, आयु़र्वेद विभाग राजस्थान, अजमेर
सप्लाई की व्यवस्था कर रहे हैं
आयु़र्वेद के दवाओं की आपूर्ति करने की व्यवस्था कर रहे हैं। जो दवाएं प्रदेश की रसायनशालाओं से आती है। उनको कई जिलों में भेजा भी गया है। दवाइयां सामान्य बीमारियों की ही आ रही है।
-डॉ. योगेन्द्र उपाध्याय, अतिरिक्त आयुर्वेद निदेशक, जोधपुर