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Desuri Nal Tragedy: राजस्थान में जहां 19 साल पहले एक साथ 86 लोगों की हुई थी मौत, वहां आज भी हर मोड़ पर खतरा

Desuri Nal Accident: 7 सितम्बर 2007… शाम का वक्त था… देसूरी नाल से होकर रामदेवरा जा रहा एक ट्रक अचानक अनियंत्रित हुआ और देखते ही देखते गहरी खाई में जा गिरा। चारों तरफ चीख-पुकार थी। अपनों को तलाशते लोग बदहवास थे।
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पाली

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Anil Prajapat

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Updated: 7 Sep 2026, 1:58 PM IST

Desuri Nal tragedy

Desuri Nal tragedy (फोटो: पत्रिका)

पाली। 7 सितम्बर 2007… शाम का वक्त था… देसूरी नाल से होकर रामदेवरा जा रहा एक ट्रक अचानक अनियंत्रित हुआ और देखते ही देखते गहरी खाई में जा गिरा। चारों तरफ चीख-पुकार थी। अपनों को तलाशते लोग बदहवास थे। इस हादसे में 86 से अधिक जातरूओं की जिंदगियां खत्म हो गई। 64 जने घायल हुए। देसूरी नाल अचानक पूरे राजस्थान की चिंता बन गया। सरकार सक्रिय हुई। अधिकारी पहुंचे। राहत और मदद के ऐलान हुए। सवाल उठा कि आखिर इस खतरनाक रास्ते को सुरक्षित क्यों नहीं बनाया गया?

सड़क चौड़ी करने की बातें हुई। सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने के प्रस्ताव बने। फिर एलिवेटेड रोड का सपना दिखाया गया। लेकिन… 19 साल बीत गए। बदला कुछ नहीं। उस हादसे में जिन बच्चों ने पिता खोया था, वे आज जवान हो चुके हैं। जिन परिवारों की आंखों के सामने उस दिन का मंजर था, उनके बाल सफेद हो चुके है। हादसे में अपनों को खोने वालों की जिंदगी आगे बढ़ गई… लेकिन देसूरी नाल वहीं का वहीं है।

आज भी सड़क संकरी... वही खतरनाक मोड़

आज भी सड़क संकरी है। वही खतरनाक मोड़ हैं। वही पहाड़ी रास्ता है। वाहन चालक आज भी यहां से गुजरते हुए सावधानी बरतते हैं। हर बार कोई हादसा होता है तो 7 सितम्बर 2007 की याद फिर ताजा हो जाती है। इन बीते 19 वर्षों में यह नाल अलग-अलग हादसों में डेढ़ सौ से अधिव लोगों की जिंदगी लील चुकी है। देसूरी नाळ की घुमावदार सड़क और खतरनाक मोड़ आज भीं खौफ पैदा करते हैं।

चश्मदीद सुरेश हेमनानी ने बताया: वो मंजर आज भी आंखों के सामने

7 सितंबर 2007 को देसूरी नाल हादसे की कवरेज के लिए पहुंचा था। करीब 80 फीट गहरी खाई में ट्रक गिरा था। नीचे उतरते ही एक 6-7 साल का बच्चा नजर आया। उसका आधा शरीर ट्रक से बाहर था और पैर नीचे दबे थे। लगा, शायद उसकी जान बच जाए। उसे निकालने की कोशिश की। लेकिन बाहर निकालते ही उसका शरीर दो हिस्सों में बंट गया। यह देखकर रूह कांप गई। कपड़े खून से भर गए। उस दिन 86 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन उस मासूम का चेहरा आज भी आंखों के सामने है। राजसमंद चिकित्सालय के हॉल में लाशें रखने की ठोर तक नहीं बची थी। लकड़ियां नहीं मिली तो शेमल गांव में एक चिता पर ही 30 लोगों को जलाया था।

एक चिता पर 30 लोगों का अंतिम संस्कार

ट्रक में सवार यात्री राजसमंद जिले के मुख्यत तीन गांव शेमल, मादड़ी देवस्थान, भावा गांव के थे। शेमल में 30 लोगों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया था।

प्रस्तावित सड़क सुधार योजना-वन क्षेत्र

यहां के लिए बनी डीपीआर के अनुसार देसूरी से चारभुजा जाने वाले सड़क के दाई ओर दी तथा बाई ओर पहाड़ी भू-भाग है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण सड़क के डिजाइन एवं निर्माण में कई बाधाएं है। इस क्षेत्र में मौजूदा सड़क की ज्यामिति काफी खराब है। सड़क पर अधिक ढाल, तीखे मोड़ और अपर्याप्त दृश्य दूरी है, जिसके कारण वाहन चलाना असुरक्षित हो जाता है और यातायात की गति एवं संचालन क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा, सड़क की सतह (पेवमेंट) की स्थिति खराब है तथा जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था भी अपर्याप्त एवं जर्जर है।

यह करना प्रस्तावित

इस वन क्षेत्र में सड़क की ज्यामिति, पेवमेंट एवं ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार करते हुए यातायात को अधिक सुरक्षित, सुगम और प्रभावी बनाने के लिए पूरे वन क्षेत्र में नदी की ओर सिंगल पियर (एकल पिलर) पर एलिवेटेड रोड विकसित करने का प्रस्ताव है। इस संरचना से सड़क की ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज ज्यामिति में सुधार होगा। वन क्षेत्र में पर्यावरणीय व्यवधान और भूमि अधिग्रहण को न्यूनतम किया जा सकेगा। वन्यजीव/वन क्षेत्र में एलिवेटेड रोड/टनल रोड के निर्माण का प्रावधान किया है। यह विशेष प्रावधान पुराने एसएच-16 के किमी 281/500 से किमी 290/00 के बीच प्रस्तावित है।

फैक्ट फाइल

-राजसमंद और पाली जिले की सीमा मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाला मार्ग
-9 किलोमीटर लंबा सिंगल पोल
-एलिवेटेड स्काई-वे प्रस्तावित
-परियोजना की अनुमानित लागत 2 हजार करोड़
-86 जनों की मौत 7 सितम्बर 2007 को
-पुलिस और परिवहन विभाग ने कर रखा डेंजर जोन घोषित

प्रस्ताव बने हैं

केन्द्रीय मंत्री सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को पाली से चारभुजा तक के रोड को बनाने के लिए आग्रह किया है। यह रोड करीब 83 किमी की है। इसकी डीपीआर बन चुकी है। इस मार्ग को बनाने में करीब 1800 से 2 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसी में देसूरी से चारभुजा के बीच अरावली की पहाड़ियों के वन क्षेत्र में एलिवेटेड रोड व टनल बनाना प्रस्तावित किया है। इसकी स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद है। इसे लेकर फिर सरकार से चर्चा करेंगे।
-पीपी चौधरी, सांसद, पाली

डीपीआर में ऑब्जेक्शन लग गए

देसूरी-चारभुजा के बीच एलिवेटेड रोड की डीपीआर बनी थी। उसमें कुछ ऑब्जेक्शन लग गए। इस कारण उसमें अब वापस सुधार का कार्य चल रहा है।
-अंजू चौधरी, अधीक्षण अभियंता, आरएसआरडीसी, जोधपुर