Paryushan Mahaparva 2023: पर्युषण महापर्व के चलते जैन समाजबंधु परमात्मा की भक्ति में लीन है। श्रावक-श्राविकाएं रोजाना चांदी व मोतियों से आंगी सजाकर आराधना कर रहे हैं।
Paryushan Mahaparva 2023: पाली में पर्युषण महापर्व के चलते जैन समाजबंधु परमात्मा की भक्ति में लीन है। मंदिरों में परमात्मा की मनमोहक आंगी सजाई जा रही है। परमात्मा के रोजाना दर्शन व पूजन के लिए आने वाले श्रावक-श्राविकाएं प्रभु का मनमोहक स्वरूप निहारते रह जाते हैं। भारत की दूसरी सबसे बड़ी पेढ़ी सेठ नवलचंद सुप्रतचंद जैन मूर्तिपूजक तपागच्छ जैन देवकी पेढ़ी के नवलखा मंदिर के साथ अन्य मंदिरों में परमात्मा की श्रावक-श्राविकाएं रोजाना चांदी व मोतियों से आंगी सजाकर आराधना कर रहे हैं।
व्याख्यान श्रवण के बाद सजाते आंगी
पर्युषण में सुबह सामायिक आदि करने के बाद श्रावक-श्राविकाएं व्याख्यान श्रवण करते हैं। इसके बाद पूजन के वस्त्र पहनकर नवलखा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में जाते हैं। वहां सुबह दस बजे से चांदी के कवच पर विभिन्न सामग्री से दोपहर दो बजे तक आंगी सजाते हैं।
प्रभु के दिखाते तीन रूप
परमात्मा के मंदिर में प्रभु के तीन रूप दिखाने होते है। बाल्यकाल, युवावस्था व निर्वाण अवस्था। ये रूप दिखाने के लिए आंगी सजाई जाती है। मंदिर में सुबह अभिषेक के समय बाल्यकाल का रूप है। राज्यवस्था के रूप में दिखाने के लिए मुकुट आदि पहनाते है। संध्या के समय परमात्मा का तीसरा रूप निर्वाण अवस्था का दिखाया जाता है। जब परमात्मा का निर्वाण हो जाता है तब देवी-देवता परमात्मा का अभिषेक कर प्रभु को श्रृंगारित करते हैं। इसी परम्परा के तहत परमात्मा की आंगी सजाई जाती है।