
पाली। देश में अनाज का भंडार कहे जाने वाले पंजाब और हरियाणा के लोगों को अपने खेतों का अनाज रास नहीं आ रहा है। यहां के लोग मारवाड़ के पाली जिले से गेहूं मंगवा रहे हैं। सब्जी, घी व अन्य कृषि उत्पादों के लिए भी मारवाड़ का रुख कर रहे हैं। इसका कारण दोनों प्रदेशों में फसलों में रासायनिक खाद के उपयोग से बीमारियों का खतरा मंडराना तथा मारवाड़ में जैविक कृषि से उत्पादों की गुणवत्ता बढऩा बताया जा रहा है। किसानों को इसका फायदा हो रहा है। जैविक खेती से उत्पादित गेहूं 3000 रुपए क्विंटल है। पंजाब-हरियाणा में इसके 3500 से 4000 रु. क्विंटल मिल रहे हैं।
सेहत सुधार रहा मारवाड़ का गेहूं
चौकडिय़ा गांव के किसान हनुवंतसिंह ने बताया मारवाड़ में जैविक खेती से उपजा गेहूं सेहत सुधारने में मददगार है। पंजाब और हरियाणा के हजारों लोग हर साल मारवाड़ से यह गेहूं खरीदते हैं। वहां की उपज में पेस्टिसाइड के अधिक उपयोग से कैंसर का खतरा बढ़ रहा है।
बढ़ रहा कैंसर का खतरा
दरअसल, पंजाब व हरियाणा में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुछ सालों से रासायनिक खाद व कीटनाशक का प्रयोग बढ़ गया है, इससे वहां अनाज गुणवत्ता प्रभावित होती जा रही है। साथ ही ऐसे अनाज के सेवन से लोगों में कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी मंडाराने लगा है। पंजाब व हरियाणा में कैंसर आंकड़े का तेजी से बढऩे का कारण भी ये ही है।
700 से ज्यादा किसान कर रहे जैविक खेती
- पाली में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या 700 से ज्यादा है। इस तरह की खेती में अनाज की गुणवत्ता के लिए कम्पोस्ट खाद व कीटनाशक के रूप में गौ मूत्र का उपयोग किया जाता है। इनके खेतों में होने वाली फसलों की जिले के लोग ही नहीं, पंजाब और हरियाणा के लोग भी खरीदते हैं।
डॉ. धीरजसिंह, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, पाली