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‘पापा कब आएंगे?’ बिलखती खुशबू का सवाल सुन भर आईं आंखें, पाली अग्निकांड में बच्चों ने बयां किया दर्द

पाली के औद्योगिक क्षेत्र स्थित सारड़ा बायो पॉलीमर्स फैक्ट्री में लगी भीषण आग में बिहार के चार श्रमिकों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने बिहार के गया जिले के चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। मृत श्रमिकों में गया निवासी नीतीश कुमार, उपेंद्र, राम अवतार चौधरी और विक्की राजवंशी शामिल हैं।
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पाली

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Arvind Rao

•

Oct 22, 2026

pali factory fire news

राम अवतार का शव एंबुलेंस में रखते परिजन (पत्रिका फोटो)

Pali Factory Fire News: ‘पापा कब आएंगे?’ बिहार में गया जिले के गोगा गांव में बैठी खुशबू का यह सवाल सुनकर किसी का भी कलेजा भर आए। उसे पता है कि जिस पिता के लौटने की राह वह अपनी भाभी पूजा, बहन पिंकी और मौसी के साथ देख रही है, वे अब कभी दरवाजे पर आकर उसे आवाज नहीं देंगे। लेकिन पिता को देखने के लिए बैठी बेटी अब भी इंतजार कर रही है।

उस बेटी से बात करने पर वह बोली, ‘हम अनाथ हो गए।’ उसके ये शब्द उस दर्द को बयां करने के लिए काफी थे, जो उसे पाली की फैक्ट्री में लगी आग ने दिया है। उसके पिता के साथ बुधवार को जब चारों श्रमिकों के शव लेकर उनके परिजन बिहार रवाना हुए, तो उनके साथ सिर्फ अपनों के पार्थिव शरीर नहीं थे, बल्कि अधूरे सपने और जीवनभर न भरने वाला खालीपन भी था।

बिखर गया पूरा परिवार

गया जिले के गोगा गांव की खुशबू अपने पिता राम अवतार चौधरी (56) के लौटने का इंतजार कर रही थी। उससे फोन पर बात शुरू हुई तो उसने पहले पूछा, ‘आप कहां से बोल रहे हैं?’ जैसे ही उसे पाली का नाम बताया, मन में पिता की याद जाग उठी। उसने तुरंत पूछा, ‘पापा कब आएंगे?’ उसने बताया कि वह, उसकी भाभी पूजा, बहन पिंकी और मौसी सभी राह देख रहे हैं।

‘पिता को खो दिया, अब मामला दर्ज करवाकर क्या करेंगे’

जोधपुर आए राम अवतार के बेटे शंकर कुमार ने बताया कि पिता जिस फैक्ट्री में काम करते थे, वहां से 7 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मिली है। परिवार को गांव ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी करवाई गई। अब पिता का शव लेकर गांव जा रहे हैं। उसने कहा, अब पुलिस में मामला दर्ज करवाकर भी क्या करेंगे, हमने तो पिता को खो दिया।

रोजी-रोटी की तलाश में आए थे, पीछे छोड़ गए अधूरे सपने

इन श्रमिकों के लिए पाली काम करने और अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने का ठिकाना था। मेहनत करने वाले इन लोगों के मन में भी कई उम्मीदें थीं। कोई बच्चों के भविष्य के लिए कमाता था, तो कोई घर का खर्च चलाने के लिए। लेकिन फैक्ट्री में लगी आग ने उन उम्मीदों को एक ही रात में छीन लिया। झुलसे श्रमिक राजेंद्र कुमार का उपचार जोधपुर में जारी है।

फैक्ट्री में लगी थी भीषण आग

पाली के औद्योगिक क्षेत्र चतुर्थ चरण स्थित सारड़ा बायो पॉलिमर्स फैक्ट्री में 18 अक्टूबर की रात लगी भीषण आग ने चार श्रमिकों की जिंदगी छीन ली। बिहार के गया निवासी नीतिश कुमार और उपेंद्र की आग में जिंदा जलने से मौत हो गई थी। वहीं, गंभीर रूप से झुलसे विक्की राजवंशी (21) और राम अवतार चौधरी (56) ने मंगलवार को जोधपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उधर, पाली के बांगड़ अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद नीतिश कुमार और उपेंद्र के शव लेकर उनके परिजन भी बिहार रवाना हुए। विक्की के परिजन गहरे सदमे में थे और उन्होंने बातचीत नहीं की।