पाली

मिशन पूर्ण शक्ति प्रोजेक्ट को लेकर आई यह अच्छी खबर

- हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश  
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Updated: 11 Dec 2017, 2:26 PM IST
rajasthan high court

पाली.

राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला सशक्तीकरण प्राधिकरण पाली के तहत संचालित मिशन पूर्ण लोकशक्ति प्रोजेक्ट को बंद करने व इसके तहत 150 ग्राम पंचायतों में छह वर्ष से जारी प्रोजेक्ट में कार्यरत महिला ग्राम समन्वयकों को बर्खास्त करने बाबत 27 नवम्बर को जारी आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

इस मामले में सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला कलक्टर, चेयरमैन व सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। यह आदेश डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने याचिकाकर्ताओं खैरुनिशा व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई में दिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता नरपतसिंह चारण ने कहा कि एक ओर सरकार महिला सशक्तीकरण अभियान चला रही है। दूसरी ओर गांवों में जच्चा-बच्चा कुपोषण की समस्याओं के चलते नौनिहालों की मृत्युदर बढ़ती जा रही है। सरकार इस तरह के प्रोजेक्ट को बंद कर सिर्फ एक ही जिले के की 150 ग्राम पंचायतों में छह वर्ष से संतोषप्रद रूप से कार्यरत महिला ग्राम समन्वयकों को सेवा से पृथक कर रही है। यह आश्चर्यजनक है। वहीं विधि विरुद्ध व मनमाना, महिला सशक्तीकरण के विरुद्ध तथा प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध भी है, क्योंकि इनको हटाने से पहले किसी का पक्ष तक नहीं जाना गया।

2011 में शुरू किया गया था प्रोजेक्ट

पाली जिले में यह प्रोजेक्ट महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ग्राण्ट इन एड के तहत जिला महिला सशक्तीकरण प्राधिकरण के माध्यम से छह साल पहले 2011 में शुरू किया था। मकसद था केन्द्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी और उनके लाभ ग्राम पंचायत स्तर के निचले तबकों तक पहुंचाना। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली। ग्राम समन्वयक जिला प्रशासन और मदर एनजीओ शनिधाम ट्रस्ट के साथ जुडकऱ जमीनी स्तर पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के साथ जनहितकारी योजनाओं पर काम कर रही थी।

पाली में 189 ग्राम समन्वयकों की नौकरी खत्म

मिशन पूर्ण शक्ति ? प्रोजेक्ट में पाली जिले में 219 ग्राम समन्वयक निचले स्तर पर सरकारी सूचनाएं पहुंचाने का काम कर रही थी। इनमें से पिछले दिनों 22 ग्राम समन्वयकों का अन्यत्र सेवाओं में चयन हो गया। अभी 189 ग्राम समन्वयकों को हर माह प्रोजेक्ट में सरकार की ओर से चार हजार रुपए मानदेय और लगभग 1500 रुपए यात्रा भत्ता मिल रहा था। जिला प्रशासन ने मंत्रालय के आदेश मिलने के बाद जिले में 189 ग्राम समन्वयकों की मानदेय सेवा खत्म करने का फैसला कर लिया था।

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