एक ही दिन में 14 इंच बरसात के बाद पूरे शहर में भरा है पानी
पाली शहर जो जलाशयों के किनारे बसा है। उनमे पानी की आवक व निकासी के रास्ते अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए है। जिसका परिणाम यह है कि शहर में एक ही दिन में करीब 14 इंच बरसात होने के तीसरे दिन भी बुधवार को 70 से अधिक कॉलोनियों में लोग पानी से भरे घरों में कैद रहे। इन हालातों के लिए जिम्मेदार जितना नगर निकाय है, उतने ही शहरवासी भी है। जिन्होंने लोर्डिया बांध व लाखोटिया तालाब की जल निकासी के मार्ग अवरुद्ध कर दिए। हालात यह है कि शहर में थोड़ी बरसात के पानी की आवक होते ही शहर का करीब 70 प्रतिशत भाग जलमग्न हो जाता है। कई क्षेत्रों में तो तीन से चार फीट तक पानी का भराव हो जाता है। जो एक-एक सप्ताह तक खाली नहीं होता।
-स्टॉर्म वॉटर ड्रेन सिस्टम: बरसाती पानी के लिए अलग से ड्रेनेज सिस्टम बनाना चाहिए, जो नियमित साफ और मेंटेन किया जाए।
-सीवर और ड्रेनेज सिस्टम का अलग-अलग: सीवर और बरसाती पानी के ड्रेनेज सिस्टम को अलग-अलग रखना चाहिए ताकि बारिश के समय सीवर ओवरफ्लो न हो।
-हरित क्षेत्र और पेड़-पौधे: अधिक से अधिक हरित क्षेत्र और पेड़-पौधे लगाने चाहिए ताकि पानी जमीन में सोख सके।
-पानी का पुनर्चक्रण और संरक्षण: बरसाती पानी को इकट्ठा कर पुनर्चक्रण और संरक्षण के लिए उपयोग किया जा सकता है।
-नगर परिषद उपसभापति ललित प्रितमानी का कहना है कि पाली में लाखोटिया के ओवरफ्लो पानी के नाले को पाटने के कारण आज पन्द्रह से बीस कॉलोनियां जलमग्न हो रही है। उसमें सरकारी स्तर पर भी निर्माण करवा दिए है।
-बुजुर्ग नाथूराम भायल बताते है कि पहले शहर में पानी का भराव नहीं होता था। जोगड़ावास, बोमादड़ा क्षेत्र से पानी आता था। चादरवाला बालाजी के पास प्राकृतिक नाला था। वहां से पानी निकलता था। जो नाडियों में भरने के बाद नदी में पहुंचता था।
पूरे शहर का होना चाहिए सर्वे
पूरे शहर का होना चाहिए सर्वे। उसकी बननी चाहिए डीपीआर। इसके बाद उसके अनुसार पानी निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए। पाली में मुख्य रोडों पर नालों का अभाव है। कई मोहल्लों में नालियां नहीं है। इससे यहां सड़कों पर पानी का भराव हो सकता है। ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने के लिए सर्वे की जरूरत है। शहर में सुंदर नगर से केवल एक जगह से पानी बांड़ी नदी में जाता है। इसके अलावा अन्य जगह से पानी निकासी नहीं है। पठान कॉलोनी, रजत विहार, संतोष नगर सहित नया गांव क्षेत्र से पानी निकासी नहीं है। इस कारण से पानी का भराव होता है।
-सुखराम, सेवानिवृत्त एक्सईएन
पाली के नया गांव क्षेत्र में खेतावास की तरफ से पानी आता है। वहां से लोर्डिया तक पानी के प्राकृतिक बहाव का क्षेत्र बंद हो गया है। लाखोटिया से भी पानी निकासी के नाले बंद हो गए है। ऐसे में पानी का भराव होता है। इसके लिए जरूरत है कि निकासी के लिए नालों का निर्माण किया जाए। पूर्व में हाइवे से बांडी नदी व लोर्डिया फीडर में पानी डालने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर के पास व नया गांव क्षेत्र में दो नाले बनाए थे। वे बरसाती पानी की निकासी के लिए पर्याप्त नहीं है। लाखोटिया की पानी निकासी के लिए बने नालों में अतिक्रमण हो गए।
-विरेन्द्रपाल शर्मा, सेवा निवृत्त उप नगर नियोजक, पाली