बस का मैंटनेंस भी ग्रामीण उठाएंगे, अब कम नहीं होगा नामांकन
पाली जिले के रोहट क्षेत्र के धरमधारी गांव के ग्रामीणों ने शिक्षा को ही धर्म मानते हुए अनूठी मिसाल पेश की है। विद्यालय के गांव से दूर होने के कारण बच्चों की, विशेषकर बेटियों की पढ़ाई नहीं छूटे, इस मंशा से गांव के लोगों ने 25 लाख रुपए जुटा लिए और बस खरीदकर सरकारी विद्यालय को सुपुर्द कर दी। खास बात ये कि बस के चालक-परिचालक के साथ ही डीजल का खर्च भी ग्रामीण ही वहन करेंगे। बस की चाबी मंगलवार को स्कूल की संस्था प्रधान को सौंपी गई। अब बच्चे बस से स्कूल आ-जा सकेंगे।
दरअसल, धरमधारी गांव का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पहले गांव में िस्थत था, लेकिन कुछ समय पहले नया भवन तैयार हुआ तो विद्यालय वहां पर संचालित होने लगा, जो कि गांव से करीब दो किलोमीटर दूरी पर िस्थत है। विद्यालय दूर होने के कारण नामांकन कम होने लगा और गांव के बच्चे स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हो गए। इस पर ग्रामीण एकत्रित होकर संस्था प्रधान नीता पोरवाल के पास पहुंचे और समाधान के लिए वार्ता की तो बस का सुझाव दिया गया। इस पर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक साथ करीब 25 लाख रुपए एकत्रित कर एक बस खरीद कर ले आए। मंगलवार को विद्यालय की संस्था प्रधान नीता पोरवाल को बस की चाबी सुपुर्द कर दी। इस बस का खर्चा भी धरमधारी गांव के ग्रामीणों द्वारा ही उठाया जाएगा, जिसमें बस ड्राइवर एवं डीजल का खर्च भी शामिल है। इस दौरान संस्था प्रधान नीता पोरवाल, राम सिंह, मदन सिंह, अमर सिंह, मोहन सिंह, शंकर सिंह, भगवान सिंह, लक्ष्मण सिंह, सुगन सिंह, श्रवण सिंह, भागीरथ सिंह, पीटीआई सुरेंद्र सिंह, कमलेश सिंह सहित ग्रामीण मौजूद थे।
भामाशाह हमेशा रहते तैयार
धरमधारी गांव के ग्रामीण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए हर समय तैयार रहते हैं। धरमधारी के ग्रामीणों ने विद्यालय में एक हाॅल एवं 5 कमरे तैयार करवाए हैं। इसके साथ ही 7 कमरों के लिए ग्रामीणों ने बोली लगा रखी है, जो जल्द ही तैयार होंगे। इसके अलावा मुख्य द्वार का निर्माण करवाने की भी तैयारी है।
अब निर्बाध होगी पढ़ाई
वर्तमान में धरमधारी विद्यालय में 151 बच्चों का नामांकन है। इस बस की सुविधा का लाभ धरमधारी के साथ ही गाजनगढ, बल्दो की ढाणी एवं केरला स्टेशन के विद्यार्थियों को भी मिलेगा। विशेषकर बेटियों को राहत मिलेगी।