पन्ना

5 किमी. साइकिल से आई गर्भवती, सिस्टम के हिचकोलों से बस में डिलीवरी, गर्भनाल थामें अस्पताल पहुंची प्रसूता

महिला के साथ नहीं थी आशा कार्यकर्ता, समुचित स्वास्थ्य सुविधाविहीन जिले में गरीबों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की आए दिन खुल रही पोल
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Jun 16, 2018
Mismanagement in panna Delivery case
Mismanagement in panna Delivery case

पन्ना। जिले में बदहाल स्वास्थ्य विभाग की 'सेवा' की एक और चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। शुक्रवार को अजयगढ़ थाना क्षेत्र की एक गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए न एम्बुलेंस मिल पाई और न ही 108 वाहन मिला। मजबूरी में उसके भाई ने उसे गांव से करीब पांच किमी. दूर मुख्यमार्ग तक साइकिल से पहुंचाया।

वहां से गर्भवती को बस में बैठकर जिला अस्पताल रवाना किया गया। वह सिस्टम के हिचकोले सहन नहीं कर सकी और बस में ही प्रसव हो गया। नवजात को गोद में लिए वह पन्ना बस स्टैंड पहुंची, वहां से ऑटो से जिला अस्पताल गई। यहां बच्चे की गर्भनाल काटी जा सकी।

ये है मामला
बृजपुर क्षेत्र के ग्राम रहुनिया निवासी महिला नर्मदा कोंदर पत्नी हीरालाल कोंदर का मायका ग्राम श्रीसोभन तहसील अजयगढ़ में है। कुछ दिन पहले नर्मदा मायके आई थी। शुक्रवार की सुबह उसे प्रसव पीड़ा हुई। पहली डिलेवरी सिजेरियन होने पर आशा कार्यकर्ता ने उसे जिला अस्पताल जाने की सलाह दी। दर्द से कराहते देख भाई ने एम्बुलेंस और 108 को कॉल किया, लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई। मजबूरी में उसके भाई सहित परिवार के लोगों ने दो-तीन साइकिल की व्यवस्था कर करीब 5 किमी. दूर तक सिंहपुर मोड़ मुख्यमार्ग तक लेकर आए। वहां से चाची के साथ बस में बैठाकर जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया।

जर्जर सड़क में टूटा सब्र
बस से जिला अस्पताल के लिए जा रही गर्भवती जर्जर सड़क के हिचकोले नहीं सहन कर पाई। पन्ना पहुंचने से 15 किमी. पहले खजुरी कोड़ार के पास उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई और बस में ही प्रसव हो गया। नवजात बच्चे को गोद में लिये महिला ने चाची के साथ आगे का सफर भी बस से ही शुरू किया और पन्ना बस स्टैंड पहुंची। यहां से जिला अस्पताल लाने पर गेट पर ही साड़ी की ओट बनाकर प्रसूता को लिटाया और नर्स ने उसकी गर्भनाल काटी। यहां से जच्चा-बच्चा को वार्ड में भर्ती किया, जहां दोनों स्वस्थ्य है।

गर्भवती को वाहन क्यों नहीं मिल पाया, इसकी जांच कराई जाएगी। यदि प्रसव वाले स्थान से दोबारा कॉल किया होता तो वहां से भी एम्बुलेंस वाहन मिल सकता था।
संदीप त्रिपाठी, जिला प्रभारी, एम्बुलेंस एवं 108

Published on:
16 Jun 2018 12:52 pm