पटना

बाल्मीकि टाइगर्स रिजर्व: ग्रासलैंड का दायरा बढ़ा बाघों के कुनबे में इजाफा

Bihar news: बाल्मीकि टाइगर्स रिजर्व में बाघों के संरक्षण पर पूरा जोर दिया जा रहा है। वन विभाग ने बाघों को रिहायशी इलाकों में जाने से रोकने और उसकी संख्या में वृद्धि के लिए रिजर्व में ग्रासलैंड का दायरा बढ़ा दिया गया है। नतीजा यह कि वीटीआर में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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Jan 24, 2020
बाल्मीकि टाइगर्स रिजर्व: ग्रासलैंड का दायरा बढ़ा बाघों के कुनबे में इजाफा
बाल्मीकि टाइगर्स रिजर्व: ग्रासलैंड का दायरा बढ़ा बाघों के कुनबे में इजाफा

पटना. प्रियरंजन भारती

बेतिया के बाल्मीकि टाइगर्स रिजर्व में बाघों के संरक्षण पर पूरा जोर दिया जा रहा है। वन विभाग ने बाघों को रिहायशी इलाकों में जाने से रोकने और उसकी संख्या में वृद्धि के लिए रिजर्व में ग्रासलैंड का दायरा बढ़ा दिया गया है। नतीजा यह कि वीटीआर में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

बीते वर्ष 2010-11में आठ बाघ थे जो 2018-19 में बढ़कर 31हो चुके हैं।रिजर्व में फायर सिस्टम और वाटरलॉग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
वीटीआर टाइगर्स घने जंगलों में है और इन जंगलों में बाघ से लेकर हर तरह की प्रजातियों का निवास है। ग्रासलैंड बढ़ने से फायदा यह है कि बाघों को अपने इलाकों में ही शिकार मिल जा रहा है। इन्हें भोजन के लिए भटकना नहीं पड़ता।वाटरलॉग की सुविधाएं पहले से बहाल हैं।कुछ जगहों पर डैम बनाए गये हैं।फायर सिस्टम ठीक किया गया है ताकि जंगल में कभी आग नहीं लग पाए।
वीटीआर में बाघों की गिनती शुरु हो गई है। इसके लिए इंप्रेशन पैड और कैमरा टिप पद्धति को अपनाया गया है।इसमें लगभग चार सौ कैमरे लगाए गये हैं। ये कैमरे अभी लगे रहेंगे।फिर कैमरे में कैद बाघ की तस्वीरों का मिलान सॉफ्टवेयर से होगा।यह सॉफ्टवेयर पीठ की धारियां और सिर पर बने चिन्हों से बाघ की पहचान करेगा।इसमें पंद्रह से बीस दिनों का समय लगता है।इसके आधार पर बाघों की गिनती पूरी हो जाएगी।
मुख्य वन संरक्षक,वाइल्ड लाइफ पीके गुप्ता के अनुसार वीटीआर को विकसित और विस्तारित किया जा रहा है। इससे जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में नहीं आ सकेंगे। ग्रासलैंड एरिया के विस्तार से बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

Updated on:
24 Jan 2020 06:52 pm
Published on:
24 Jan 2020 06:52 pm