
ठेकेदार रिशु श्री की फ़ाइल फोटो
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ( Pappu Yadav) ने रिशु श्री मामले को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक संगठित सिंडिकेट और रसूखदार लोगों के कथित संरक्षण में रिशु श्री ने 15 फर्जी और बेनामी कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया। पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर एक बड़े सेक्स रैकेट का संचालन किया जाता था, जिसके माध्यम से प्रभावशाली और रसूखदार लोगों तक लड़कियां पहुंचाई जाती थीं। पप्पू यादव के इन आरोपों के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर रिशु श्री के पीछे कौन लोग थे और किसके संरक्षण में वह कथित तौर पर इतना बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहा था। हालांकि, सरकार इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है।
इसके बावजूद कई सवाल अब भी बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ईडी (ED) ने नगर विकास विभाग से इस मामले से जुड़ी जानकारी लिखित रूप से मांगी थी, तो विभाग की ओर से समय पर जवाब क्यों नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग कर रहा है।
रिशु श्री आखिर इतनी तेजी से अरबपति कैसे बने? इस सवाल की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई सफेदपोश और रसूखदार लोगों के नाम भी चर्चा में आने लगे हैं। रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को मिले व्हाट्सएप चैट्स ने मामले के दायरे को और व्यापक बना दिया है। जांच के दौरान धर्मेंद्र सिंह, जो बीएमएसआईसीएल के पूर्व एमडी रह चुके हैं, का नाम भी सामने आया है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। सूत्रों के अनुसार, स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) रिशु श्री को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसियों को उनकी विदेश यात्राओं, टेंडर आवंटन प्रक्रियाओं और संभावित मिलीभगत से जुड़े कुछ अतिरिक्त संकेत भी मिले हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है। मामले से जुड़ी फाइलों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल आगे बढ़ने पर कई और प्रभावशाली अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, इन सभी पहलुओं पर अंतिम स्थिति जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार, सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए रिशु श्री ने कुछ अधिकारियों को कथित तौर पर विभिन्न प्रकार के लाभ और सुविधाएं उपलब्ध कराईं। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बुडको के तत्कालीन एमडी योगेश कुमार सागर ने रिशु श्री की मदद से अपने परिवार के साथ विदेश यात्राएं की थीं, जिन पर कथित तौर पर करीब 22 लाख रुपये खर्च किए गए। आरोप है कि इसके बदले नगर विकास विभाग के कई महत्वपूर्ण टेंडर रिशु श्री से जुड़ी कंपनियों को मिले। वहीं, अभिलाषा शर्मा पर भी जांच एजेंसियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच में दावा किया गया है कि उन्होंने अपने आवास की छत पर गार्डन विकसित कराने, महंगे उपहार और आईफोन समेत कई सुविधाएं रिशु श्री से प्राप्त की थीं। इसके अलावा उनके रिश्तेदारों की देशभर की यात्राओं का खर्च भी कथित तौर पर रिशु श्री ने वहन किया था।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुविधाओं और खर्चों की कुल राशि नौ लाख रुपये से अधिक थी। एजेंसियों का आरोप है कि यह सब टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने और कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
Updated on:
01 Jun 2026 06:46 am
Published on:
01 Jun 2026 06:05 am
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