पटना

बिहार: सीएम जनता को देना चाहते हैं भय मुक्त जीवन का संदेश, अफसर कर रहे डराने वाली हरकतें

बिहार में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हैं। उनका दावा है कि राज्य में ऐसा माहौल बनाया जाएगा, जहां आम लोग बिना डर के जी सकें। लेकिन भागलपुर, मोतिहारी और पटना की हालिया घटनाएं इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
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Jul 20, 2026
bihar bureaucracy
पटना के कोतवाली थाना प्रभारी, भागलपुर के एसडीओ और मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी

बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगभग हर सभा में कहते हैं कि अपराधी या तो अपराध छोड़ दें या राज्य। शायद वह चाहते हैं कि जनता में संदेश जाए कि नए सीएम उन्हें भय मुक्त जीवन की गारंटी दे रहे हैं। जनता में यह संदेश जाना इसलिए भी जरूरी है कि जिस नीतीश कुमार के जाने के बाद सम्राट सीएम बने हैं, उन्होंने अपनी छवि 'सुशासन बाबू' के रूप में बना ली थी।

सम्राट के लिए सुशासन वाली उस छवि को अपने साथ जोड़ना राजनीतिक रूप से जरूरी है। इसमें उन्हें कामयाबी तभी मिलेगी जब नौकरशाही उनका साथ दे। वे न केवल जनता को अपराधियों के भय से मुक्त कराएं, बल्कि यह यकीन भी दिलाएं कि अफसर जनता को नाहक परेशान करने के लिए नहीं हैं। लेकिन हाल की कई घटनाओं से ऐसा लगता है कि अफसर ही जनता को डरा रहे हैं और भय मुक्त शासन देने की सम्राट चौधरी की योजना में पलीता लगा रहे हैं। हम यहां भागलपुर, मोतिहारी और पटना की तीन हालिया घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं।

भागलपुर में एसडीओ ने दिखाई कुर्सी की 'ताकत'

भागलपुर के सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) विकास कुमार ने बीते दिनों जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में दोनों पक्षों को बुलाया और एक पक्ष को काफी प्रताड़ित किया। इस मामले में पीड़ित पक्ष सावित्री राजहंस का आरोप है कि (एसडीओ) ने 10 जुलाई को उन्हें, उनके दोनों बेटों और बहुओं को अपने कार्यालय बुलाया। उनका कहना है कि अपना पक्ष रखने पर उसे सुनने के बजाय एसडीओ भड़क गए और अपमानजनक व अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे। उन्होंने उनके छोटे बेटे को जोगसर थाना पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उनके बीमार बेटे को करीब चार घंटे थाने में बिठाए रखा और अपराधियों से भी बदतर सलूक किया। रात करीब नौ बजे उन्हें छोड़ा गया। इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ देर रात 25 किलोमीटर दूर अपने घर पहुंचे।

'बदमाश महिला' कह कर SDO ने अपनी हरकत को ठहराया सही

इस मामले में जब हमने विकास कुमार का पक्ष भी जाना। मैसेज और कई बार फोन करने के बाद उनसे संपर्क हुआ। उन्होंने कहा कि 'वह बदमाश महिला' सरकारी आदेश नहीं मान रही है। साथ ही, कहा कि जरूरत पड़ने पर इससे भी ज्यादा सख्ती करेंगे।

एसडीओ ने बिना किसी आधार के बुजुर्ग महिला के बेटे को पूरे परिवार के सामने बेइज्जत करने और पुलिस थाने में रखे जाने का कोई कारण नहीं बताया। जब पूछा गया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट का कोई अंतिम आदेश आया ही नहीं है तो आदेश नहीं मानने का दोषी बता कर इस तरह की कार्रवाई कैसे की जा सकती है, तो जवाब दिए बिना एसडीओ ने फोन काट दिया। हालांकि, उन्होंने 17 जुलाई की सुनवाई में विरोधी पक्ष को कोर्ट का आदेश आने का इंतजार करने के लिए कहा।

बता दें कि सावित्री राजहंस का मामला भागलपुर के सब जज-9 की अदालत में बंटवारा वाद संख्या 454/25 के तहत विचाराधीन है। इस मामले में न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश जारी किया गया है।

मोतिहारी: चार साल से बकाया था वेतन, पति मर गया तब जागा सिस्टम

सरकारी संवेदनहीनता का एक और मामला बिहार के मोतिहारी से सामने आया है। यहां जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय में अपनी पत्नी का चार वर्षों से लंबित वेतन दिलाने के लिए अरविंद कुमार शर्मा लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे।

11 जुलाई को भी वह अपनी पत्नी के बकाया वेतन के भुगतान की मांग लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि वहां उन्हें अधिकारियों की फटकार का सामना करना पड़ा। इसी दौरान कार्यालय परिसर में ही वह अचानक चक्कर खाकर गिर पड़े, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।

अरविंद कुमार शर्मा की पत्नी रश्मि स्वराज गायघाट स्थित उजयन लोहियार स्कूल में शिक्षिका हैं। उनका वेतन पिछले चार वर्षों से लंबित था। अरविंद की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया और 14 जुलाई को बकाया वेतन का एकमुश्त भुगतान कर दिया।

रश्मि स्वराज ने भावुक होकर कहा, "अब इस पैसे का मैं क्या करूंगी, जब मेरा सुहाग ही उजड़ गया?"

इस घटना ने सरकारी कार्यप्रणाली, प्रशासनिक संवेदनशीलता और वर्षों तक लंबित मामलों के निस्तारण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, इस मामले पर मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा, "मैं कुछ ही दिन पहले यहां पदस्थापित हुआ हूं। मुझे इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि UAN बनने में देरी होने के कारण वेतन का भुगतान समय पर नहीं हो सका, जिससे पूरा मामला वर्षों तक लंबित रहा।

देह व्यापार के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी?

पटना में बंटी यादव के अपहरण के बाद हत्या का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। बंटी यादव का 6 जुलाई को पटना जंक्शन स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर के पास से कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था। किडनैपिंग के पांचवें दिन, यानी 11 जुलाई को पुलिस ने उसका शव पटना जंक्शन से करीब 60 किलोमीटर दूर अथमलगोला थाना क्षेत्र से बरामद किया।

परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बंटी यादव पटना रेलवे स्टेशन के आसपास कथित तौर पर संचालित देह व्यापार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहा था। उनका कहना है कि उसने इस संबंध में कई बार पुलिस से शिकायत भी की थी। आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने के कारण शिकायत की जानकारी संबंधित गिरोह तक पहुंच गई, जिसके बाद बंटी का कथित तौर पर अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई।

इस घटना के बाद पटना के एसएसपी ने एक एएसआई समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, पटना पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल एक आरोपी को मुठभेड़ (एनकाउंटर) के बाद गिरफ्तार करने का दावा किया है। हालांकि, मामले का मुख्य आरोपी अब भी फरार है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दूसरी ओर, परिजनों का आरोप है कि पुलिस पूरे मामले को दबाने और रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।

Updated on:
21 Jul 2026 12:28 pm
Published on:
20 Jul 2026 04:31 pm