
(पत्रिका ब्यूरो,पटना): रेलवे टेंडर घोटाले में रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी के खिलाफ मुकदमे की इजाजत अब तक नहीं दिए जाने को लेकर सत्तारूढ़ जदयू और भाजपा में तनातनी के संकेत मिले हैं। रेलवे टेंडर घोटाले से जुड़े रेलवे बोर्ड के एक अतिरिक्त अधिकारी बीके अग्रवाल के खिलाफ मुकदमे की इजाजत अब तक नहीं दिए जाने का मामला दो दिनों पूर्व ही जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने उठाया। वह आईआरसीटीसी के टेंडर घोटाले से जुड़े दर्जन भर लोगों में से एक हैं। इस मामले में 15अप्रैल को ही सीबीआई विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि हमारे नेता नीतीश कुमार भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करते।भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करने के चलते ही बिहार में महागठबंधन की सरकार गिरी और फिर भाजपा के समर्थन से सूबे में एनडीए की सरकार बनी। जानकारी के अनुसार चार्जशीट दायर होने के 90दिनों बाद भी रेलवे के अधिकारी के खिलाफ मुकदमे की इजाजत नहीं दिए जाने को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी प्रवक्ताओं को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में भाजपा नेता और सूबे के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा इस सवाल पर सीबीआई के अधिकारी ही कुछ कह सकते हैं क्योंकि सीबीआई ही इस मामले की जांच कर अदालत में चार्जशीट दायर की है। मालूम रहे कि सुशील मोदी ने ही रेलवे टेंडर घोटाले का गत वर्ष खुलासा किया था।
घोटाले की शुरुआत 2005में ही
आईआरसीटीसी घोटाले की शुरुआत 2005 में ही हुई जब लालू यादव रेलमंत्री थे। झारखंड के रांची और उड़ीसा के पुरी में रेलवे के दो होटलों को मेसर्स सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया था। इसमें रेलवे के नियमों में ढील देने के आरोप लगे। होटलों को लीज पर देने के बदले डिलाइट मार्केटिंग कंपनी को पटना के पॉश इलाके में तीन एकड़ जमीन दी गई। ये जमीन चाणक्य होटल के मालिक विनय कोचर ने एक करोड़ 47लाख में बेची जबकि इसकी कीमत इससे कहीं ज्यादा थी। डिलाइट मार्केटिंग कंपनी आरजेडी के तत्कालीन राज्यसभा सांसद प्रेम गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की है। 2014में कंपनी के शेयर लारा प्रोजेक्ट को ट्रांसफर किए गये। लारा प्रोजेक्ट के डायरेक्टर राबड़ी देवी और विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव रहे हैं।जब सारे शेयर लारा प्रोजेक्ट को ट्रांसफर हो गये तब ज़मीन की कीमत 32करोड़ हो गई। इस जमीन को उक्त कंपनी ने अंततः लालू परिवार को मात्र 65लाख में ट्रांसफर कर दिया।
लालू यादव के निवास पर हुई थी रेड
रेलवे घोटाले के खुलासे के बाद पिछले वर्ष 6जुलाई को इस मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की। इसमें लालू यादव ,राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल 12आरोपी हैं।लालू यादव और राबड़ी देवी के राजकीय निवास में सीबीआई की रेड के बाद जदयू और आरजेडी में तनातनी बढ़ी।फिर जदयू के महागठबंधन से अलग हो जाने के बाद गत वर्ष 26जुलाई को महागठबंधन सरकार गिर गई। अगले ही दिन 27जुलाई को भाजपा के समर्थन से फिर सूबे में एनडीए की सरकार बनी। शपथ ग्रहण के दौरान नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने शपथ ली थी। अब एक साल बीतते ही रलवे बोर्ड के अधिकारी को अब तक मुकदमे की इजाजत नहीं मिलने के कारण भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच फिर से विवाद सामने आने लगा है।देखना होगा कि इसे लेखर राजनीति फिर किस तरह रंग बदलती है।