
झारखंड राज्यसभा चुनाव के नामांकन का आज अंतिम दिन है। इससे पहले NDA समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की एंट्री ने चुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है। उनके चुनाव मैदान में आने से इंडिया ब्लॉक और एनडीए के भीतर सीटों और वोटों का गणित इस तरह उलझ गया है कि पूरा मामला फंसता हुआ नजर आ रहा है।
इसी बीच झामुमो और कांग्रेस के बीच प्रत्याशी को लेकर खटपट ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालांकि महागठबंधन दोनों सीटों पर अपनी जीत का दावा कर रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गठबंधन के सभी विधायकों से एकजुट रहने की अपील की है। इस बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या आरजेडी बिहार में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के कथित धोखे का बदला झारखंड में लेगी?
परिमल नाथवानी आज झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। हालांकि, उनके प्रस्तावकों को लेकर उन्होंने अभी तक कोई जानकारी साझा नहीं की है। इसी तरह इंडिया महागठबंधन के उम्मीदवार बैजनाथ राम और प्रणव झा भी आज ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भाजपा ने अभी तक अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। आज नामांकन का अंतिम दिन है, जबकि मतदान और मतगणना 18 जून को होगी। ये दोनों सीटें शिबू सोरेन के निधन और दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई हैं।
एनडीए (भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा) के पास कुल 24 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए आवश्यक 28 वोटों से चार कम हैं। ऐसे में एनडीए को जीत के लिए चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी, इसी कारण उम्मीदवार के नाम पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि एनडीए निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को समर्थन देती है, तो भी उसे जीत सुनिश्चित करने के लिए चार विधायकों के अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। बताया जा रहा है कि परिमल नाथवानी की नजर आरजेडी के चार विधायकों के समर्थन पर टिकी हुई है।
झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक हैं। कुल मिलाकर 56 विधायक होते हैं, जो दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। हालांकि, चर्चा है कि परिमल नाथवानी की नजर राजद के चार विधायकों पर भी है। सूत्रों के अनुसार, इस पर राजद की ओर से मौन सहमति की बात भी सामने आ रही है। हालांकि की पार्टी के सीनियर नेता इसे खारिज करते हैं। इधर, सूत्रों का कहना है कि राजद अपने इस कदम के जरिए बिहार में राज्य सभा चुनाव के दौरान हुई स्थिति का जवाब देने की रणनीति पर भी विचार कर रही है, जहां कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।