पटना

NEET UG 2026 पेपर लीक: परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर बिकने लगा था पर्चा, सॉल्वर गैंग का मेडिकल कॉलेजों से सामने आया कनेक्शन

NEET UG 2026 पेपर परीक्षा से दो दिन पहले ही टेलीग्राम पर ‘ऑफिशियल नीट एग्जाम 2026’ नामक चैनल बनाकर प्रश्नपत्र की बिक्री शुरू कर दी गई थी। चैनल में दावा किया गया था कि पेपर लीक हो चुका है और प्रश्नपत्र ग्रुप एडमिन के पास है।
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May 13, 2026
NEET UG 2026 paper leak telegram
सांकेतिक तस्वीर। फोटो -(AI Generated)

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार परीक्षा से दो दिन पहले ही प्रश्नपत्र की बिक्री शुरू हो गई थी। इसके लिए टेलीग्राम पर एक चैनल बनाया गया था, जिसका नाम ‘ऑफिशियल नीट एग्जाम 2026’ रखा गया था। इस चैनल के माध्यम से दावा किया जा रहा था कि पेपर लीक हो चुका है और प्रश्नपत्र ग्रुप एडमिन के पास उपलब्ध है। इसके बाद कई लोग इस ग्रुप से जुड़ने लगे। बताया जा रहा है कि चैनल में कुल 22 लोग शामिल थे। पुलिस अब इन सभी 22 लोगों की तलाश कर रही है। दरअसल, परीक्षा से पहले ही पेपर लीक होने की सूचना मिलने पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यह फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कथित डेटा लीक और संबंधित अनियमितताओं की व्यापक जांच के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया है, ताकि पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जा सके।

टेलीग्राम चैनल से हो रही थी बिक्री

सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड अवधेश कुमार की नालंदा से गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। नालंदा पुलिस की सूचना पर मुजफ्फरपुर पुलिस ने छापेमारी की, जिसमें सामने आया कि गिरोह के सदस्य पेपर लीक कर टेलीग्राम पर ‘ऑफिशियल नीट एग्जाम 2026’ नाम से चैनल बनाकर प्रश्नपत्र की बिक्री कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, सॉल्वर गैंग के सदस्यों ने एग्जाम से जुड़ी आईडी से चैनल पर वॉइस रिकॉर्डिंग भी डाली थी, जिसमें दावा किया गया था कि नीट का पेपर लीक हो चुका है और उनके पास उपलब्ध है। इस चैनल से कुल 121 लोग जुड़े थे।

मेडिकल कॉलेज छात्रों की तलाश तेज

NEET पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड अवधेश कुमार से पूछताछ के बाद पुलिस अब मेडिकल कॉलेज के कई छात्रों की तलाश में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस गिरोह के नेटवर्क में कई और बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे पूछताछ के बाद पूरे रैकेट का खुलासा हो सकता है। इसी क्रम में बिहार पुलिस की कई टीमें अलग-अलग स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं।

अब तक की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाने का काम करता था। इसके लिए पहले 1.5 से 2 लाख रुपये तक एडवांस लिया जाता था, जबकि पूरी डील 50 से 60 लाख रुपये तक में तय होती थी। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का संचालन उज्ज्वल राज, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह मिलकर करते थे। इस मामले में सीतामढ़ी के एक डॉक्टर के बेटे का नाम भी सामने आ रहा है।

Updated on:
13 May 2026 11:00 am
Published on:
13 May 2026 10:19 am
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