
बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत का दारोमदार बीजेपी के कोर वोटरों में सेंध लगाने पर टिका है। उनकी टीम भी मानती है कि अगर बीजेपी के परंपरागत वोटर टूटते हैं तो प्रशांत किशोर की जीत की राह आसान हो सकती है। इसी रणनीति के तहत जन सुराज के वरिष्ठ नेता लगातार बीजेपी के कोर वोटरों के साथ-साथ टिकट नहीं मिलने से नाराज पार्टी नेताओं के संपर्क में हैं। वे नाराज नेताओं को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि जब तक बीजेपी इस सीट पर हार का सामना नहीं करेगी, तब तक पार्टी नए विकल्पों पर विचार नहीं करेगी।
इसी संदेश को जन सुराज की टीम मतदाताओं के बीच भी पहुंचा रही है। जलजमाव, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं जैसे स्थानीय मुद्दों को आधार बनाकर पार्टी चुनाव में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही पीके की टीम आरजेडी के पारंपरिक वोटरों को भी अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जन सुराज के कार्यकर्ता गली-गली और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और बदलाव के नाम पर समर्थन मांग रहे हैं।
प्रशांत किशोर की टीम ने पटना के वार्ड नंबर 29 और 35 के करबिगहिया, चिरैयाटांड़, खासमहल और चांदमारी रोड इलाके में पदयात्रा कर आरजेडी समर्थक वोटरों से सीधा संपर्क साधा है। टीम ने मतदाताओं से एक मौका देने की अपील की है। सूत्रों के मुताबिक, इन इलाकों में जन सुराज की रणनीति तैयार करने में कुछ आरजेडी नेताओं की भी पर्दे के पीछे भूमिका रही है। इन मोहल्लों में मुख्य रूप से बीजेपी और आरजेडी समर्थकों की आबादी अधिक है। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के इस हिस्से में जलजमाव लंबे समय से एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
हालांकि, स्थानीय मुद्दों के बावजूद यहां अब तक चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी बनाम आरजेडी के बीच ही रहा है। आरजेडी के शासनकाल से जुड़े "जंगलराज" के नैरेटिव के कारण, कई असहमतियों के बावजूद यहां के मतदाता बीजेपी के पक्ष में लामबंद होते रहे हैं। अब प्रशांत किशोर ने अपनी उम्मीदवारी के जरिए मतदाताओं के सामने एक नया विकल्प पेश किया है। जन सुराज की टीम स्थानीय समस्याओं और बुनियादी मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रही है, जो मुद्दे अब तक चुनावी बहस में पीछे छूट जाते थे।