रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए एक बार फिर अपने भाई तेजस्वी यादव और संजय यादव पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर शेयर किए अपने पोस्ट में लिखा है कि अहंकार और बहकावे में आकर परिवार की पहचान और वजूद को खत्म करने की कोशिश हो रही है
रोहिणी आचार्य ने अपने भाई तेजस्वी यादव का बिना नाम लिए आज एक बार फिर से तीखा हमला बोला है। रोहिणी के कई बयान बिहार की राजनीति में हलचल मचा चुके हैं। इसके बाद शनिवार को उनके ताजा पोस्ट ने एक बार फिर से बिहार की राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया फेसबुक पर उन्होंने लिखा है कि "बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी "बड़ी विरासत" को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती। "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है, जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है, जिसकी वजह से वजूद होता है, उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर "अपने" ही आमादा हो जाते हैं। जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है... तब "विनाशक" ही आंख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है।"
रोहिणी आचार्य बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की करारी हार के बाद भाई तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने परिवार त्यागने और राजनीति छोड़ने तक की घोषणा की थी। रोहिणी ने पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सामने खुद को अपमानित करने और उनके ऊपर चप्पल तक फेंककर मारने तक की बात कही थी।
रोहिणी ने इसके बाद एक्स पर एक पोस्ट में लिखा था कि, “एक बेटी, एक बहन, एक शादीशुदा महिला और एक मां को जलील किया गया, गंदी गालियां दी गईं, और मारने के लिए चप्पल उठाया गया। मैंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया,सच का समर्पण नहीं किया, सिर्फ और सिर्फ इस वजह से मुझे बेइज्जती झेलनी पड़ी। एक बेटी मजबूरी में अपने रोते हुए मां-बाप और बहनों को छोड़ आई, मुझसे मेरा मायका छुड़वाया गया। मुझे अनाथ बना दिया गया। आप सब मेरे रास्ते कभी ना चलें, किसी घर में रोहिणी जैसी बेटी-बहन पैदा ना हो।”