Day Care Cancer Centre : देश में एक ओर कैंसर के नए मामलों में बहुत तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसे देखते हुए पिछले साल बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह घोषणा की थी कि देश के सभी जिला अस्पतालों में एक डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना की जाएगी। घोषणा के एक साल बाद क्या हैं हालात, जानिए।
Day Care Cancer Centre : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने (Nirmala Sitharaman) वर्ष 2025 में बजट पेश करने के दौरान यह कहा था कि देशभर के सभी जिला अस्पतालों में डेयर केयर कैंसर केंद्रों (Day Care Cancer Centres for all District Hospitals in India) की स्थापना आगामी तीन सालों में की जाएगी। हालांकि, इस घोषणा के एक साल बीत जाने के बाद भी देश की राजधानी दिल्ली में अभी तक एक भी ऐसा केंद्र चालू नहीं किया जा सका है। यह जानकारी पिछले सप्ताह राज्यसभा के एक सत्र के दौरान सामने आई। आइए जानते हैं कि डे केयर कैंसर या डे केयर सेंटर की जरूरत क्यों पड़ती है? इसको लेकर देश में क्या हालात हैं?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल बजट पेश करने के दौरान यह घोषणा की थी कि सरकार अगले तीन वर्षों में सभी जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर केंद्रों (Day Care Cancer Centre) की स्थापना को सुगम बनाएगी और इनमें से 200 केंद्र 2025-26 में स्थापित किए जाएंगे। केंद्र सरकार की इस दिशा में पहल पर काम बहुत धीमी गति से हो रहा है। राज्यसभा सत्र के दौरान दिए गए एक जवाब के अनुसार, अब तक 297 केंद्रों में से केवल 102 ही स्थापित किए जा सके हैं।
भारत में कैंसर के नए मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। देश में पिछले 5-6 वर्षों में करीब 1.7 लाख तक सालाना नए कैंसर मामलों में वृद्धि हुई है। ICMR-NCRP के अनुसार, वर्ष 2019 में कैंसर के लगभग 13.6 लाख नए मामले सामने आए थे जो 2024 में बढ़कर 15.3 लाख से अधिक हो गए।
| वर्ष (अनुमानित) | नए कैंसर मामलों की संख्या |
|---|---|
| 2019–20 | 13,58,415 |
| 2020–21 | 13,92,179 |
| 2021–22 | 14,26,447 |
| 2022–23 | 14,61,427 |
| 2023–24 | 14,96,972 |
| 2024 | 15,33,055 |
डे केयर कैंसर केंद्रों की स्थापना करने की दिशा में पहल तो शुरू किए जा चके हैं। जुलाई 2025 में दिल्ली सरकार के चार अस्पतालों के चार जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (जीडीएमओ) और चार नर्सिंग अधिकारियों ने दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान के डॉक्टरों द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
इस कार्यक्रम में कीमोथेरेपी का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल था और इसका उद्देश्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को कीमोथेरेपी दवाओं के प्रबंधन, रोगी की निगरानी और नैदानिक प्रबंधन में आवश्यक कौशल से लैस करना था।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इन केंद्रों की स्थापना के लिए राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत दिल्ली को 11.07 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।
पीएम-डीसीसीसी (Prime Minister's Day Care Cancer Centre) पहल के तहत प्रस्तावित केंद्रों का उद्देश्य कैंसर रोगियों को कीमोथेरेपी, परामर्श सेवाएं और दवाएं उपलब्ध कराना है। योजना के अनुसार, प्रत्येक केंद्र में चार से छह बिस्तर होंगे और इसमें एक ऑन्कोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी के साथ-साथ दो नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक परामर्शदाता और एक बहुउद्देशीय कार्यकर्ता कार्यरत होंगे।
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना अभी भी प्रारंभिक चरण में है। काम जारी है, लेकिन चिन्हित चार अस्पतालों में जगह का आवंटन अभी पूरा नहीं हुआ है। कुछ अस्पतालों में हम स्थान के अंतिम निर्धारण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक बार बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन उपलब्ध हो जाने पर परिचालन शुरू हो जाएगा।
दिल्ली में, स्वीकृत चार केंद्र दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, राव तुला राम मेमोरियल अस्पताल, जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और पं. मदन मोहन मालवीय अस्पताल में स्थापित किए जाने थे। वहीं, दिल्ली सरकार की बाबू जगजीवन राम अस्पताल में एक अलग ओरल कीमोथेरेपी आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) शुरू करने की भी योजना है।
सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि इन कैंसर डे केयर केंद्रों के लिए कर्मचारियों की भर्ती जिला अस्पतालों में मौजूद कर्मचारियों में से की जाए। हालांकि एक संसदीय समिति ने अलग से भर्ती की सिफारिश की है। समिति ने एक रिपोर्ट में कहा कि समिति यह चाहती है कि जिला अस्पतालों के संसाधनों का उपयोग करने की बजाय, हेल्थ प्रोफेशनल्स और नर्सों सहित अलग से मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, क्योंकि इन अस्पतालों में पहले से ही स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी है।"
भारत के प्रमुख महानगरों में दिल्ली में कैंसर की दर सबसे अधिक है। आईसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के हालिया अनुमानों के अनुसार, दिल्ली में 2024 में 28,387 नए मामले दर्ज किए गए थे। 2023 में 27,561 कैंसर के नए मरीज सामने आए थे। राजधानी में इस वर्ष तक मामलों की संख्या में 23% की वृद्धि होने की आशंका है।
शिशु रोग विशेषज्ञ एवं फैमिली फिजिशियन डॉ चंद्रशेखर झा ने पत्रिका से बताया कि निजी क्षेत्र के डे-केयर सेंटर काफी महंगे हैं। शहरी क्षेत्रों में ₹8,000 से ₹20,000 प्रति माह हैं, जो देश की 80% आबादी की पहुंच से बाहर हैं। अधिकांश लोगों की पहुंच में सेंटर हो, सरकार का हस्तक्षेप इसलिए जरूरी है।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि भारत का 90% कार्यबल असंगठित क्षेत्र में है। निर्माण स्थलों पर काम करने वाली महिलाओं के बच्चे अक्सर धूल-मिट्टी और खतरों के बीच रहते हैं। यहां सरकारी "मोबाइल क्रेच" जीवन रक्षक बन सकते हैं।
उनका कहना है कि डे-केयर को अब केवल एक 'महिला मुद्दे' के रूप में नहीं, बल्कि 'आर्थिक विकास' के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार को 'पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप' (PPP) मॉडल अपनाना चाहिए, जहां छोटे कार्यालय मिलकर एक साझा डे-केयर चला सकें और सरकार उन्हें कर (Tax) में छूट प्रदान करे।
डे केयर सेंटर (Day Care Center) ऐसी स्वास्थ्य सुविधा है जहां मरीज को 24 घंटे भर्ती किए बिना कुछ घंटों के इलाज या निगरानी के बाद घर भेज दिया जाता है। यूं तो डे केयर सेंटर की दो बड़ी बीमारियों के इलाज के दौरान काफी जरूरत पड़ती है, लेकिन कई अन्य बीमारियों और स्वास्थ्य की अन्य परिस्थितियों में भी इसकी जरूरत पड़ती है।