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पिता का सपना, ससुर का वादा! ‘अफसर बहू’ जिज्ञासा की घर वापसी बनी भावनाओं का उत्सव, गांव ने देखा गर्व का पल

Lady Sub Inspector Story: जगदलपुर में एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब सब इंस्पेक्टर जिज्ञासा यादव ट्रेनिंग पूरी कर पहली बार वर्दी में अपने ससुराल पहुंचीं।

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Apr 06, 2026
पिता का सपना, ससुर का वादा! 'अफसर बहू' जिज्ञासा की घर वापसी बनी भावनाओं का उत्सव, गांव ने देखा गर्व का पल(photo-patrika)

Lady Sub Inspector Story: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब सब इंस्पेक्टर जिज्ञासा यादव ट्रेनिंग पूरी कर पहली बार वर्दी में अपने ससुराल पहुंचीं। उनके स्वागत के लिए घर के बाहर रेड कार्पेट बिछाया गया, बैंड-बाजे बजाए गए और पूरे सम्मान के साथ उनका अभिनंदन किया गया। यह स्वागत केवल एक बहू का नहीं, बल्कि उस संघर्ष और संकल्प का था, जिसने हर बाधा को पार कर यह मुकाम हासिल किया।

Lady Sub Inspector Story: अधूरा वादा, सास ने निभाया- जीवंत हुई एक इच्छा

जिज्ञासा के दिवंगत ससुर स्व. सुनील बडक़स ने सपना देखा था कि उनकी बहू जब अफसर बनकर घर लौटे, तो उसका भव्य स्वागत किया जाए। वे चाहते थे कि ‘अफसर बहू’ के स्वागत में रेड कार्पेट बिछे और बैंड-बाजे बजें। लेकिन जिज्ञासा के लौटने से पहले ही नवंबर में उनका निधन हो गया। ऐसे में उनकी पत्नी कल्पना बडक़स ने इस अधूरे वादे को पूरा किया। उन्होंने अपने पति के सपने को साकार करते हुए बहू का उसी सम्मान और गर्व के साथ स्वागत किया, जैसा उन्होंने सोचा था।

यह सिर्फ नौकरी नहीं, दो पिताओं का आशीर्वाद

जिज्ञासा यादव के लिए यह सफलता केवल एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि दो पिताओं के सपनों की पूर्ति है। उनके पिता स्व. गणेश यादव का सपना था कि उनकी बेटी अफसर बने, लेकिन रिजल्ट आने से महज 27 दिन पहले ही उनका निधन हो गया।
पिता के जाने के बाद उनके होने वाले ससुर सुनील बडक़स ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया और एक पिता की तरह उनका हौसला बढ़ाया।

भावनाओं से भरा स्वागत, आंखों में गर्व के आंसू

जब जिज्ञासा यादव वर्दी में पहली बार अपने घर पहुंचीं, तो वह पल पूरे परिवार के लिए बेहद खास और भावुक बन गया। जैसे ही उन्होंने घर की दहलीज पर कदम रखा, माहौल गर्व, खुशी और अपनापन से भर गया। परिवार के सदस्यों की आंखों में आंसू थे, लेकिन ये आंसू खुशी और संतोष के थे-एक सपना पूरा होने का, एक वादा निभने का। स्वागत के इस अनमोल क्षण में हर किसी के चेहरे पर गर्व झलक रहा था।

जिज्ञासा खुद भी इस स्नेह और सम्मान से अभिभूत नजर आईं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनके पिता का सपना और ससुर का वादा दोनों एक साथ उनके साथ खड़े हैं। यह पल उनके लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन रिश्तों की गहराई और विश्वास का प्रतीक है, जिन्होंने हर मुश्किल में उन्हें संभाला और आगे बढ़ने की ताकत दी।

संघर्ष, रिश्ते और सम्मान- एक कहानी जो प्रेरणा बन गई

यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं, बल्कि रिश्तों की गहराई, वादों की अहमियत और सपनों की ताकत की मिसाल है। जिज्ञासा यादव की यह उपलब्धि बताती है कि जब परिवार का साथ और विश्वास हो, तो हर मुश्किल रास्ता भी आसान हो जाता है।

Published on:
06 Apr 2026 11:07 am
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