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Pandupol Hanuman Ji Mandir : यहां बूढ़े वानर ने तोड़ा था भीम का घमंड, जानिए पांडुपोल हनुमान मंदिर की कहानी

Pandupol Hanuman Ji Mandir : महाबली भीम ने अपनी गदा से प्रहार कर चट्टान को चकनाचूर कर दिया था, आज यह जगह पांडुपोल हनुमान मंदिर कहलाती है। इस धार्मिक जगह की मान्यता और महत्ता के बारे में हरमिंदर लूथरा की विशेष रिपोर्ट पढ़िए।
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Sep 14, 2026
Pandupol Hanuman Ji Mandir Rajasthan
पांडुपोल हनुमान जी की प्रतिमा। (Photo: Rajasthan Patrika+ChatGpt)

क्या आपने ऐसा कोई मंदिर देखा है, जहां हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में है? जवाब है- अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर में हनुमान जी लेटी हुई अवस्था में विराजमान हैं। खास बात यह है कि इस मंदिर और प्रतिमा का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने जीवन के कुछ साल पांडुपोल में बिताए थे।

एक अन्य कथा के अनुसार, यह पांडुपोल वही स्थान है, जहां हनुमान जी ने भीम को पराजित कर उसका अभिमान तोड़ा था। मंदिर के आसपास कुदरती सौंदर्य, बहते झरने और खूबसूरत पहाड़ियां हैं। यह स्थान अलवर शहर से करीब 55 किलोमीटर दूर है।

5000 साल पुराना है यहां का इतिहास

पांडुपोल हनुमान मंदिर का इतिहास 5000 साल पुराना माना जाता है। कहानी कुछ इस तरह है- महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव पुत्रों को सरिस्का क्षेत्र के भीषण जंगल में प्यास लगी, तो भीम ने पहाड़ में गदा से वार किया, जिससे पहाड़ पर बड़ा गड्ढा बन गया। इसी स्थान पर बाद में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई। आज यही स्थान पांडुपोल के नाम से विख्यात है।

पांडुपोल हनुमान मंदिर। (Photo: Rajasthan Patrika)

यहां भीम का टूटा था अहंकार

यह भी कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान जब पांचों पांडव अपनी मां कुंती के साथ जंगलों की खाक छान रहे थे, तब ये सभी अलवर के इस वन्य क्षेत्र में आए थे। रास्ते में एक स्थान ऐसा आया, जहां से आगे जाने का कोई रास्ता नहीं था। तब भीम ने विशालकाय चट्टान को अपनी गदा के प्रहार से चकनाचूर कर रास्ता बनाया। इस पर भीम के भाइयों और मां ने प्रशंसा की। इससे भीम के मन में घमंड आ गया। थोड़ा आगे चलकर पांडवों को रास्ते में एक विशालकाय बूढ़ा वानर लेटा हुआ मिला। भीम ने उस वानर को वहां से उठकर कहीं और विश्राम करने के लिए कहा, तब उस वानर ने कहा कि मैं बुढ़ापे के कारण हिल नहीं सकता, तुम लोग दूसरे रास्ते से आगे बढ़ जाओ।

भीम ने पस्त होने के बाद बूढ़े वानर से मांगी क्षमा याचना

भीम को यह बात अच्छी नहीं लगी और वे उस वानर को वहां से हटाकर दूर करने के लिए आगे बढ़े। शरीर तो दूर भीम उस वानर की पूंछ तक को नहीं हिला सके। काफी प्रयास के बाद भी जब वानर टस से मस नहीं हुआ, तो भीम ने लज्जित होकर उससे अपनी गर्व भरी बातों के लिए क्षमा याचना की। तब वह वानर अपने असली रूप में आया। वह वानर स्वयं हनुमान जी थे। हनुमान जी ने प्रकट होकर भीम को महाबली होने का वरदान देकर कभी अभिमान न करने की सलाह दी।

महाबली भीम द्वारा महाभारत काल मे पहाड़ में गदा मार कर बनाई पोल। (Photo: Rajasthan Patrika)

यहां हर साल लगता है लक्खी मेला

संत निर्भयदास महाराज ने इसी स्थान पर पर हनुमान जी के मंदिर का निर्माण करवाया, जिसे पांडुपोल हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। हर साल भादो के महीने में शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को यहां लक्खी मेला भरता है। इस बार यह मेला 14 से 16 सितंबर तक है। मुख्य मेला 15 सितंबर को भरेगा।

पांडुपोल हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा। (Photo: Rajasthan Patrika)

जिस स्थान पर भीम ने गदा से वार किया, वह चट्टान आज भी मौजूद

जिस स्थान पर भीम ने गदा से वार किया था, वह चट्टान आज भी यहां मौजूद है। इस चट्टान से अविरल जल की धारा बहती है। मान्यता है कि यहां जो भी मन्नत का धागा बांधता है, उसकी मन्नत जरूरी पूरी होती है। इस पहाड़ी को भीम पहाड़ी के नाम से जाना जाता है।

Updated on:
14 Sept 2026 10:43 am
Published on:
14 Sept 2026 10:43 am
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