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एशिया का सबसे पुराना ओपन थिएटर छत्तीसगढ़ में! नई रिसर्च में दावा, जानिए अनसुनी कहानी

Open Air Theatre: सरगुजा जिले की सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं पर नई शोध सामने आई है। इन्हें एशिया की सबसे पुरानी ओपन-एयर नाट्यशाला माना जा रहा है, जिसकी ऐतिहासिक अहमियत और बढ़ गई है।

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Mar 27, 2026
एशिया का सबसे पुराना ओपन थिएटर छत्तीसगढ़ में (photo source- Patrika)

Open Air Theatre: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की रामगढ़ पहाड़ी एक बार फिर इतिहास और पुरातत्व के नक्शे पर सुर्खियों में है। यहां स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं को लेकर नई शोध और अध्ययन सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिल रहा है कि यह स्थल सिर्फ प्राचीन गुफाएं नहीं, बल्कि विश्व की सबसे शुरुआती नाट्यशालाओं में से एक हो सकता है। विशेषज्ञ अब इसे मानव सभ्यता के सांस्कृतिक विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी मान रहे हैं।

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Open Air Theatre: नई खोज ने बढ़ाई ऐतिहासिक अहमियत

हाल के अध्ययन में पुरातत्वविदों ने गुफाओं की संरचना, ध्वनि व्यवस्था (acoustics) और बैठने की शैली का गहराई से विश्लेषण किया है। इसमें पाया गया कि सीताबेंगरा गुफा को प्राकृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से इस तरह तराशा गया है कि यहां मंचन (परफॉर्मेंस) आसानी से हो सके। अर्ध-वृत्ताकार बैठने की व्यवस्था, सामने खुला मंच और ध्वनि के प्राकृतिक प्रतिध्वनि (echo) की सुविधा यह दर्शाती है कि यहां नाट्य प्रदर्शन या सांस्कृतिक आयोजन होते रहे होंगे।

नाट्यशास्त्र से भी पुरानी परंपरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व या उससे भी पहले की हो सकती है। यह काल मौर्य युग का माना जाता है। यदि यह निष्कर्ष पूरी तरह प्रमाणित होता है, तो यह स्थल नाट्यशास्त्र से भी पुराना साबित हो सकता है। कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि भरत मुनि ने इसी तरह की प्राचीन रंगशालाओं को देखकर अपने ग्रंथ की रचना की होगी।

एशिया का सबसे प्राचीन ओपन एयर थिएटर

सीताबेंगरा गुफा को पहले से ही एशिया के सबसे पुराने ओपन एयर थिएटर के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन नई रिसर्च ने इस दावे को और मजबूती दी है। यहां की संरचना आज के आधुनिक थिएटर की तरह ही प्रतीत होती है-

दर्शकों के बैठने के लिए सीढ़ीनुमा स्थान
कलाकारों के प्रदर्शन के लिए मंच
प्राकृतिक रोशनी और ध्वनि का संतुलन

यह सब कुछ हजारों साल पहले की इंजीनियरिंग और कलात्मक समझ को दर्शाता है।

जोगीमारा गुफा का रहस्य

सीताबेंगरा के पास स्थित जोगीमारा गुफा भी इस शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां दीवारों पर प्राचीन चित्रकारी और ब्राह्मी लिपि में लिखे शिलालेख मिले हैं, जिन्हें भारत की सबसे पुरानी “लव स्टोरी” में से एक माना जाता है। नई खोज में यह संकेत भी मिला है कि यह स्थान कलाकारों या रंगकर्मियों के रहने और अभ्यास करने का केंद्र हो सकता था।

रामायण से जुड़ी आस्था भी मजबूत

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने वनवास के दौरान रामगढ़ पहाड़ी (रामगिरि) पर कुछ समय बिताया था। इसी कारण इस क्षेत्र की धार्मिक आस्था भी गहरी है। सीताबेंगरा को “सीता का कक्ष” कहा जाना भी इसी विश्वास से जुड़ा है।

Open Air Theatre: पर्यटन और शोध के नए अवसर

नई खोजों के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय शोध की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यदि इसे वैश्विक स्तर पर सही पहचान मिलती है, तो यह छत्तीसगढ़ को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।

रामगढ़ पहाड़ी की सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं अब केवल प्राचीन स्थल नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के सांस्कृतिक विकास की जीवित गवाही बनती जा रही हैं। नई खोजों ने यह साबित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं कि भारत में रंगमंच और कला की परंपरा हजारों साल पुरानी और अत्यंत समृद्ध रही है।

Updated on:
27 Mar 2026 02:37 pm
Published on:
27 Mar 2026 02:35 pm
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