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illegal immigration: बांग्लादेश से राजस्थान तक… कौन इन मजबूर महिलाओं के लिए बिछा रहा ‘रास्ता’?

राजस्थान के पश्चिमी जिलों में फर्जी पहचान वाली महिलाएं लगातार मिल रहीं हैं। अकेले सिरोही में एक माह में 11 बांग्लादेशी युवतियां मिलने का दावा किया गया है। पुलिस ने जुलाई-अगस्त में आबूरोड से छह और माउंट आबू से एक महिला को पकड़ा है। इस बारे में विस्तार से नागेश शर्मा की रिपोर्ट पढ़िए।
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Sep 01, 2026
Bangladeshi Women in India
बांग्लादेशी महिलाएं फर्जी तरीके से राजस्थान में रहती हुई पकड़ी जा रही हैं। (Photo: Rajasthan Patrika)

illegal immigration : पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती और पर्यटन क्षेत्रों में बिना वैध दस्तावेज के रह रही बांग्लादेशी महिलाओं के मामले लगातार सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। सिरोही, नागौर, बीकानेर, अजमेर, भीलवाड़ा और डीडवाना-कुचामन समेत कई जिलों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस जांच में कुछ मामलों में फर्जी पहचान पत्र के आधार पर भारत में रहने, स्थानीय स्तर पर मोबाइल सिम हासिल करने और होटलों में अनैतिक गतिविधियों से जुड़े होने की बातें सामने आई हैं।

सिरोही जिले में सबसे ज्यादा बांग्लादेशी महिलाएं पकड़ी गई

सबसे अधिक मामले सिरोही जिले के आबूरोड और माउंट आबू क्षेत्र में सामने आने के बाद अब यह क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों की निगाह में है। राजस्थान-गुजरात सीमा से सटा आबूरोड और पर्यटन स्थल माउंट आबू बाहरी लोगों की लगातार आवाजाही के कारण इन महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत आसान ठिकाना बनता जा रहा है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। बीते एक माह में सिरोही जिले में 11 बांग्लादेशी युवतियों के मिलने की बात सामने आई है। इनमें से कई के पास भारत में रहने के लिए वैध दस्तावेज नहीं मिले। लगातार सामने आ रहे मामलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

किस रास्ते पहुंच रही हैं भारत?

आखिर ये महिलाएं बांग्लादेश से भारत और फिर पश्चिमी राजस्थान तक किस रास्ते से पहुंच रही हैं? इन्हें यहां कौन ला रहा है? इनके लिए फर्जी दस्तावेज कौन तैयार कर रहा है? मोबाइल सिम और रहने के लिए ठिकाने की व्यवस्था कौन कर रहा है? क्या इसके पीछे मानव तस्करी या अवैध रूप से लोगों को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने वाला संगठित नेटवर्क सक्रिय है? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में जुटी हैं।

होटलों में अनैतिक गतिविधियों के लिए लाए जाने के आरोप

बीते माह नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में चार बांग्लादेशी युवतियों के मिलने के बाद जांच में यह बात सामने आई कि उन्हें अलग-अलग होटलों में अनैतिक गतिविधियों के लिए लाए जाने का आरोप है। पुलिस पड़ताल में कथित तौर पर कोलकाता से जुड़े एक व्यक्ति का नाम सामने आया, जिसके बांग्लादेश में सक्रिय एक दलाल के संपर्क में होने की बात कही गई। जांच के अनुसार बांग्लादेश से युवतियों को भारत लाने के बाद उनके लिए फर्जी आधार कार्ड जैसे पहचान दस्तावेज तैयार कराए गए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम उपलब्ध कराई गई।

आबूरोड-माउंट आबू पर क्यों बढ़ी नजर?

राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित आबूरोड सिरोही जिले का प्रमुख प्रवेश क्षेत्र है। रेलवे और सड़क मार्ग से इसकी गुजरात समेत देश के कई हिस्सों से सीधी कनेक्टिविटी है। माउंट आबू प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण यहां देशभर से पर्यटकों और कामगारों की आवाजाही बनी रहती है। यही कारण है कि पुलिस अब इस पूरे क्षेत्र में बाहर से आने वाले लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच को लेकर अधिक सतर्कता बरत रही है। जुलाई और अगस्त में आबूरोड व माउंट आबू में लगातार सामने आए मामलों ने इस चिंता को और बढ़ाया है। पुलिस ने आबूरोड से छह और माउंट आबू से एक बांग्लादेशी महिला को पकड़े जाने की जानकारी दी है। इनमें कुछ महिलाएं एकांत मकानों में रह रही थीं, जबकि एक महिला होटल में मिली। आबूरोड के चंद्रावती गांव में एक मकान से तीन बांग्लादेशी महिलाओं के पकड़े जाने का मामला भी सामने आया। पुलिस पूछताछ में इन महिलाओं ने करीब एक वर्ष पहले बिना वैध दस्तावेज के बांग्लादेश से भारत में प्रवेश करने और आबूरोड में कुछ दिन पहले पहुंचने की बात स्वीकार की। पुलिस ने उन्हें वन स्टॉप सखी सेंटर भेजा, जहां आवश्यक प्रक्रिया के तहत उनकी काउंसलिंग की गई।

चार मामलों ने खींचा ध्यान

12 जुलाई- उमरनी गांव: आबूरोड के उमरनी गांव में विद्यालय के पीछे एकांत में बने मकान से बांग्लादेशी मोनिया खातुन और ईसा इस्लाम को पकड़ा गया। दोनों के भारत में अवैध रूप से रहने की बात सामने आई।

3 अगस्त- तलहटी क्षेत्र: आबूरोड के तलहटी क्षेत्र में एक होटल के पीछे स्थित एकांत मकान से रीमा नाम की बांग्लादेशी महिला को पकड़ा गया। पुलिस ने उसके दस्तावेजों और भारत में प्रवेश से संबंधित जानकारी की जांच की।

8 अगस्त- माउंट आबू: माउंट आबू के होटल कासिबा से शीला अख्तर उर्फ उमा इस्लाम को पकड़ा गया। उसके भारत में रहने और पहचान से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई।

10 अगस्त- चंद्रावती गांव: आबूरोड के चंद्रावती गांव में एक मकान से सोनिया अख्तर, रजिया बेगम और फरिया खातुन को पकड़ा गया। पूछताछ में तीनों ने करीब एक वर्ष पहले बांग्लादेश से बिना वैध दस्तावेज भारत आने और कुछ दिन पहले आबूरोड पहुंचने की बात स्वीकार की।

फर्जी पहचान बना रही सबसे बड़ी चुनौती

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों की पहचान करना नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक पहचान और भारत पहुंचने के पूरे नेटवर्क का पता लगाना है। शुरुआती जांच में कुछ मामलों में फर्जी आधार कार्ड अथवा दूसरे पहचान दस्तावेज तैयार कराने की बात सामने आई है। फर्जी दस्तावेज के सहारे किसी व्यक्ति का लंबे समय तक किसी क्षेत्र में रहना सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर चुनौती पैदा करता है। पहचान छिपाकर किराए पर मकान लेना, मोबाइल सिम हासिल करना और स्थानीय स्तर पर काम करना ऐसे मामलों की जांच को और जटिल बना देता है। पुलिस अब मकान मालिकों, होटल संचालकों और स्थानीय स्तर पर दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे देश का नागरिक है और उसके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, तो वह स्थानीय स्तर पर पहचान पत्र, मोबाइल सिम और रहने का ठिकाना हासिल करने में कैसे सफल हुआ।

नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती

पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार कई महिलाएं सीधे मुख्य एजेंट के संपर्क में नहीं थीं। उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक अलग-अलग लोगों के माध्यम से पहुंचाया गया। यही वजह है कि पुलिस के लिए पूरे नेटवर्क की कड़ी जोड़ना आसान नहीं है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि बांग्लादेश से भारत तक पहुंचाने के बाद महिलाओं को अलग-अलग शहरों में भेजा जाता है। रास्ते में अलग-अलग लोग उनकी जिम्मेदारी संभालते हैं। अंतिम ठिकाने पर पहुंचने के बाद उन्हें रोजगार, आवास अथवा अन्य गतिविधियों में लगाया जाता है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।नागौर के मामले में कोलकाता से जुड़े व्यक्ति और बांग्लादेशी दलाल के संपर्क की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक बढ़ने की संभावना है। एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि राजस्थान में सामने आए अलग-अलग मामलों के तार आपस में जुड़े हैं या ये अलग-अलग घटनाएं हैं।

बीकानेर में आठ महीने पहले पहुंची थी महिला

बीकानेर में हाल ही पकड़ी गई बांग्लादेशी महिला के बारे में जांच में सामने आया कि उसने करीब आठ महीने पहले भारत में प्रवेश किया था। इस मामले ने भी सुरक्षा एजेंसियों को यह सोचने पर मजबूर किया कि बिना वैध दस्तावेज भारत में प्रवेश करने के बाद ऐसे लोग लंबे समय तक अलग-अलग शहरों में कैसे रह पाते हैं। इसी तरह अजमेर और भीलवाड़ा समेत अन्य जिलों में भी बांग्लादेशी युवतियों और महिलाओं के मिलने के मामले सामने आ चुके हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला केवल किसी एक जिले या शहर तक सीमित नहीं है।

किन जिलों में सामने आए मामले

अब तक बीकानेर, सिरोही, नागौर, अजमेर, भीलवाड़ा और डीडवाना-कुचामन में बांग्लादेशी युवतियों और महिलाओं के मिलने के मामले सामने आए हैं। पश्चिमी राजस्थान के इन जिलों में लगातार हो रही कार्रवाई के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां दस्तावेजों की जांच पर विशेष जोर दे रही हैं।

पुलिस ने शुरू किया अभियान

अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए पुलिस अभियान चला रही है। संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पूछताछ और काउंसलिंग के बाद संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की जाती है। सिरोही जिले में भी पुलिस ने अभियान तेज किया है। पुलिस के अनुसार जुलाई और अगस्त में आबूरोड तथा माउंट आबू से पकड़ी गई महिलाओं की पहचान और उनके भारत में प्रवेश से संबंधित जानकारी जुटाई गई है। कई मामलों में उन्हें वन स्टॉप सखी सेंटर भेजकर आवश्यक काउंसलिंग कराई गई।

Updated on:
01 Sept 2026 12:01 pm
Published on:
01 Sept 2026 11:25 am