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बस्तर की बेटी हेमवती ने बदली अपनी तकदीर, जानें आदिवासी अंचल से निकली ‘लेडी मैकेनिक’ की कहानी…

Bastar Woman Mechanic: बस्तर की पहली महिला मैकेनिक हेमवती नाग ने 3 साल पहले टू-व्हीलर रिपेयरिंग का काम सीखा था उस समय यह चर्चा भी आम हुई कि पहली आदिवासी महिला अब टू-व्हीलर भी बनाने लगी है।

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Apr 05, 2026
बस्तर की बेटी हेमवती ने बदली अपनी तकदीर, जानें आदिवासी अंचल से निकली ‘लेडी मैकेनिक’ की कहानी...(photo-patrika)

Bastar Woman Mechanic: छत्तीसगढ़ के बस्तर की पहली महिला मैकेनिक हेमवती नाग ने 3 साल पहले टू-व्हीलर रिपेयरिंग का काम सीखा था उस समय यह चर्चा भी आम हुई कि पहली आदिवासी महिला अब टू-व्हीलर भी बनाने लगी है। उसी समय हेमवती ने यह तय कर लिया था कि वो अब फोर व्हीलर रिपेयर करना सीखेगी और आज वो कार रिपेयर करना सीख भी गईं।

अब समय बदल रहा है समय के साथ-साथ महिलाओं के काम करने के तरीके भी बदल रहे हैं। अब ऐसा कोई फील्ड नहीं है जहां महिलाएं काम नहीं कर रही हों। हम शहर की बात नहीं कर रहे बल्कि हम आदिवासी अंचल बस्तर की महिलाओं की बात कर रहे हैं जो आज हर कदम पर पुरुषों को मात दे रही हैं।

Bastar Woman Mechanic: टू-व्हीलर से कार मैकेनिक तक का सफर

बस्तर अंचल की महिलाएं खेती किसानी में तो आगे हैं ही अब वे टू-व्हीलर और कार रिपेयरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। बस्तर से 5 किलो दूर रेटावंड गांव की रहने वाली 33 साल की हेमवती नाग संभवत: प्रदेश की पहली मोटर मैकेनिक हैं।

हेमवती कहती हैं कि कोई काम कठिन नहीं होता यदि आप लगन और मेहनत के साथ काम करते है तो उसे सीख ही जाते है। मैं अपने पति को टू-व्हीलर बनाते देखती थी कभी यह काम किया नहीं, लेकिन पति को काम करते देख मुझे भी लगा कि यह काम मुझे भी सीखना चाहिए। तीन साल पहले पति से यह काम सीखा और कर भी रही हूं।

कम उम्र में ही सीखा काम

शादी के पहले तीन भाई-बहनों की जिम्मेदारी हेमवती पर थी, क्योंकि परिवार में कोई नहीं था। कम उम्र में ही वो काम करने लगी और 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। परिवार का गुजारा मुश्किल हो रहा था। पति तुलेश्वर मोटर मैकेनिक हंै, उन्हीं से हेमवती ने मोटर बनाना सीखा और दोनों के काम करने के कारण उनकी माली हालत भी सुधरती गई। तीन बच्चों की मां हेमवती कहती हैं कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

कार की रिपेयरिंग कराने आते हैं ग्राहक

हेमवती कहती हैं कि यहां पर कार सुधरवाने बहुत से लोग आते हैं। हेमवती कहती हैं कि मुझे बचपन से ही हर चीज सीखने की इच्छा रहती थी। शादी के बाद पति को टू-व्हीलर बनाते देखा तो मुझे भी इसे सीखने की इच्छा हुई और पति तुलेश्वर ने मुझे टू-व्हीलर ठीक करना सिखाया। पहले पंचर बनाने में परेशानी आती थी, क्योंकि उसमें शारीरिक बल लगता है, तब पति ने बताया कि किस तरह चक्का खोलते है फिर आसानी से पंचर भी बनाने लगी।

पति का साथ मिला तो बढ़ी आगे

हेमवती कहती हैं कि मुझे शादी के पहले से ही नए काम सीखने की ललक थी, कुछ समझ नहीं आता था तो उसे बार-बार करती थी। इस तरह मैंने सारे काम सीखे। इस काम को सीखने में शादी के बाद पति का भी साथ मिला। ऐसी महिलाओं की मेहनत, लगन और आत्मविश्वास उन्हें औरों से अलग बनाता है। निश्चित ही वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरेंगी।

Updated on:
05 Apr 2026 12:13 pm
Published on:
05 Apr 2026 12:11 pm
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