
e-Challan Vs privacy : एक ओर डेटा सुरक्षा का लेकर तमाम कवायदें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर ई-चालान का डेटा थर्ड पार्टी के पास जा रहा है। यह डेटा के साथ लोगों की निजता से खिलवाड़ भी है। थर्ड पार्टी कंपनियों ने इस डेटा के आधार पर ई-चालान कटने वाले वाहन मालिकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है। मैसेज भेजकर उन्हें ई-चालान रिमाइंड कराया जा रहा है। कुछ कंपनियां ई-चालान जमा भी करवा रही है। इसके लिए मैसेज के साथ एक लिंक भी भेज रही हैं। इसके एवज में उनसे 50 से 100 रुपए एक्स्ट्रा लिया जा रहा है।
हालांकि इस तरह के मैसेज से लोग भ्रमित हो रहे हैं और उनकी साइबर ठगी के शिकार होने की आशंका बढ़ गई है। थर्ड पार्टी डेटा शेयरिंग से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगा है। जिन लोगों के ई-चालान कट रहे हैं, उनके मोबाइल नंबर, गाड़ी नंबर आदि जानकारियां निजी कंपनियों के पास जाने से लोग परेशान हो रहे हैं।
शहर में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगा है। इसके जरिए नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ ई-चालान काटे जाते हैं। इसके अलावा कई जगह ओवरस्पीड, पॉल्यूशन आदि के नियमों के उल्लंघन को लेकर भी ई-चालान होता है। उल्लंघन करने वाले वाहनों का पूरा डेटा एनआईसी में जाता है। यहां से ई-चालान जाता है। डेटा शेयररिंग मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट को भी होती है। बताया जाता है कि ई-चालान के प्रचार व रिमांइडर के लिए ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी कुछ कंपनियों को डेटा शेयर किया गया है। अब यही डेटा कुछ प्राइवेट कंपनियों के पास आ रहा है। ये कंपनियां रिमांइडर मैसेज के साथ ही ई-चालान भी जमा कराने लगी है। मैसेज के साथ पेमेंट गेटवे का लिंक भी भेजा जा रहा है। ई-चालान संबंधित जानकारियां कार24, कारइनफो आदि कंपनियों के पास हैं।
कुछ कंपनियां रिमांडर मैसेज के साथ ई-चालान भी जमा करने के लिए लिंक भेज रही है। इसमें मूल चालान की राशि के साथ अपना सर्विस चार्ज 50 से 100 रुपए एक्स्ट्रा जोड़ रही हैं, जबकि इसके लिए परिवहन विभाग की अधिकृत वेबसाइट है।
ई-चालान को लेकर थर्ड पार्टी की ओर से आने वाले मैसेज और चालान को लेकर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के पास कई शिकायतें हो चुकी हैं। हाल ही में परिवहन विभाग और रायपुर ट्रैफिक पुलिस की बैठक भी हुई थी। इसमें परिवहन सचिव के समक्ष भी यह मामला आया था। पुलिस कमिश्नर डॉक्टर संजीव शुक्ल ने भी परिवहन अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा की थी।
परिवहन विभाग के आयुक्त का कहना है कि इस तरह की शिकायतें मिली हैं। ई-चालान का भुगतान विभाग की अधिकृत वेबसाइट और पेमेंट गेटवे के जरिए ही जमा करें। किसी निजी कंपनियों की ओर से आने वाले मैसेज या लिंक से बिलकुल भुगतान न करें। इस तरह से ई-चालान का भुगतान लेने वालों की जानकारी ली जा रही है। जरूरत पड़ने पर निजी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर भी जाएगी।
रायपुर कमिश्नरेट, ट्रैफिक, डीसीपी अर्चना झा का कहना है कि मामले की जानकारी वरिष्ट अधिकारियों को दी गई है। इस संबंध में परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। ई-चालान जमा करने के लिए निजी कंपनियों के मैसेज या लिंक का इस्तेमाल न करें। परिवहन विभाग व एनआईसी की ओर से भेजे गए अधिकृत मैसेज, लिंक, वेबसाइट, पेमेंट गेटवे का ही उपयोग करें।
e-Challan vs privacy : एक ओर डेटा सुरक्षा का लेकर तमाम कवायदें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर ई-चालान का डेटा थर्ड पार्टी के पास जा रहा है। यह डेटा के साथ लोगों की निजता से खिलवाड़ भी है। थर्ड पार्टी कंपनियों ने इस डेटा के आधार पर ई-चालान कटने वाले वाहन मालिकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है। मैसेज भेजकर उन्हें ई-चालान रिमाइंड कराया जा रहा है। कुछ कंपनियां ई-चालान जमा भी करवा रही है। इसके लिए मैसेज के साथ एक लिंक भी भेज रही हैं। इसके एवज में उनसे 50 से 100 रुपए एक्स्ट्रा लिया जा रहा है।
हालांकि इस तरह के मैसेज से लोग भ्रमित हो रहे हैं और उनकी साइबर ठगी के शिकार होने की आशंका बढ़ गई है। थर्ड पार्टी डेटा शेयरिंग से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगा है। जिन लोगों के ई-चालान कट रहे हैं, उनके मोबाइल नंबर, गाड़ी नंबर आदि जानकारियां निजी कंपनियों के पास जाने से लोग परेशान हो रहे हैं।
शहर में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगा है। इसके जरिए नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ ई-चालान काटे जाते हैं। इसके अलावा कई जगह ओवरस्पीड, पॉल्यूशन आदि के नियमों के उल्लंघन को लेकर भी ई-चालान होता है। उल्लंघन करने वाले वाहनों का पूरा डेटा एनआईसी में जाता है। यहां से ई-चालान जाता है। डेटा शेयररिंग मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट को भी होती है। बताया जाता है कि ई-चालान के प्रचार व रिमांइडर के लिए ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी कुछ कंपनियों को डेटा शेयर किया गया है। अब यही डेटा कुछ प्राइवेट कंपनियों के पास आ रहा है। ये कंपनियां रिमांइडर मैसेज के साथ ही ई-चालान भी जमा कराने लगी है। मैसेज के साथ पेमेंट गेटवे का लिंक भी भेजा जा रहा है। ई-चालान संबंधित जानकारियां कार24, कारइनफो आदि कंपनियों के पास हैं।
कुछ कंपनियां रिमांडर मैसेज के साथ ई-चालान भी जमा करने के लिए लिंक भेज रही है। इसमें मूल चालान की राशि के साथ अपना सर्विस चार्ज 50 से 100 रुपए एक्स्ट्रा जोड़ रही हैं, जबकि इसके लिए परिवहन विभाग की अधिकृत वेबसाइट है।
ई-चालान को लेकर थर्ड पार्टी की ओर से आने वाले मैसेज और चालान को लेकर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के पास कई शिकायतें हो चुकी हैं। हाल ही में परिवहन विभाग और रायपुर ट्रैफिक पुलिस की बैठक भी हुई थी। इसमें परिवहन सचिव के समक्ष भी यह मामला आया था। पुलिस कमिश्नर डॉक्टर संजीव शुक्ल ने भी परिवहन अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा की थी।
परिवहन विभाग के आयुक्त का कहना है कि इस तरह की शिकायतें मिली हैं। ई-चालान का भुगतान विभाग की अधिकृत वेबसाइट और पेमेंट गेटवे के जरिए ही जमा करें। किसी निजी कंपनियों की ओर से आने वाले मैसेज या लिंक से बिलकुल भुगतान न करें। इस तरह से ई-चालान का भुगतान लेने वालों की जानकारी ली जा रही है। जरूरत पड़ने पर निजी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर भी जाएगी।
रायपुर कमिश्नरेट, ट्रैफिक, डीसीपी अर्चना झा का कहना है कि मामले की जानकारी वरिष्ट अधिकारियों को दी गई है। इस संबंध में परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। ई-चालान जमा करने के लिए निजी कंपनियों के मैसेज या लिंक का इस्तेमाल न करें। परिवहन विभाग व एनआईसी की ओर से भेजे गए अधिकृत मैसेज, लिंक, वेबसाइट, पेमेंट गेटवे का ही उपयोग करें।