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इंसुलिन इंजेक्शन लगाना जरूरी… क्या मेरी हालत गंभीर हो गई है…? क्या ये शुगर की लास्ट स्टेज है?

diabetes reversal Episode 8: डॉक्टर ने जैसे ही कहा कि अब इंसुलिन लेना होगा। उसी पल लगा क्या मेरी बीमारी इतनी बिगड़ गई, क्या मैं डायबिटीज की लास्ट स्टेज में हूं? ये कहना है अमीर अहमद का। करीब 17-20 साल से डायबिटीज से जूझ रहे अमीर अहमद और उनके परिवार ने इंसुलिन इंजेक्शन का नाम सुनते ही यही सोचा था। क्या आप भी यही सोचते हैं? अगर हां, तो Diabetes Reversal patrika series के Episode 8 में जाने इंसुलिन इंजेक्शन और शुगर का पूरा सच…

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Feb 22, 2026
Diabetes reversal patrika Series episode 8 what is insulin injection how to work(photo:patrika creative)

Diabetes reversal Episode 8: इंसुलिन एक ऐसा नाम जिसे सुनकर नये-नये डायबिटीक पेशेंट घबरा जाते हैं। उनके दिमाग में कई सवाल आते हैं। इनमें एक अहम सवाल होता है, क्या उनकी शुगर के कारण ज्यादा हालत खराब हो गई है, क्या वो लास्ट स्टेज में हैं। और एक सबसे कॉमन सवाल क्या अब जिंदगीभर इंसुलिन इंजेक्शन लगाने पड़ेंगे। एम्स भोपाल के डॉक्टर अल्पेश कहते हैं, ये गलतफहमी मत पालिए कि अब बीमारी बेकाबू हो गई है इसलिए आपको इंसुलिन इंजेक्शन लगाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कुछ लोग तो यहां तक भी कहते हैं कि इंसुलिन ऐसा इंजेक्शन है, जो खून से ही शुगर को अलग कर देता है। जबकि सच्चाई ये नहीं है…. तो फिर क्या है इंसुलिन इंजेक्शन का सच… जानने के लिए आज पढ़ें संजना कुमार की विशेष रिपोर्ट…

इंसुलिन क्या है, किन मरीजों के लिए जरूरी होता है, शरीर में कैसे काम करता है और इससे जुड़ी आम भ्रांतियों का सच वाकई क्या है? Diabetes Reversal Series के एपिसोड 8 में जानें शुगर का पूरा सच…

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इंसुलिन क्या है?

आपके इस सवाल को समझाने के लिए एम्स भोपाल के विशेषज्ञ कहते हैं कि टाइप 1 डायबिटीज में शरीर लगभग बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता। इन मरीजों के लिए इंसुलिन जीवनदायिनी है। बिना इसके शुगर को कंट्रोल करना नामुमकिन है। टाइप 1 डायबिटीज आमतौर पर बच्चों में देखी जाती है। ये जन्मजात भी हो सकती है।

diabetes Reversal episode 8 patrika series

इससे इतर डायबिटीज 2 में शुरुआत में दवाएं काम करती हैं। लेकिन जब शुगर ज्यादा बढ़ जाए, HbA1c लगातार ऊंचा बना रहे। ओरल दवाओं का असर कम हो रहा हो, कोई गंभीर संक्रमण सर्जरी हुई हो। तो डॉक्टर अस्थायी या स्थायी रूप से इंसुलिन शुरू कर सकते हैं। टाइप 2 डायबिटीज अब बच्चों की लाइफस्टाइल का परिणाम भी हो गई है। इसलिए अब बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं।

वहीं गर्भावधि डायबिटीज(Diabetes Reversal)

गेस्टेशनल डायबिटीज में कई बार गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन देना सुरक्षित माना जाता है। क्योंकि कुछ दवाएं गर्भ में पल रहे बच्चे पर असर डाल सकती हैं।

इंसुलिन कैसे काम करता है?

गलतफहमी को दूर करें कि इंसुलिन खून से शुगर को साफ कर देता है। सच यह है कि इंसुलिन ग्लूकोज को कोशिकाओं के अंदर पहुंचने में मदद करता है। यानी खून शुगर एक गाड़ी है और कोशिका उसका घर। इंसुलिन उस घर की चाबी है, अगर चाबी नहीं होगी, तो गाड़ी बाहर ही खड़ी रहेगी। यानी शुगर बढ़ती रहेगी।

क्या इंसुलिन की आदत पड़ जाती है?

यह भी एक आम डर है कि इंसुलिन कोई नशा तो नहीं, कहीं इसकी आदत न पड़ जाए, हम इसके बिना न रह पाए, तो? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई मरीजों को कुछ समय के लिए इंसुलिन दिया जाता है। वहीं गंभीर संक्रमण के दौरान या फिर बाद में दवाओं पर वापस लाया जा सकता है। हां… टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन आजीवन जरूरी रहता है।

Diabetes reversal episode 98 patrika health series(photo:patrika creative)

क्या इंसुलिन शुरू होने का अर्थ है कि बीमारी बहुत बिगड़ गई है

नहीं… ऐसा जरूरी नहीं। कई बार यह शरीर को आराम देने का तरीका होता है। जब लंबे समय तक शुगर बहुत ज्यादा रहती है, तो अग्नाशय थक जाता है। इंसुलिन देकर शुगर को जल्दी नियंत्रित किया जाता है, ताकि शरीर के अंग सुरक्षित रहें।

क्या इंसुलिन खतरनाक है?

सही डोज और सही तकनीक से लगाया जाए तो यह सुरक्षित है। गलत डोज लेने पर हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल बहुत कम रह जाना) हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह और नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। वैश्विक स्तर पर इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन भी गंभीर हाई शुगर की स्थिति में समय पर इंसुलिन शुरू करने की सलाह देता है। ताकि हाई शुगर से होने वाली अन्य जटिलताओं से बचाया जा सके।

इंसुलिन आखिरी विकल्प नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक उपचार है। यह शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया सपोर्ट करता है। अगर डॉक्टर इंसुलिन शुरू करने की सलाह दें, तो घबराने के बजाय यह समझएं कि आपके शरीर को सुरक्षित रखने के लिए है।

इंसुलिन कितने प्रकार के, यहां देखें आप कौन सा ले रहे हैं…

डॉ. अल्पेश कहते हैं कि इंसुलिन एक नहीं बल्कि कई 4 तरह के होते हैं।

1- रैपिड एक्टिंग इंसुलिन- इंसुलिन लिस्प्रो, इंसुलिन एजपार्ट

इसका असर 10-15 मिनट में शुरू हो जाता है।, सबसे ज्यादा असर 1-2 घंटे में दिखता है, वहीं 3-5 घंटे ये काम करता है।
खाना खाने से ठीक पहले इसे मरीज को दिया जाता है। यह खाने के बाद अचानक बढ़ने वाली शुगर को कंट्रोल रखता है।

2- शॉर्ट एक्टिंग (रेगुलर) इंसुलिन

इसका असर 30 मिनट में शुरू होता है। इसका पीक अवर 2-4 घंटे है, वहीं ये 5-8 घंटे तक असर दिखाता है। इसे खाना खाने से 30 मिनट यानी आधे घंटे पहले दिया जाता है।

3- इंटरमीडिएट एक्टिंग इंसुलिन- NPH इंसुलिन

इसका असर 1-2 घंटे में शुरू होता है। जो 12-18 घंटे रहता है। इसे दिन में एक या दो बार यूज किया जाता है।

4- लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन- इंसुलिन ग्लार्गिन, इंसुलिन डिटेमीर

इसका असर 1-2 घंटे रहता है। ये धीरे-धीरे काम करता है। इसीलिए इसका पीक समय नहीं होता। वहीं इसे दिन में एक बार ही इस्तेमाल किया जाता है। इसका असर पूरे दिन रहता है। यह बेसलाइन शुगर को कंट्रोल करता है।

नोट- रैपिड ऐसा इंसुलिन है, जो खाने की शुगर को संभालता है। वहीं लॉन्ग इंसुलिन पूरे दिन की बैकग्राउंड शुगर संभालता है।

इसुलिन इंजेक्शन लगाने का सही तरीका

इंसुलिन को हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही यूज करें। इसे अगर पेट पर लगा रहे हैं, तो नाभि से 2 इंच दूर लगाएं। यहां से इसका अवशोषण सबसे बेहतर होता है। वहीं इसका यूज जांघ पर या आपके हाथ की आर्म यानी बाजू के ऊपरी हिस्से पर लगाना चाहिए। एक ही जगह बार-बार इंजेक्शन लगाने के बजाय, जगह बदल कर रोटेशन की तरह इसका इस्तेमाल करें।

कैसे लगाएं इंसुलिन इंजेक्शन

इंसुलिन के इंजेक्शन को लगाने के लिए सबसे पहले हाथों को अच्छे से धो लें। पेन या सिरिंज में सही डोज भरें। त्वचा को हल्का सा पिंच करें। 90डिग्री एंगल पर सुई लगाएं। 5-10 सैकंड के लिए रुकें और फिर सुई को बाहर निकाल लें।

किन बातों का रखें ध्यान

इंसुलिन इंजेक्शन को लगाते समय ध्यान रखें कि ठंडा इंसुलिन यानी सीधे फ्रीज से निकालकर इसका यूज न करें। एक्सपायरी डेट जरूर से चेक करें। वहीं एक सुई का इस्तेमाल कभी भी दोबारा न करें।

इंसुलिन मिथ और सच

मिथ-इंसुलिन का अर्थ है बीमारी बहुत बढ़ गई है

सच- कई बार बीमारी की शुरुआत में भी इसे देना पड़ जाता है

मिथ-इंसुलिन की आदत पड़ जाती है

सच-यह लत नहीं है,यह शरीर की जरूरत है।

मिथ-इंसुलिन शुरू कर दी तो बंद नहीं हो सकती।

सच- कुछ मामलों में लाइफस्टाइल सुधार से कम या बंद भी हो सकती है।

मिथ-इंसुलिन इंजेक्शन से बहुत दर्द होता है

सच-पतली सुई से हल्की सी ही चुभन होती है।

डॉक्टर को कब दिखाएं

शुगर बार बार-250mg/dl से ऊपर आ रही हो
अचानक पसीना, चक्कर, बेहोशी यानी लो शुगर है
उल्टी, सांस फूलने जैसे लक्षण भी कहते हैं डॉक्टर के पास जाइए

low sugar condition
High Sugar condition tips
Fasting Sugar Normal range (photo:freepik)
PP Blood Sugar Test Normal Range(photo:freepik)
HbA1c Test Condition tips(photo:patrika): एक्सपर्ट कहते हैं कि जिन मरीजों को पहले से डायबिटीज है, उन्हें ये टेस्ट 3-6 महीने में करवाना चाहिए।

patrika series diabetes reversal episode 8 में आज आपने इंसुलिन के बारे में वो सब जाना जो आप जानना चाहते थे। अगले एपिसोड में हम जानेंगे शुगर की बीमारी कितनी खतरनाक, जरा सी लापरवाही बन सकती है हार्ट फैलियर, किडनी फैलियर का बड़ा कारण। कैसे आप इनसे बच सकते हैं... क्या डायबिटीज रिवर्सल है इसका इलाज... क्या है ये नया ट्रेंड और कैसे करता है फायदा... इस बारे में क्या कहते हैं एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद के डॉक्टर्स... जानने के लिए जुड़े रहिए patrika.com (Diabetes Reversal) के साथ।

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Published on:
22 Feb 2026 06:00 am
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