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Headphones Side Effects: हेडफोन व ईयर बड्स बना रहे किशोरों व युवाओं को बहरे, तेज आवाज से 40 वर्षीय व्यक्ति की हो चुकी है मौत

Headphones Side Effects: तेज आवाज में लंबे समय तक संगीत सुनने की आदत के कारण कम उम्र में ही कई युवाओं में सुनने की समस्या और बहरेपन का खतरा बढ़ता जा रहा है।

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Mar 10, 2026

Headphones Side Effects: जानलेवा डीजे की आवाज ही नहीं बल्कि लाउड स्पीकर, हेडफोन व ईयर बड्स किशोरों व युवाओं को बहरा बना रहा है। खासकर हेडफोन व ईयर बड्स लगाने के शौकीन युवाओं में सुनने की क्षमता कम होने की समस्या आम होती जा रही है। डीजे की तेज आवाज से हार्ट के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। यही नहीं ब्रेन हेमरेज होने की आशंका भी होती है। यानी तेज आवाज न केवल कानों को वरन हार्ट व ब्रेन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। डॉक्टरों के अनुसार इससे अलर्ट रहने की जरूरत है।

आपको बता दे साल में 2024 में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में 40 वर्षीय व्यक्ति की डीेजे की तेज आवाज के बाद ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई थी। इससे डॉक्टर भी भौंचक रह गए थे। एसीआई व डीकेएस के डॉक्टरों के अनुसार डीजे व लाउड स्पीकर की तेज आवाज से प्रभावित लोगों में हार्ट अटैक व ब्रेन हेमरेज के मामले आने लगे हैं। राजधानी में न केवल त्योहारी सीजन में, बल्कि विशेष मौकों पर डीजे व लाउड स्पीकर की जानलेवा आवाज आम है। अगर किसी रोड से डीजे गुजर रहा है तो घरों की खिड़की की कांच भी हिलने लगती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बच्चों समेत सभी उम्र के लोगों के लिए कितना घातक है।

70 डेसिबल तक ही सुरक्षित, फिर रिस्क

कान के लिए 70 डेसिबल या इससे कम की ध्वनि सेफ होती है। डॉक्टरों के अनुसार दो लोगों के बीच होने वाली बातचीत की ध्वनि ही 60 डेसिबल के आसपास होती है। 85 डेसिबल या इससे ज़्यादा की ध्वनि से कान पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वहीं 120 डेसिबल की आवाज़ से असुविधा हो सकती है। 140 डेसिबल से कान में दर्द हो सकता है। 120 डेसिबल की आवाज किसी भी व्यक्ति या बच्चों को बहरा बनाने में काफी है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के अनुसार 24 घंटे में शोर का स्तर 70 डेसिबल से कम होना चाहिए। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार डीजे के लेजर की लाइट बच्चों की आंख के लिए खतरनाक है। ये बच्चों को अंधा बना सकता है।

नींद भी हो रही प्रभावित एक अरब आबादी को रिस्क

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार डीेजे व अन्य जानलेवा आवाज से बच्चों को सबसे ज्यादा रिस्क है। आने वाले समय में एक अरब से ज्यादा किशोर व युवाओं में हियरिंग लॉस का खतरा है। तेज शोर से न केवल नींद प्रभावित हो रही है, वरन हार्ट के मरीजों की समस्या भी बढ़ रही है। यही नहीं साइको फिजियोलॉजिकल प्रभाव भी पड़ रहा है। माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। तेज शोर डिप्रेशन व डिमेंशिया का कारण भी बन सकता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की स्टडी के अनुसार तेज शोर में कार्डियो वैस्कुलर डिजीज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। असल में बहुत अधिक शोर से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर तेजी से घटता या बढ़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक आजकल किशोर और युवा पढ़ाई, गेमिंग, ऑनलाइन क्लास और मनोरंजन के लिए घंटों तक हेडफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग तेज आवाज में लगातार गाने सुनते हैं, जिससे कान के अंदर मौजूद संवेदनशील कोशिकाओं (हेयर सेल्स) पर दबाव पड़ता है और धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कमजोर होने लगती है।

ईएनटी विशेषज्ञ ने कहा

ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना लंबे समय तक 85 डेसिबल से अधिक आवाज सुनना कानों के लिए खतरनाक हो सकता है। लगातार ऐसा करने से कानों में घंटी बजने की आवाज (टिनिटस), कान भारी लगना और धीरे-धीरे सुनाई कम देना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। डॉक्टर युवाओं को सलाह देते हैं कि हेडफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल सीमित समय के लिए करें, आवाज को मध्यम रखें और हर 30–40 मिनट में ब्रेक लें। साथ ही अगर कान में दर्द, आवाज कम सुनाई देना या कोई अन्य परेशानी महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

इन क्षेत्रों में इतने डेसिबल शोर की दी गई है अनुमति

इलाके दिन रात

रिहायशी 55.45
साइलेंस जोन 50.40

इंडस्ट्रियल 75.70

काॅमर्शियल 65.55

सोर्स- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

टॉपिक एक्सपर्ट

डीजे की तेज आवाज से कई मरीज चक्कर खाकर गिर सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर व हार्ट के मरीजों को दिक्कत जैसी समस्या वाले केस आ रहे हैं। कार्डियो वेस्कुलर डिसीज व हार्ट अटैक के केस बढ़ सकते हैं। इसलिए बेहतर डीजे व अन्य तेज आवाज वाले एरिया से दूर रहें।
डॉ. कृष्णकांत साहू, एचओडी कार्डियक सर्जरी नेहरू मेडिकल कॉलेज

तेज आवाज से ब्लड प्रेशर अप-डाउन हो सकता है। इससे ब्रेन हेमरेज हो सकता है। तेज आवाज दिमाग के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों व बुुजुर्गों को होता है। डीजे पर प्रतिबंध लगाने की बात होती रही है, लेकिन इसमें गंभीर एक्शन की जरूरत है।

डॉ. लवलेश राठौर, एसोसिएट प्रोफेसर न्यूरो सर्जरी डीकेएस

Updated on:
10 Mar 2026 11:55 am
Published on:
10 Mar 2026 11:53 am
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