
Retirement Age Increase : सन् 1947 में भारत में जन्म के समय जीने की औसत आयु 32 वर्ष के करीब मानी जाती थी, लेकिन जीवनशैली, खान-पान एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से आए बदलाव के चलते देश में औसत आयु अब 70.3 वर्ष पहुंच गई है। यानी बीते करीब आठ दशकों में यह आंकड़ा दोगुने से भी ऊपर निकल चुका है। राजस्थान की बात करें तो यहां की भी स्थिति राष्ट्रीय औसत से बहुत अलग नहीं है, बल्कि कुछ बेहतर ही है।
वर्तमान में राज्य की औसत जीवन प्रत्याशा 70.4 साल है, जो राष्ट्रीय औसत से कुछ आगे है। इसे 2030 तक 72 वर्ष तक और 2047 तक 77 वर्ष तक ले जाने का लक्ष्य है। औसत जीवन प्रत्याशा अर्थात् औसतन जीवनकाल में बड़े बदलाव के बावजूद आजादी के बाद से अब तक सरकारी सेवा से रिटायरमेंट की उम्र 55 से बढ़कर 60 तक ही पहुंची है। वर्षों से रिटायरमेंट आयु को कम से कम 65 वर्ष तक ले जाने की मांग उठ रही है।
जुलाई 2026 में न्यायिक अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई कि शेट्टी आयोग की सिफारिश के आधार पर सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की जाए। मध्यप्रदेश सहित कुछ जगह न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष कर दी गई और संभवतया आने वाले वर्षों में यह 62 वर्ष हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व वहां के हाईकोर्ट से इस बारे में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट भी कहता रहा है कि हाईकोर्ट न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए और सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु भी 65 से बढ़ाई जाए। कई आयोगों में 67 अथवा 70 वर्ष तक के पूर्व न्यायाधीशों को पद पर बने रहने की अनुमति है।
सांसदों व विधायकों के मामले में देखा जाए तो स्थिति उलटी है, देश में 70 पार सांसदों व विधायकों की संख्या काफी अधिक है। इसके चलते राजनीति में तो यह मांग लगातार उठ रही है कि युवाओं को आगे लाया जाए, ताकि नीतियों में बदलाव हो सके और युवा आबादी अधिक होने के कारण उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां बन सकें।
राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव अरुण कुमार ने पत्रिका से बातचीत में कहा, 'आजकल 60 वर्ष की आयु कुछ नहीं होती, इसे दो वर्ष बढ़ाया जा सकता है। उधर, दूसरा पहलू यह भी है कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ा दी गई तो नई नौकरियां कहां से आएंगी, युवाओं को नौकरियां कहां से मिलेंगी। बदलाव उसी परिस्थिति में संभव है, जब आर्थिक स्थिति में सुधार आए और नए जॉब पैदा कर पाएं। स्थिति बड़ी विकट है, क्योंकि हमारे यहां तकनीकी शिक्षा भी उतनी अधिक नहीं बढ़ी है।'
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संंयुक्त महासंघ (एकीकृत) प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा, 'राजस्थान में औसत आयु 70 वर्ष होने के बावजूद सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष ही है। मेडिकल कॉलेज प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से 65 वर्ष तक है तथा अनुभवी कार्मिकों से भी सेवानिवृत्ति के बाद सेवाएं ली जाती हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति आयु कम से कम 62 वर्ष की जाए। जो कर्मचारी पहले सेवानिवृत्त होना चाहें, उन्हें अतिरिक्त लाभ अथवा पात्र आश्रित को नौकरी का विकल्प देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की सुविधा दी जाए।'
वहीं जयपुर में विकास अध्ययन संस्थान से जुडे स्कॉलर डॉ. हरचंद राम का कहना है कि भले शारीरिक कार्य वाले जॉब में सेवाकाल नहीं बढ़ाया जाए, लेकिन अन्य सेवाओं में सेवाकाल बढ़ाने से निर्णय क्षमता में सुधार आएगा। जॉब प्राेफाइल को उम्र से जोड़ा जाए। 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को ऐसे कार्यों में लगाया जाए, जो कैयर गिविंग से जुड़े हों। सेवानिवृत्ति के बाद उत्पादक कार्यों में व्यस्तता नहीं रहने से स्वास्थ्य में गिरावट शुरू हो जाती है। अधिक आयु वालों को दया दिखाकर काम पर नहीं रखें, बल्कि गुणवत्ता के आधार पर काम दें। असंगठित क्षेत्र में यह व्यवस्था पहले से है, लेकिन वहां भी जॉब प्राेफाइल उम्र के अनुसार तय की जानी चाहिए।
राजस्थान विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस एस सोमरा ने कहा, 'यह बात सही है कि हमारे यहां सेवानिवृत्ति आयु नहीं बढ़ी, लेकिन सवाल यह भी है कि प्रति व्यक्ति आय भी तुलनात्मक रूप से उतनी नहीं बढ़ी है। मानव विकास सूचकांक में भी हम पीछे हैं। इन्हीं कारणों से तो भारत को 2047 तक विकसित बनाना हमारे लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, यह बात विकसित राजस्थान @2047 के लिए भी लागू होती है।'