
भीलवाड़ा के छोटे से कस्बे से निकलकर बेटियां विश्व खेल मंच पर अपना इतिहास लिख रही हैं। (Photo: Rajasthan Patrika)
Sports : भीलवाड़ा की बेटियों की खेल के मैदान में असाधारण सफलता के पीछे उनके पिताओं का वह कड़ा श्रम है, जो फैक्ट्रियों की भट्ठियों में तपे, ऑटोमोबाइल की दुकानों पर ग्रीस से हाथ काले किए, निर्माण स्थलों (कमाठणों) पर पसीना बहाया और यहाँ तक कि सड़कों पर फूल-मालाएं बेचकर अपनी लाडलियों के सपनों को पंख दिए। वर्ष 2017 में आई 'दंगल' फिल्म से मिली प्रेरणा और शिव व्यायामशाला के मुख्य कोच, एनआईएस कुश्ती कोच कल्याण विश्नोई तथा सह-कोच रामनिवास के समर्पण ने इस पूरी पृष्ठभूमि को हकीकत में बदल दिया। आज स्थिति यह है कि कभी इक्का-दुक्का बालिकाओं से शुरू हुए इस अखाड़े में रोजाना 50 से 60 लड़कियां सुबह-शाम तीन-तीन घंटे पसीना बहा रही हैं।
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