
Refineries in India : देश की ऊर्जा जरूरतें बढ़ रही हैं तो कच्चे तेल को ईंधन में बदलने वाली रिफाइनरियां भी अपना आकार बढ़ा रही हैं। विशाखापत्तनम में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की विशाख रिफाइनरी ने कभी महज 0.675 मिलियन मीट्रिक टन सालाना क्षमता से सफर शुरू किया था, अब यह 2029 तक 21.3 मिलियन मीट्रिक टन सालाना कच्चा तेल शोधन करने की तैयारी में है।
करीब सात दशक में इसकी क्षमता शुरुआती स्तर से 31.5 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसी के साथ राजस्थान के पचपदरा में कुछ माह पहले शुरू हुई रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जाएगी। विशाखापत्तनम की विशाख रिफाइनरी में क्षमता विस्तार का खाका तैयार कर लिया गया है। यह रिफाइनरी वर्ष 2025 तक 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की शोधन क्षमता तक पहुंच चुकी है।
रिफाइनरी प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने पत्रिका से क्षमता विस्तार की यह जानकारी साझा की है। तय लक्ष्य के मुताबिक वर्ष 2026 में रिफाइनरी की क्षमता 16.20 मिलियन मीट्रिक टन, वर्ष 2027 में 17.80 मिलियन मीट्रिक टन और वर्ष 2029 में 21.30 मिलियन मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है। रिफाइनरी में कच्चे तेल को विभिन्न उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है। इनमें मोटर स्पिरिट, हाई स्पीड डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, एलपीजी, सुपीरियर केरोसिन ऑयल, लाइट डीजल ऑयल और बिटुमेन सहित कई महत्वपूर्ण उत्पाद शामिल हैं।
देश की ऊर्जा सुरक्षा केवल रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। किसी भी आपात स्थिति में कच्चे तेल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भारत सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता भी बढ़ा रही है। वर्तमान में चरण-1 के तहत देश में 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के तीन भूमिगत कच्चे तेल भंडार पूरी तरह चालू हैं। ये भंडार विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर (कर्नाटक) में बनाए गए हैं। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड के माध्यम से बनाए गए इन भंडारों की खासियत यह है कि कच्चे तेल को जमीन के ऊपर टैंकों में रखने के बजाय पहाड़ों के भीतर बनाई गई गुफाओं यानी कंदराओं में सुरक्षित रखा जाता है। विशाखापत्तनम में 1.33 मिलियन मीट्रिक टन, मंगलुरु में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन और पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का भंडार है।
विशाख रिफाइनरी मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत रिफाइनरी का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कच्चे तेल प्रसंस्करण क्षमता 8.3 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष हो गई। इस परियोजना ने विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल के प्रसंस्करण तथा उच्च मूल्य वाले पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन की रिफाइनरी की क्षमता को भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में विशाख रिफाइनरी ने 16.04 मिलियन मीट्रिक टन का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कच्चा तेल प्रसंस्करण दर्ज किया। यह रिफाइनरी की बढ़ी हुई प्रसंस्करण क्षमता और परिचालन दक्षता को दर्शाता है।
विशाख रिफाइनरी एचपीसीएल के अनुसंधान एवं विकास तंत्र की ओर से विकसित स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायिक स्तर पर उपयोग के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। एचपी ग्रीन आरएंडडी सेंटर की ओर से विकसित हाइड्रोजन प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन तकनीक का विशाख रिफाइनरी में वाणिज्यिक स्तर पर सफल प्रदर्शन किया गया है। रिफाइनरी अपने परिचालनों में डिजिटल तकनीकों को भी तेजी से एकीकृत कर रही है। RUF में रियल-टाइम मॉनिटरिंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और एआइ आधारित ऑप्टिमाइजेशन से युक्त एक समर्पित डिजिटल सुइट स्थापित किया गया है, जो परिचालनों को स्थिर, सुरक्षित और अधिक दक्ष बनाने में सहयोग करता है।
पारंपरिक रिफाइनिंग परिचालनों के साथ-साथ विशाख रिफाइनरी एचपीसीएल की ऊर्जा संक्रमण पहलों का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरी है। एचपीसीएल ने विशाख रिफाइनरी में 370 टीपीए क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट कमीशन किया है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, रिफाइनरी में 1.5 MWp क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी कमीशन की गई है, जिससे रिफाइनरी के नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो को और मजबूती मिली है। रिफाइनरी में पर्यावरणीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए वेट एयर ऑक्सीडेशन (WAO) यूनिट जैसी पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को भी अपनाया गया है। यह यूनिट स्पेंट कॉस्टिक स्ट्रीम के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।