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Success Race में भारतीय सबसे आगे, अमेरिकी, चीनी और जापानी चाहते हैं सुकून भरी जिंदगी

Indians Success: दुनिया में सबसे ज्यादा सफलता पाने की चाहत भारतीयों में है। अमेरिका, चीन और जापान जैसे देश इस रेस में भारत से बहुत पीछे छूट गए हैं। इस बारे में पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

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May 02, 2026
सक्सेस रेस में भारत नंबर 1 (AI)

Success Race in India: आज की भागती-दौड़ती दुनिया में हर इंसान किसी न किसी रेस का हिस्सा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किस देश के लोग सफलता के लिए सबसे ज्यादा जुनूनी हैं? एक रिपोर्ट के मुताबिक, कामयाबी पाने की सबसे ज्यादा चाहत किसी और देश में नहीं,बल्कि भारत में है। सर्वे (Success Race Survey) में शामिल हर दूसरा भारतीय सफलता को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते हैं। यह आंकड़ा न केवल अमेरिका और चीन जैसे दिग्गजों से कहीं ज्यादा है, बल्कि यह साबित करता है कि आने वाला दौर भारत के युवा जोश का होने वाला है। चलिए जानते हैं इस रिपोर्ट में...

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सक्सेस की चाहत में भारतीय युवा सबसे आगे

Indians Success: 'स्टेटिस्टा कंज्यूमर इनसाइट्स' ने ग्लोबल सर्वे किया। यह सर्वे जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 के बीच किया गया, जिसमें दुनिया भर के 18 से 64 साल की उम्र के लोगों से उनकी जिंदगी के सबसे बड़े लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया। हर देश से लगभग 12,000 से लेकर 60,000 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। इस लिस्ट में भारत 53 % के साथ नंबर वन पर है। देश के आधे से ज्यादा लोग यह मानते हैं कि जिंदगी में कामयाब होना ही उनका सबसे बड़ा मकसद है। यह आंकड़ा इसलिए भी बहुत बड़ा है क्योंकि दुनिया का कोई भी दूसरा देश 50 % का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया। भारत के बाद दूसरे नंबर पर ब्राजील है जहां 42 % लोग सफलता को जरूरी मानते हैं। यह साफ दिखाता है कि भारत युवाओं में आगे बढ़ने की, कुछ कर गुजरने की चाहत है।

अमेरिका और चीन रह गए पीछे

सुपर पावर की बात करते हैं तो अमेरिका और चीन का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन बात पर्सनल सक्सेस और आगे बढ़ने की चाहत की आती है, तो ये देश भारत से काफी पीछे नजर आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में केवल 40% लोग ही सफलता को अपनी टॉप 3 प्राथमिकता मानते हैं। अमेरिका एक विकसित (developed) देश है, वहां लोगों के पास पहले से ही बेसिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसलिए वहां के लोग अब सफलता के पीछे भागने से ज्यादा अपनी वर्क-लाइफ बैलेंस, मेंटल हेल्थ और अपनी पर्सनल हॉबीज (शौक) पर फोकस करने लगे हैं। उन्हें अब एक ठहराव वाली जिंदगी चाहिए।

चीन, जो अपनी कड़ी मेहनत और फैक्ट्री कल्चर के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता था, वहां सिर्फ 24 % लोग ही अब सफलता को जरूरी मानते हैं। चीन में आजकल युवाओं के बीच 'टैंग पिंग (Tang Ping) यानि Lying Flat' मूवमेंट चल रहा है। वहां के युवा ओवरवर्क और कॉर्पोरेट कल्चर से इतने थक चुके हैं। उन्होंने आगे बढ़ने की अंधी दौड़ (rat race) से खुद को बाहर निकाल लिया है। उनका मानना है कि दिन-रात मेहनत करके भी उन्हें वो लाइफ नहीं मिल रही जो वो चाहते हैं, इसलिए अब उन्होंने कम सैलरी में ही खुश रहना शुरू कर दिया है और उन्हें कोई बहुत बड़ी सक्सेस नहीं चाहिए।

जापान की आबादी भी तेजी से बूढ़ी हो रही

जापान जो अपनी बेहतरीन टेक्नोलॉजी, अनुशासन (discipline) और हार्डवर्किंग कल्चर के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, वहां सिर्फ 18% लोग ही सफलता को इम्पोर्टेन्ट मानते हैं। इस लिस्ट में जापान सबसे आखिरी नंबर पर है। जापान में सालों से लोगों ने दिन में 14-14 घंटे काम किया है। वहां ज्यादा काम करने की वजह से होने वाली मौत को 'करोशी' (Karoshi ) कहा जाता है। आज की नई जापानी पीढ़ी इस जहरीले वर्क कल्चर से बाहर आना चाहती है।

जापान की आबादी भी तेजी से बूढ़ी हो रही है, और जो नए युवा हैं वो एकदम शांति भरी लाइफ चाहते हैं। उन्हें बड़ा बॉस बनने या करोड़पति बनने का कोई शौक नहीं है। उन्हें सिर्फ एक सिंपल लाइफ चाहिए, जहां उनके पास अपने लिए और अपने परिवार के लिए वक्त हो। यही हाल यूरोप के देशों का भी है। जर्मनी में 22% और स्पेन में सिर्फ 21% लोग ही सफलता को जरूरी मानते हैं। यूरोप के लोग हमेशा से अपनी छुट्टियों (vacations), हेल्थ और फैमिली टाइम को सफलता से ऊपर रखते आए हैं। उनके लिए जीवन जीने का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं है।

सक्सेस प्रायोरिटी आंकड़े

देशप्रतिशत (%)
भारत53%
ब्राजील42%
फ्रांस41%
दक्षिण कोरिया41%
अमेरिका40%
कनाडा36%
चीन24%
जर्मनी22%
स्पेन21%
जापान18%

भारतीयों में सक्सेस का इतना जुनून आखिर क्यों है?

भारत एक विकासशील देश है। यहां का एक बहुत बड़ा हिस्सा मिडिल क्लास या लोअर मिडिल क्लास से आता है। एक आम भारतीय के लिए सफलता का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं होता, बल्कि अपनी और अपने परिवार की जिंदगी का स्तर (Living standards) बढ़ाना होता है। एक छोटे शहर के लड़के या लड़की पर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक करने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। उसके लिए सक्सेस का मतलब है खुद का एक घर खरीदना, एक अच्छी गाड़ी लेना और अपने मां-बाप को आराम की जिंदगी देना।

आज हर गांव और कस्बे में इंटरनेट पहुंच चुका है। लोग इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर दुनिया भर की लग्जरी लाइफ, स्टार्टअप फाउंडर्स की सक्सेस स्टोरीज और बड़ी-बड़ी गाड़ियां देखते हैं। इस डिजिटल एक्सपोजर ने भारत के युवाओं के सपनों को और बड़ा कर दिया है। अब कोई भी सिर्फ गुजर-बसर नहीं करना चाहता, सबको एक 'किंग साइज' लाइफ जीनी है। भारत में आजकल नए स्टार्टअप्स की बाढ़ आई हुई है। हर युवा अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहता है।

भारत सबसे तेजी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था

स्टेटिस्टा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के युवाओं में अपने लक्ष्य को हासिल करने की मजबूत इच्छा होती है। उनके अंदर आगे बढ़ने की आग है। फ्रांस 41%, साउथ कोरिया 41% और कनाडा 36% जैसे देशों को भी भारतीयों ने अपने कॉन्फिडेंस और एम्बिशन (Ambition) से पीछे धकेल दिया है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और इसका सबसे बड़ा क्रेडिट यहां के उन करोड़ों लोगों को जाता है, जो दिन-रात अपने सपनों को पूरा करने के लिए पसीना बहा रहे हैं। यह 53% का आंकड़ा बताता है कि आने वाले 10-20 सालों में दुनिया की हर बड़ी कंपनी, हर बड़े सेक्टर पर भारतीयों का ही दबदबा होने वाला है।

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Published on:
02 May 2026 10:00 am
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