
Indore Water Contamination Panic: मेरे तीन बेटे हैं यही मेंरे पास रहता था, मेरा सहारा था और आज गंदा पानी पीने से वो हम सबको छोड़कर चल गया। मैं बेसहारा हो गया और उसकी पत्नी विधवा तो मासूम बच्चे अनाथ… अब मैं कैसे उनको संभाल पाऊंगा? यह कहना है इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण बेटे को खो चुके हीरा लाल का। भागीरथपुरा की ये एक कहानी नहीं है… बल्कि कई हैं, जिन्हें अपनों को खोने का दर्द साल रहा है। हर दिन तकलीफ में गुजर रहा है। patrika.com पर पढ़ें भागीरथपुरा की ग्राउंड रिपोर्ट…
भागीरथपुरा में पिछले सात-आठ दिनों में दूषित पानी पीने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अलग-अलग स्थानीय अस्पतालों में इलाज जारी है। वहीं करीब 100 मरीज ICU में भर्ती हैं और जिंदगी मौत से लड़ रहे हैं। इन सात-आठ दिनों में पत्रिका हेल्थ रिपोर्टर अश्विन बक्शी ने हर दिन भागीरथपुरा की गलियों में घूमकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावितों से बात की, तो स्थानीय लोगों से जाना कि कैसे प्रशासन अब इतनी मौतों के बाद जागा है? और... अब काम को लेकर कुछ जिम्मेदारी दिखा रहा है। वहीं अश्विन उन परिवारों तक पहुंचे, जिन्होंने दूसरों की लापरवाही के कारण अपनों को खोया और अब खून के आंसू रो रहे हैं। आंखों में आंसू और दिल में दर्द लिए वे सांत्वना देने और हाल जानने आ रहे लोगों से बार-बार यही कह रहे हैं कि आखिर उनकी शिकायतें पहले क्यों अनसुनी की गई, अगर ये गुनाह प्रशासन नहीं करता तो आज उनके अपने उनसे दूर नहीं होते....
पिता हीरा लाल की आंखों में नींद नहीं है... मां का रो-रोकर बुरा हाल है... बहू की आंखें जैसे पथरा गई और मासूम बच्चे खामोश हो गए... हीरा लाल के बेटे की मौत दूषित पानी के कारण हुई... जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा पूरा परिवार झेल रहा है। हीरा लाल कहते हैं कि मेरे तीन बेटे हैं, लेकिन मेरा सहारा वही बेटा अरविंद था, वो मेरे साथ रहता था, दोनों बेटे अलग रहते हैं। वो बेलदारी करता था जो पैसे आते थे उसी से घर का खर्च चलता था। उसकी 14-15 साल की बेटी है, दो बेटे हैं। दोनों ही छोटे हैं। उसकी मां बार-बार कहती है कि बेटा लौट आ। हीरा लाल का पूरा परिवार सदमे में है।
भागीरथपुरा मेन रोड पर रहने वाले आनंद बरेडे ने बताया यहां दस दिन पहले पानी की मेन टंकी में दवा डाली गई थी। फिर भी पिता जीवन बरेडे की तबीयत 18 दिसंबर को खराब हुई। घर पर डॉक्टर को बुलाया तो, उन्होंने कहा भर्ती करना पड़ेगा। उल्टी दस्त की शिकायत के बाद अरविंदों अस्पताल लेकर गए थे। 28 दिसंबर को मौत हो गई। वहां डॉक्टर ने इन्फेक्शन के कारण मौत होना बताया। हमारे यहां अन्य सदस्य भी उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। जो मेहमान आए उन्हें भी उल्टी दस्त होना शुरू हो गए। वे यहां से चले गए।
गली नंबर 2 में पहुंचे हेल्थ रिपोर्टर अश्विन बक्शी ने स्थानीय निवासियों से बात की। प्रकाश मौर्य ने बताया कि दूषित पानी की घटना से पहले उनकी गली में कई-कई दिनों तक कचरा भरा पड़ा रहता था। दूषित पानी के कांड के बाद से लगातार निगम की टीम आती है और रोज कचरा ले जाती है। साफ-सफाई रोज हो रही है। लेकिन गंदा पानी लगातार आ रहा है। बदबू से हमारा बुरा हाल है। हवा के साथ उड़ती यह दुर्गंध हमारे घरों तक पहुंचती है। प्रकाश ने कहा कि हम परेशान हैं, बदबू और गंदगी में रहने को मजबूर हैं।
हम मूल रूप से धार का निवासी हूं। लेकिन इंदौर रहता हूं। नन्ना नगर एरिया में मेरे एक और भाई रहते हैं हम किसी कामसे भागीरथपुरा गए थे। वहीं हमने चाय-नाश्ता पानी किया था। उसके अगले ही दिन उनको डायरिया हो गया। इससे पहले उनकी कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं थी। दो दिन में उनकी हालत ज्यादा खराब हुई तो हमने तीसरे दिन 1 जनवरी को उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल इंदौर में भर्ती करवाया। दूसरे दिन ही उन्हें वेंटिलेटर पर रख दिया। और 3 तारीख को उनकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि पिता का आधार कार्ड धार का था, तो अस्पताल प्रशासन मानने को ही तैयार नहीं हुआ कि उनकी तबीयत दूषित पानी से बिगड़ी। उनका कहना है कि मैं प्रशासन से उम्मीद करता हूं जैसी ही उनका टेक्नीकल फॉल्ट समझ आएगा, तो वे मेरी पीड़ा को जरूर समझेंगे।
इंदौर के भागीरथ पुरा में रोंगटे खड़े करने वाला एक मामला ये भी सामने आया जिसमें 6 महीने के बच्चे की मौत भी दूषित पानी वाला दूध पीने से हुई। मां साधना का हाल देख आंखें नम हो गई। रह-रह कर वो तड़प उठती है कि मेरा बच्चा कहां चला गया। पति सुनील साहू का निराश चेहरा दर्द की दासतां सुनाता है। लेकिन अश्विन ने जब उनसे बात की तो पहले वे खुद को संभालते नजर आए, फिर कहा...
हमारा 6 महीने का बेटा था। बहुत मन्नतों के बाद शादी के 11 साल बाद हमें उसकी खुशी मिली थी। पहले से एक बेटी है। वह 10 साल की है, लेकिन उसके बाद हमारी गोद नहीं भरी। काफी इलाज करवाया और भगवान के दर पर जामकर मन्नतें मांगी... तब जाकर अव्यान हमारी गोद में आया। भगवान का शुक्र अदा कर रहे थे कि उसने हमारी सुनी... लेकिन मन्नतों की ये खुशी इतनी जल्दी काफूर हो जाएंगी सोचा नहीं था।
पत्नी साधना से रहा नहीं गया... अपना दर्द सुनाती फूट-फूट कर रोती-बिलखती मां के मुंह से निकला हमें बताया ही नहीं गया कि पानी गंदा है। साधना का कहना था कि... मेरा दूध कम आता था, डॉक्टर ने पैकेटबंद दूध में पानी मिलाकर उसे दूध पिलाने को कहा था ताकि उसका पेट भर सके। लेकिन मुझे क्या पता था कि जो पानी मैं उसे शुद्ध करने की हर प्रक्रिया को फोलो करते हुए दूध में मिलाकर दे रही हूं, वही मेरे बच्चे की जान ले लेगा।
साधना का दर्द इस बात में आसानी से महसूस किया जा सकता है कि कैसे उसने सोचा था कि अव्यान उनके बुढ़ापे के सहारा बनेगा, अब हमें कौन सहारा देगा?
साधना का दिल इतना तड़प रहा है कि जब उसके घर प्रशासन की टीम मुआवजा देने पहुंची तो उसने मुआवजा लेने से साफ इनकार कर दिया। वह चिल्ला-चिल्लाकर रोती रही और कहती रही ये पैसा मेरे बेटे की खुशियां मुझे नहीं लौटाएगा। नहीं चाहिए आपका पैसा....
भागीरथपुरा में हुई ये भयावह घटना सिर्फ दूषित पानी की कहानी नहीं है, यह टूटे परिवारों, सूनी गोदों और बेसहारा बुजुर्गों की त्रासदी है। सवाल यही है कि यदि इनकी शिकायतें समय पर सुनी जातीं तो आज इनकी मौतें हो सकती थीं।