Hottest February on Record : जम्मू कश्मीर में बीते एक 10 दशक में इस साल की फरवरी सबसे ज्यादा गर्म साबित हो रही है। दिन का तापमान सामान्य तापमान से 8 से 10 डिग्री ज्यादा रह रहा है। पूरे हिमालयी क्षेत्र में कमोबेश यही हाल है। ऐसा क्यों हो रहा है, इस बारे में एक्सपर्ट से जानिए।
Hottest February of Jammu Kashmir : जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग ने कश्मीर में सर्दियों की अवधि और तीव्रता को प्रभावित किया है, जिसके चलते इस वर्ष क्षेत्र में असामान्य रूप से गर्म सर्दी देखी जा रही है। दिन का तापमान सामान्य से 8 से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे यह लगभग एक दशक का सबसे गर्म फरवरी बन गया है। यहां एक्सपर्ट्स हिमांशु ठक्कर से जानिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में क्या हैं हाल?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, महीने के अंत तक दिन के तापमान में लगभग दो डिग्री की और वृद्धि होने की संभावना है। जनवरी में हल्की सर्दी के बाद अब घाटी में तेज धूप के साथ असामान्य रूप से गर्म दिन देखे जा रहे हैं। कश्मीर के मौसम विभाग के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद ने मीडिया को बताया, 'आज श्रीनगर का अधिकतम तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 9.2 डिग्री अधिक है।'
उन्होंने कहा कि यह पिछले एक दशक में फरवरी महीने में दर्ज किया गया सबसे अधिक अधिकतम तापमान है। इससे पहले 24 फरवरी 2016 को श्रीनगर में 20.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था।
उत्तर कश्मीर के स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में शुक्रवार को दिन का तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 9.6 डिग्री अधिक था। 11 फरवरी 1993 को गुलमर्ग में 11.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। मौसम वैज्ञानिक यह भी अनुमान जता रहे हैं कि अभी गर्मी का दौर समाप्त नहीं हुआ है। दरअसल, यह तो अभी शुरू ही हुआ है।अभी कई और रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
घाटी में असामान्य गर्म मौसम के बीच, मौसम विभाग के निदेशक ने फरवरी के अंत तक दिन के तापमान में और वृद्धि की संभावना जताई है। उन्होंने कहा, “सूखा दौर जारी रहने के कारण महीने के अंत तक दिन का तापमान कम से कम 2 डिग्री और बढ़ सकता है।”
जम्मू कश्मीर में बीते एक दशक में इस साल की फरवरी सबसे ज्यादा गर्म क्यों रह रही है? इस सवाल के जवाब में पर्यावरण के जानकार और नेटवर्क साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) से जुड़े हिमांशु ठक्कर पत्रिका से कहते हैं कि 20 फरवरी तक जम्मू कश्मीर का रिकॉर्ड उठा लीजिए तो पता चला कि सर्दियों में बारिश सामान्य से 52 प्रतिशत कम रही। हिमाचल में 32 और उत्तराखंड में 46 सर्दियों में बर्फबारी कम रही। वहीं पूर्वोत्तर हिमालय के सिक्किम में 94 और अरुणाचल में 82 फीसदी सर्दियों में बारिश कम रही। मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में सर्दियों में बारिश बिल्कुल नहीं हुई। ऐसे में सर्दियों के मौसम में तापमान में बढ़ोतरी तो दर्ज की ही जाएगी।
डॉ. मुख्तार के अनुसार, कश्मीर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से प्रभावित हुआ है और “हम अब हल्की सर्दी का अनुभव कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऊष्मीकरण के कारण हमारी सर्दियों की अवधि और तीव्रता कम हो गई है। अब हमारी सर्दी केवल 40 दिनों की ‘चिल्लई कलां’ अवधि तक सीमित रह गई है।” उन्होंने यह भी कहा कि वर्षा के पैटर्न में भी बदलाव आया है।
सर्दियों की अवधि क्यों छोटी होती जा रही है? इस सवाल के जवाब में पत्रिका से बातचीत में हिमांशु ठक्कर ने कहा कि सर्दियों में पश्चिमी हिमालय में जो बर्फबारी या बारिश होती थी, उसमें काफी कमी आ रही है। हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों में बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ के चलते होती थी, लेकिन अब उसमें कमी आ गई है। बीते दिसंबर तक तो हिमालय में बारिश हुई ही नहीं, जनवरी में भी नहीं हुई। सर्दियों में इन इलाकों में जो भी बारिश हुई, वह जनवरी के बाद ही हुई। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के हालात कम बने, इसलिए बर्फबारी में कमी देखी जा रही है।
क्या यह सब ग्लोबम वार्मिंग के चलते हो रहा है? इसके जवाब में वह कहते हैं कि हां, यह समस्या ग्लोबल वार्मिंग के चलते उत्पन्न हो रही है। दूसरा, वैश्विक स्तर पर जो तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, उसके चलते भी भारत में और हिमालयी क्षेत्र के तापमान में काफी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इन सबके अलावे हम जो विकास के नाम पर हिमालय में पहाड़ की खुदाई, जंगलों की कटाई, वॉटर बॉडीज कम करना, टनल बनाना, ब्लास्टिंग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उसके चलते तापमान बढ़ने, लैंड स्लाइडिंग, ग्लेशियर पिघलने से लेकर स्नो लाइन के सिकुड़ने जैसी दूसरी अन्य प्राकृतिक दिक्कतें पैदा हो रही हैं।