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थाइलैंड से भारत के जंगलों में पहुंचा Killer Virus, टाइगर स्टेट में 9 दिन में 5 बाघों की मौत से हड़कंप

Killer Virus CDV: मध्य प्रदेश में पहली बार CDV का खतरा, कान्हा नेशनल पार्क में 9 दिन में बाघिन और शावक समेत 5 बाघों की मौत की खबर के बाद जांच में हुई पुष्टि, प्रशासन अलर्ट मोड में, जारी किए निर्देश, सवाल क्या पूरे 9 टाइगर रिजर्व में है खतरा, बाघों से इंसानों में फैलने का खतरा कितना? जानें क्या कहते हैं वाइल्डलाइफ वेटरनरी एक्सपर्ट

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May 07, 2026
Danger of CDV virus first time in MP (creative patrika)

Killer Virus CDV in India: थाईलैंड के चियांग माई स्थित टाइगर किंगडम में 72 बाघ और गुजरात के गिर में शेरों की जान लेने वाला खतरनाक केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) मध्यप्रदेश भी पहुंच गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन और उसके चार शावकों की जान इसी वजह से गई।

स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ ने की पुष्टि

स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिंग एंड हेल्थ (SWFH) जबलपुर ने इसकी (Killer Virus CDV in India) पुष्टि की है। वन विभाग ने रिजर्व के 2-3 वर्ग किमी क्षेत्र को क्वारंटीन घोषित किया है। वायरस के संवाहक कुत्ते हैं। ऐसे में रिजर्व से लगे 84 गांवों के 13,232 कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है। इनमें से 498 को बाघिन और शावकों की मौत के बाद टीके लगाए गए। सीडी वायरस से मध्य प्रदेश में बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों की मौत का यह संभवत: पहला मामला है।

अनुमान है कि बाघिन-शावकों ने जो शिकार किया, उसे वायरस पीड़ित कुत्तों ने और फिर बाघिन और शावकों ने खाया होगा। वायरस ग्रसित कुत्तों की लार पानी में गिरी होगी।

इंसानों और जानवरों को खतरा नहीं

डॉ. राजौरा का कहना, इस वायरस से इंसानों, मवेशियों और बाकी वन्यजीवों को खतरा नहीं है। कुत्ते भी नहीं मरते। यह वायरस बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।

हाथियों से गश्त बढ़ाई

एमपी चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. समीता राजौरा के अनुसार क्षेत्र में हाथियों से गश्ती बढ़ा दी है, ताकि बाघ-तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों का मूवमेंट बिल्कुल न हो। अधिकारी, कर्मचारियों को प्रशिक्षित (Killer Virus CDV in India) किया जा रहा है। क्षेत्र से मांस के अवशेष, विष्ठा हटाए गए हैं। इसके अलावा पानी के अस्थाई स्रोतों को बंद किया है। ये सभी उक्त वायरस के वाहक होते हैं। अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।

कान्हा में नौ दिन में पांच की गई जान

21 अप्रेल: अमाही नाले के पास नर शावक मृत पाया गया।

24 अप्रेल: ईंटावारे के पास दूसरा शावक।

26 अप्रेल: सरही नकान बीट में तीसरा शावक मृत मिला।

27 अप्रेल: अमाही क्षेत्र में बाघिन टी-141 और उसके चौथे शावक का रेस्क्यू।

29 अप्रेल: इलाज के दौरान दोनों की मौत। (नमूनों की जांच में वायरस की पुष्टि हुई, वायरस कैसे पहुंचा इसकी जांच जारी है)

कैसे फैलता है CDV

यह वायरस कुत्तों के टॉन्सल और लिंफ यानी नसों में बहने वाले एक खास तरल पदार्थ पर अटैक करता (Killer Virus CDV in India) है। इसके बाद भी करीब 7 दिन बाद इसके लक्षण सामने आते हैं। धीरे-धीरे यह वायरस श्वसन नली और फिर लिवर, किडनी तक पहुंच जाता है। कुछ दिन में मस्तिष्त तंत्रिका पर हमला कर देता है। इससे कुत्तों की मौत हो जाती है। बता दें कि यह बीमारी खराब वैक्सीन से भी फैल सकती है। हालांकि ऐसे मामले रेयर ही होते हैं। बैक्ट्रिया इंफेक्शन से भी इस बीमारी के फैलने का खतरा रहता है।

CDV संक्रमण के लक्षण, जानें प्रमुख लक्षणों में-

  • हाई फीवर
  • लाल आंखें
  • नाक-कान से पानी बहना

इसके अलावा कफ, उल्टी और डायरिया भी हो सकता है। इस बीमारी के कारण कुत्ते सुस्त पड़ जाते हैं, संक्रमण बढ़ा, तो मौत भी हो जाती है।

किस टेस्ट से पता चलता है CDV पॉजीटिव है या नहीं

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (Killer Virus CDV in India) का पता लगाने के लिए बायोकेमिकल टेस्ट और यूरिन की जांच की जाती है। इससे क्लियर हो जाता है कि कुत्ता या कैट प्रजाति की जातियां पॉजिटिव है या नहीं। दरअसल ये बीमारी कुत्तों से शुरू होती है। और केवल कैट फेमिली के जानवरों को ही संक्रमित करती है। अन्य जानवरों या इंसानों में यह बीमारी नहीं फैलती।

बता दें कि गिर शेरों के लिए दुनिया भर में मशहूर गुजरात के गिर अभयारण्य में CDV के कारण 36 शेरों की जान जा चुकी है।

थाइलैंड में 72 बाघों को लील गया CDV

उत्तरी थाइलैंड के शिआंग Mai Province स्थित Tiger Kingdom में इस खतरनाक वायरस (Killer Virus CDV in India) के प्रकोप से 72 बंदी बाघों की मौत हो गई है। 8 से 18 फरवरी 2026 के बीच इन बाघों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के साथ ही माइकोप्लाज्मा संक्रमण भी पाया गया। जबकि कुछ मामले फेलाइन पार्वोवायरस को भी कारक बताया गया। बता दें कि इस घटना के बाद प्रशासन ने इसे 14 दिन के लिए बंद कर दिया था। वहीं युद्ध स्तर पर गहन सफाई और संक्रमणमुक्ति का निर्णय लिया गया था। वहीं अब मध्य प्रदेश में भी वन विभाग अलर्ट मोड में है और सभी 9 टाइगर रिजर्व में सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।

APCCF एन. कृष्णमूर्ति का कहना है कि यह घटना केवल कान्हा टाइगर रिजर्व में ही देखने को मिली है। इसके बाद सभी नौ टाइगर रिजर्व में एसओपी जारी कर दी गई है। जंगलों के आसपास बसे गांवों में कुत्तों को वैक्सीनेट किया जा रहा है। टाइगर रिजर्व में पानी के स्रोतों पर तारबंदी की गई है। किसी भी वाइल्डलाइफ पार्क या फिर टाइगर रिजर्व में टूरिस्ट की आवाजाही बंद नहीं की गई है।

Killer Virus की पुष्टि कब-कब

  • 12 सितंबर 2025 से कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और प्रोटोजोआ इंफेक्शन गिर में अधिकतर शेरों को लील चुका था।
  • गिर में अब तक 36 शेरों की मौत हो चुकी है इस वायरस से।
  • चार शेरों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है, जबकि अन्य शेरों की मौत प्रोटोजोआ इंफेक्शन के कारण बताई गई।-बता दें कि 2011 में गुजरात के वन विभाग को शेरों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के बारे में दो बार आगाह किया गया था।
  • इससे पहले 1994 में तंजानिया में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण 1000 शेरों की मौत की पुष्टि की गई थी।

UK की एक यूनिवर्सिटी खोज रही सस्ता और आसान टेस्ट, रिसर्च जारी

बड़ी बिल्लियों यानी टाइगर्स, लेपर्ड, पेंथर आदि को CDV (Killer Virus CDV in India) से बचाने के लिए एक प्रोजेक्ट के तहत UK की एक यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च शुरू की गई। यही रिसर्च मलेशिया और नेपाल में भी की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत 2026 तक फील्ड टेस्टिंग रिसर्च पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। वहीं इस रिसर्च को 2026 के अंत तक प्रकाशित भी किया जाएगा।

जानें क्या है ये प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट में कैट प्रजाति के सभी मांसाहारी जानवरों में होने वाले canine Distemper Virus (Killer Virus CDV in India) की पहचान के लिए एक सस्ता-आसान और भरोसेमंद टेस्ट विकसित किया जा रहा है।

इस टेस्ट का उद्देश्य CDV एंटीबॉडी पहचानने के लिए सही प्रोटीन को ढूंढ़ना। ELISA बेस्ड आधारित टेस्ट किट तैयार करना, 100 से ज्याद सैंपल पर टेस्ट को वैलिड करना औऱ 2026 तक इस रिसर्च को वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित करना है।

क्यों जरूरी माना जा रहा ये टेस्ट

CDV से संक्रमित करीब 30 फीसदी बाघों की मौत हो जाती है। ऐसे में छोटे और अलग-थलग रहने वाले बाघों की आबादी का हिस्सा इसके निशाने पर आ सकता है। वायरस शरीर में बहुत कम समय रहता है, ऐसे में इसे पकड़पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। जबकि मौजूदा टेस्च महंगे, धीमे और सीमित देशों में ही उपलब्ध हैं।

इसका बड़ा फायदा

रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि एक यूजर फ्रेंडली ELISA टेस्ट बनेगा। अलग अलग जानवरों पर काम करेगा। वहीं इससे जल्दी ही जंगल का एरिया कवर किया जा सकेगा। ऐसे में यह टेस्ट वायरस का पता लगने के बाद प्रशासन जल्दी अलर्ट हो जाएगा और इसे अन्य कैट प्रजातियों में फैलने से रोका जा सकेगा।

Published on:
07 May 2026 07:00 am
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