MP wildlife: कूनो की दहाड़, चंबल की वापसी, AI की नजर, आज एमपी दुनिया को सिखा रहा है वाइल्डलाइफ कंजरवेशन, वन्यजीव दिवस पर मध्यप्रदेश के जंगलों की कहानी सुनाती रिपोर्ट...
MP Wildlife: जब सारी दुनिया 'विश्व वन्यजीव दिवस’ (World wildlife day 2026) मना रही है और जैव विविधता बचाने की बात कर रही है, तब भारत के दिल में बसा मध्य प्रदेश सिर्फ जश्न नहीं मना रहा, बल्कि वह एक मॉडल पेश कर रहा है। जंगलों की भीनी खुशबू, नदियों की कल-कल और तकनीक की निगरानी के बीच MP साबित करता जा रहा है कि संरक्षण सिर्फ कागजों में नहीं जमीन पर नजर आने वाली हकीकत है। अपने जंगलों का सुनहरे दौर में लेकर जा रहा है। टाइगर स्टेट में अकेले बाघों की दहाड़ या इनकी बढ़ती संख्या नहीं बल्कि, चीतों की रफ्तार और अनुकूल होती परिस्थितियां भी, परम्परा का संगम बनाती नदियों में लौटती दुर्लभ जीवों जिंदगी भी और गांवों से उठती उम्मीद भी राज्य के वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में अलग पहचान दिला रही है।
यह रिपोर्ट आंकड़ों का संकलन भर नहीं है, बल्कि उन प्रयासों की झलक भी है, जिनके परिणाम जमीन पर नजर आने लगे हैं। कूनो से लेकर चंबल और कान्हा तक मध्य प्रदेश के जंगलों में क्या-क्या बदल रहा है। पढ़ें संजना कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट…
कूनो नेशनल पार्क अब दुनिया के नक्शे पर 'चीता हब' के रूप में उभर चुका है। बोत्सवाना से आए 9 नए चीतों के साथ यहां संख्या 48 तक पहुंच गई है।
दशकों पहले विलुप्त हो चुके चीते की यह वापसी सिर्फ वन्यजीव संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक योजना, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और राजनीतिक इच्छाशक्ति का संयुक्त परिणाम है। 'प्रोजेक्ट चीता' ने यह साबित किया है कि अगर सही आवास और निगरानी मिले तो, प्रकृति खुद को पुनर्जीवित कर सकती है। हालांकि चुनौतियां हैं, जिनसे वन विभादग निपटने के प्रयास कर रहा है।
एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति के मुताबिक 'टाइगर स्टेट' की पहचान रखने वाला मध्य प्रदेश अब संरक्षण में टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा प्रयोग कर रहा है। ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन 2026 में AI आधारित कैमरा ट्रैप और DNA एनालिसिस का इस्तेमाल किया गया। कान्हा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में लगे स्मार्ट कैमरे अब खुद धारियों का मिलान कर रहे हैं। यह कदम शिकारियों पर नकेल कसने और पारदर्शिता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
केवल थल ही नहीं, जल संरक्षण में भी MP आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और कूनो नदी में घड़ियाल और दुर्लभ 'थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल' छोड़े गए हैं। यह इकोसिस्टम रिस्टोरेशन का उदाहरण है, जहां सिर्फ बड़े जानवर नहीं, बल्कि, पूरी जैव विविधता को पुनर्जीवित किया जा रहा है। हाल ही में सीएम मोहन यादव ने कूनो नदी में घड़ियालों के 53 बच्चों को छोड़ा है।
हाल ही में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए 'एलीफेंट फ्रेंडली विलेज' मॉडल शुरू किया गया है। सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम गांव वालों को मोबाइल पर हाथियों की लोकेशन बताएगा। यह संरक्षण का आधुनिक मॉडल है, जहां सह-अस्तित्व प्राथमिकता है।
-भारतीय भेड़िया- भारत में कुल 3,170 भेड़िये हैं, इनमें से करीब 770-772 भेड़िये एमपी में हैं।
-स्लॉथ बेयर- एमपी में स्लॉथ बेयर की संख्या- करीब 1800-2000 है। जबकि भारत में 6-7 हजार
-चार सींग वाला चिंकारा- एमपी में 1500-2000 है इनकी संख्या, देश में 3 से 4 हजार।
-भारतीय पैंगोलिन- फिलहाल एक निश्चित आंकड़ा नहीं, लेकिन इनके संरक्षण में लगातार प्रयास जारी हैं।
-गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम (हाल ही में संपन्न हुई है वल्चर स्टेट एमपी में गिद्धों की गणना) जबकि 2023-24 की गणना के मुताबिक एमपी में हजारों में है।
एमपी का पातालकोट भी आज विश्व वन्यजीव दिवस (World wildlife day 2026) पर विशेष चर्चा में आ गया है। यहां पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियां वैश्विक प्राकृतिक चिकित्सा बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। आदिवासी समुदाय का पारंपरिक ज्ञान इस जैव विविधता को जीवित रखे हुए हैं।
कान्हा-पेंच कॉरिडोर
यह रास्ता कान्हा टाइगर रिजर्व को पेंच टाइगर रिजर्व से जोड़ता है। इसका बड़ा फायदा ये है कि बाघ एक जंगल से निकलकर दूसरे जंगल तक सुरक्षित पहुंच सकते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों के बाघों में प्रजनन होता है। इससे नस्ल मजबूत रहती है। वहीं इसे एमपी का सबसे महत्वपूर्ण टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर माना जाता है।
कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर
यह कॉरिडोर MP के कान्हा को छत्तीसग़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व से जोड़ता है। ये खास इसलिए है कि यहां बाघ 300-400 किमी तक की दूरी तय कर सकते हैं। यह मध्य भारत का एक बड़ा प्राकृतिक गलियारा है।
सतपुड़ा-मेलघाट कनेक्टिविटी
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से महाराष्ट्र के मेलघाट तक प्राकृतिक वन पट्टी जुड़ी है। यहां बाघ और तेंदुए राज्य सीमा पार कर सुरक्षित मूवमेंट कर सकते हैं। यह सेंट्ल इंडिया लैंडस्केप का हिस्सा है।
कूनो-रणथम्भौर प्राकृतिक मार्ग
कूनो नेशनल पार्क का इलाका राजस्थान के रणथम्भौर लैंडस्केप से जुड़ा माना जाता है। बाघों की स्वाभाविक आवाजाही संभव हो पाती है, चीता प्रोजेक्ट के लिए बड़ा लैंडस्केप तैयार।
वन क्षेत्र और संरक्षित इलाकों का विस्तार
वन्य जीवों और मानवीय संघर्षों के साथ ही संरक्षण को लेकर एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति के मुताबिक कूनो वाइल्ड लाइफ डिविजन का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है, ताकि चीतों को बड़ा आवास मिल सके। बफर जोन को मजबूती मिले। आसपास के जंगल भी संरक्षण में शामिल हों।
माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनाना
माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। वहीं इसका विस्तार भी टाइगर रिजर्व के रूप में किया जा रहा है। इसके तहत शिवपुरी क्षेत्र में नया टाइगर लैंडस्केप बनेगा, ग्वालियर-श्योपुर बेल्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
नौरादेही अभयारण्य का विस्तार
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को अब भविष्य के बड़े वाइल्डलाइफ हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। चीतों के लिए वैकल्पिक आवास की योजना है। घासभूमि का विकास करना है। बड़े क्षेत्र में प्रकृतिक जंगल संरक्षण की तैयारी जारी है।
-इसके अलावा टाइगर रिजर्व के बफर जोन का कार्य जारी है
-रेलवे लाइन और हाईवे पर अंडरपास या ओवरपास के कार्य किए जाने हैं
कहना होगा कि मध्य प्रदेश सिर्फ जंगल बचा नहीं रहा, बल्कि उन्हें जोड़ रहा है, जानवरों को चलने, घूमने की आजादी दे रहा है, नए संरक्षित क्षेत्र बढ़ा रहा है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश को भारत का सबसे मजबूत वाइल्डलाइफ लैंडस्केप माना जाता है।