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Cyber Special : क्या है म्यूल अकाउंट्स, जिसके जरिए चलता है साइबर ठगी का खेल, ऐसे 9.5 हजार खाते हुए बंद

प्रमोद मिश्रा की पत्रिका स्पेशल रिपोर्ट : कई पीड़ितों की मेहनत की कमाई इन म्यूल खातों से होकर विदेश में बैठे स्कैमर्स तक पहुंचती है। बंद म्यूल खाते में ठग कर चुके 28 हजार से अधिक ट्रांजेक्शन। पूरी कहानी को समझिए।
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Sep 30, 2026
patrika special on cyber scams
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

इंदौर. साइबर ठगी के लिए बदमाशों को बैंक खाते बड़ी आसानी से मिल रहे हैं। कई जगह तो सोशल मीडिया के जरिए डिमांड पर म्यूल खाते मिल रहे है। लोग छोटे फायदे के लिए अपने बैंक खातों को बदमाशों को उपलब्ध करा देते हैं और फि्र उसमें साइबर ठगी के करोंड़ों रुपए जमा कराए जाते हैं। देश के अलग अलग हिस्सों में होने वाली ठगी का रुपया इन खातों मेें जमा होता है। पुलिस भी खाता धारक को ही गिरफ्तार कर पाती है लेकिन मूल अपराधी तक नहीं पहुंंच पाती। अब ऐसे हजारों म्यूल खाते (किराये के खातों) को इंदौर पुलिस ने बड़े स्तर पर बंद कराने की कार्रवाई की है। हैरानी की बात है की हजारों की संख्या में इन खातों को फ्रीज कराने के बाद भी शहर में विभिन्न तरह की साइबर ठगी जारी है।

लगातार लोग पुलिस अधिकारी के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहे है। जिन खातों पर समय रहते कार्रवाई की है उनसे पीड़ितों का पैसा रिकवर कराने में सफलता मिली है। हालांकि कुछ खाते ऐसी गैंग से जुड़े हुए थे जिनमें पैसा ट्रांसफर हुआ लेकिन चेन सिस्टम से होकर वह बेहद कम समय में विदेश में बैठे स्कैमर्स तक पहुंच गया।

इन वारदात में सबसे अधिक म्यूल खातों का इस्तेमाल

  • जॉब फ्रॉड, टास्क फ्रॉड, गेमिंग फ्रॉड
  • डिजिटल अरेस्ट केस
  • शेयर मार्केट में डबल फायदे का झांसा देकर ठगी
  • केवाईसी अपडेट कराने, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर
  • डेटिंग साइट, मेट्रिमोनियल साइट पर जीवनसाथी बनने के झांसा देकर ठगी

मजूदर, नौकरीपेशा के खाते ज्यादा

साइबर ठगी में म्यूल खातों का इस्तेमाल होने पर जांच की तो पता चला कि मजदूरी करने वाले, ठेला चलाने वाले, यहां तक की नौकरीपेशा को कुछ हजार का लालच देकर उसका बैंक में अकाउंट खुलवा लिया जाता है। बाद में बैंक अकाउंट से संबंधित सारे दस्तावेज, एटीएम, सिम कार्ड आदि हासिल कर ठगी करने वाले तक पहुंचा दिया जाता है। मुख्य आरोपी इन खातों मेें ठगी की लाखों की रकम डलवाता है और जिसका बैंक अकाउंट है उसे कुछ हजार रुपए मिलते है और पुलिस जांच के दौरान वह ही गिरफ्त में आता है।

केस 1- महू पुलिस ने ऑनलाइन गेम्स के नाम पर हुई धोखाधड़ी की राशि जिस बैंक खाते में जमा हो रही थी उसकी जांच की। पता चला कि खाता अन्नपूर्णा इलाके की बैंक का है और जिसका खाता है वह निजी कंपनी में छोटी नौकरी करता है। मात्र पांच हजार रुपए की लालच में आकर उसने बैंक खाता खुलवाकर एटीएम व संबंधित सिम दूसरे आरोपियों को दी जिन्होंने सरगना तक पहुंचा दी।

केस 2- साइबर सेल ने हाल ही में लाखों की धोखाधड़ी के मामले में बैंक खाता इस्तेमाल होने पर शाजापुर के युवक को पकड़ा। पता चला कि वह सब्जी का ठेला लगाता है। उसे झांसे में लेकर बैंक खाता खुलवाया गया और बाद मेें उसे 8 हजार रुपए दिए गए थे। उसके बैंक खाते में अलग अलग ठगी के करीब 50 लाख रुपए देश के अलग अलग हिस्सों से जमा हुए थे। उसके खाते को भी बंद कराया गया।

9500 से अधिक म्यूल खातों को क्राइम ब्रांच ने कराया बंद

विभिन्न तरह के साइबर संबंधित अपराधों पर नजर रख रहे क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से लेकर अब तक विभिन्न साइबर संबंधित अपराध की जांच में पता चला कि है कि पीडि़त की मेहनत की कमाई जिन खातों में ट्रांसफर हुई है। वो म्यूल अकाउंट है या किराये के खाते हैं। ऐसे फर्जी खातों में 28 हजार से अधिक ट्रांजेक्शन हुए हैं। देखने में आया है कि एक खाते में एक नहीं दो नहीं चार से अधिक ट्रांजेक्शन भी हुए हैं। इसलिए फर्जी ट्रांजेक्शन की संख्या ज्यादा है। वहीं जनवरी 2026 से लेकर 14 मार्च के बीच आई साइबर संबंधित विभिन्न शिकायतों की जांच में 9 हजार 500 से अधिक म्यूल खाते सामने आए। इन खातों को फ्रीज (बंद कराया ) गया।

डीसीपी क्राइम आरके त्रिपाठी के मुताबिक, कई केस में एक ही म्यूल खाते का इस्तेमाल हुआ है। म्यूल खातों को चिन्हित कर बंद कराया जा रहा है ताकि फिर वे ठगी के केस में इस्तेमाल नहीं हो सके।

म्यूल खातों से पीड़ितों की 2 करोड़ राशि रिकवर

लगातार फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीम इन म्यूल खातों से जुड़ी गैंग की तलाश कर रही है। इन खातों में किस तरह पैसे ट्रांजेक्शन हुए। इनके असल में धारक कौन है। किन परिस्थिति में ये खाते ठगों के पास पहुंचे। आदि सभी जानकारी भी निकाली जाती है। देखने में आया है कि साइबर ठग गैंग किराये पर खाते लेती है। मूल खाता धारक को कमीशन का लालच देती है। बाद में उनके खाते साइबर ठगी करने वाली गैंग को बेच देती है। जब गैंग विभिन्न अपराधों में उक्त खातों का इस्तेमाल करती है। तो पीड़ित पुलिस के पास शिकायत करने पहुंचते हैं। ऐस में पीड़ित की राशि रिकवर कराने के लिए पुलिस सबसे पहले ऐसे खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई करती है। कई बार तो ठगी की राशि उन खातों में मिल जाती है। जिस पर होल्ड लगवाकर पुलिस संबंधित पीडि़त को उक्त राशि रिफंड कराने की कार्रवाई करती है। इस वर्ष पुलिस ने लोगों की करीब 2 करोड़ राशि रिकवर की जा चुकी है।

विदेश में बैठे ठगों तक पहुंच रही ठगी की राशि

क्राइम ब्रांच ने कई साइबर ठगी के मामले में जांच की है। फर्जी डिजिटल अरेस्ट केस की जांच में म्यूल खाते को बेचने वालों की धरपकड़ हुई। जब जांच में वारदात की परतें खुली तो पता चला कि साइबर ठग गैंग टेलीग्राम ग्रुप की सहायता से लोगों से जुड़ती है। उनसे किराये के खाते खरीदने के ऐवज में मोटा कमीशन देेती है। बाद में खाता खरीदने वाली गैंग उक्त म्यूल खाते को विदेश से भारत में विभिन्न साइबर ठगी को अंजाम देने वाली गैंग के सदस्यों को सौंप देती है। बाद में गैंग फर्जी पुलिस अधिकारी तो कभी किसी अन्य डिपार्टमेंट का अधिकारी बन लोगों को अपने जाल में फंसाती है। फर्जी डिजिटल अरेस्ट जैसी वारदात के चक्कर में फंसकर लोग अपनी मेहनत की कमाई ठगों के बताए खाते जो कि म्यूल खाते होते है उसमें ट्रांसफर कर देते हैं। बाद में ठग उन पैसों को एक से अधिक म्यूल खातों में चेन सिस्टम में ट्रांसफर कर देते हैं। पुलिस जब तक चेन सिस्टम में ट्रांजेक्शन को रोक पाती। ठग गैंग ठगी का पैसा क्रिप्टो में कनवर्ट कर उसे विदेश में बैठे चाइनीज स्कैमर्स तक पहुंचा देते हैं।

Updated on:
30 Sept 2026 12:50 pm
Published on:
30 Sept 2026 12:49 pm