
Elephant : मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी वन्यजीव प्रेमियों के लिए संतोष की बात है, लेकिन इन्हीं हाथियों के साथ लगातार हो रहे हादसों के कारण वे चिंतित भी हैं। पिछले एक महीने में क्षेत्र में दो हाथियों की करंट लगने से मौत हो गई। पहली घटना के बाद हाथियों के मूवमेंट वाले इलाकों में यदि वन विभाग और बिजली कंपनी का अमला सतर्कता बरतता तो शायद दूसरी घटना को रोका जा सकता था। लेकिन सरकारी अमले की लापरवाही से हादसों को रोका नहीं जा सका। दो साल पहले भी क्षेत्र में इसी तरह करंट से एक हाथी की मौत हुई थी।
विंध्य क्षेत्र के शहडोल, सीधी, सतना, रीवा, मऊगंज और मैहर जिले हाथियों के लिए मुफीद हैं। इन इलाकों में जंगली हाथियों की संख्या 100 से ज्यादा होने का अनुमान है। क्षेत्र के नेशनल पार्क और संरक्षित वन क्षेत्रों में वन विभाग भी कुछ हाथियों की मदद से पर्यटकों को भ्रमण करवाता है। जंगली हाथियों को घूमने-फिरने के लिए जब बाहर जाना होता है तो वे इसी कॉरिडोर से निकलकर यूपी के प्रयागराज और मिर्जापुर तक चले जाते हैं।
यानी यह कॉरिडोर हाथियों के लिए पसंदीदा जगह है, यह जानते हुए भी वन विभाग के अफसरों ने हाथियों के रास्ते आसान बनाने की कोई परवाह नहीं की। दो साल के अंतराल में हुई तीन घटनाएं बताती हैं कि हाथियों की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण बिजली के झूलते तारों से उन्हें करंट लगा और उनकी मौत हुई।
दो साल पहले अमरपाटन क्षेत्र में करंट से हुई हाथी की मौत के बाद वन विभाग के अफसरों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों से साफ कहा था कि हाथियों के मूवमेंट वाले इलाकों में बिजली के तारों का जायजा लिया जाए और उन्हें पर्याप्त ऊंचाई पर रखा जाए। उस हादसे के बाद बिजली कंपनी की लापरवाही उजागर होने पर एक इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी। लेकिन पिछले एक महीने में हुई दो घटनाओं के बाद बिजली कंपनी के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई। उधर, वन विभाग ने इन हादसों के बाद नियमानुसार वन अपराध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है और जांच की जा रही है। अफसरों का कहना है कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई के लिए बिजली कंपनी को पत्र लिखा जाएगा।
शहडोल जिले के ग्राम चंदोली में 13 अक्टूबर को करंट लगने से एक नर हाथी की मौत हुई। वन विभाग के रिकॉर्ड में इस हाथी का नाम मखना था। बाणसागर की दायीं तट नहर के दक्षिण में पहाड़ जलमाखोली के नीचे एक खेत में पंप हाउस के पास यह नर हाथी मृत मिला। उसके पास बिजली का खुला तार पड़ा था, जिसमें करंट प्रवाहित था। इस कारण हाथी की मौत का कारण करंट लगना ही माना जा रहा है। शहडोल उत्तर वन मंडल शहडोल के वन परिक्षेत्र पश्चिम ब्यौहारी की चचाई वन बीट में करंट से हाथी की मौत का यह पहला मामला है।
डीएफओ तरुणा वर्मा का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों का झुंड सक्रिय था। इसी दौरान एक हाथी झुंड से अलग होकर राजस्व क्षेत्र में पहुंच गया और बिजली के तारों की चपेट में आ गया। घटनास्थल पर तार मिलने और बिजली की सप्लाई चालू होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। उन्होंने बताया कि घना जंगल होने के कारण इस क्षेत्र में वन्यजीवों का विचरण होता है। वर्ष 2018 से यहां हाथियों की आवाजाही देखी जा रही है। उनके विचरण के दौरान किसानों की फसलों और घरों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों से फसल या संपत्ति को नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुआवजा दिया जाता है। वन विभाग का प्रयास है कि वन्यजीव और मनुष्य दोनों सुरक्षित रहें। इसके लिए हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहने की जरूरत है।
मऊगंज जिले के मलकपुर में 19 सितंबर को एक नर हाथी की करंट लगने से मौत हुई। एक आदिवासी के टपरे के पास लगे अमरूद के पेड़ से पत्तियां खाने के दौरान लगभग 15 साल के इस हाथी को करंट लगा। अमरूद के पेड़ के आसपास बिजली के खंभे से तार लिपटा हुआ मिलने से अनुमान लगाया गया कि हाथी की मौत करंट लगने से हुई है। यह हाथी अपने एक अन्य साथी के साथ पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में भटक रहा था। अपने साथी की मौत के बाद दूसरा हाथी बदहवास हालत में क्षेत्र में घूमता रहा। दो दिन तक उसे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीमें सक्रिय रहीं। अंतत: विशेषज्ञ हाथियों की टीम कुमकी की मदद से उसे घेराबंदी करके पकड़ा गया। बाद में उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेज दिया गया।
इस अभियान के दौरान लगभग 150 वनकर्मियों की टीम के साथ चार प्रशिक्षित हाथी तैनात किए गए थे। इस मामले में लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। कारण यह कि दो भटके हुए हाथी इस क्षेत्र में कई दिनों से घूम रहे थे। उन्होंने आदिवासियों के टपरों और खेतों में घुसकर नुकसान भी पहुंचाया था। ये हाथी अक्सर रात को विचरण करते थे। यदि अधिकारी सतर्क होते तो बिजली कंपनी के अमले को क्षेत्र में झूलते तारों की कसावट करने के निर्देश दे सकते थे। बिजली कंपनी का अमला तो बैफिक्री में था ही, वन विभाग के अफसरों ने भी उदासीनता बरती।
इधर, एक अन्य हाथी ने सतना जिले में पूरे सितंबर महीने भर वन विभाग के अमले को हलाकान किए रखा। यह गुस्सैल हाथी अमरपाटन और रामनगर क्षेत्र में भटकता रहा। गुस्से में उसने भारी तबाही मचाई। कई घरों को तहस-नहस किया। किसानों की फसल चौपट कर दी। एक किसान को कुचलकर मार डाला। उसकी घेराबंदी के लिए वन विभाग की टीम सक्रिय हुई। उसे ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया गया लेकिन वह रेस्क्यू टीम को छकाता रहा। आखिरकार, 22 दिन बाद 28 सितंबर को वह बाणसागर डैम के जलभराव क्षेत्र बरौंधा टापू में पहुंच गया। वन विभाग के अफसरों का अनुमान है कि यहां से वह उत्तर शहडोल वन मंडल के ब्योहारी क्षेत्र के जंगल में पहुंच गया होगा। इस तरह इस गुस्सैल हाथी के क्षेत्र से निकलने के बाद वन विभाग के अमले ने राहत की सांस ली।