
Plastic : मध्य प्रदेश के चौराहों, होटलों और ठेलों पर सुबह-शाम मिलने वाला गर्म नाश्ता जो कि प्लास्टिक कोटेड डिस्पोजल में दिया जा रहा है यह आपकी सेहत में मिठास नहीं, बल्कि धीमा ज़हर घोल रहा है। जिस डिस्पोजल प्लेट में आपको गर्म समोसा, पोहा, मंगोड़ा या जलेबी, प्लास्टिक कोटेड डिस्पोजल कप में परोसी जाने वाली चाय आपकी सेहत के लिए बेहद घातक है।
नाश्ते में इस्तेमाल हो रही इन कागज़ी प्लेटों पर चमक और मजबूती देने के लिए पॉलीथिन-प्लास्टिक की पतली फ़िल्म चिपकाई जा रही है। 70 से 80 डिग्री सेल्सियस तक गर्म खाद्य सामग्री पड़ते ही यह प्लास्टिक फ़िल्म पिघलती है और ज़हरीले रसायनों के रूप में सीधे आपके पेट में चली जाती है।
कारोबारी सूत्रों के अनुसार, थोक बाजार में यह खतरनाक प्लास्टिक-कोटेड प्लेट महज़ 15 से 40 पैसे में उपलब्ध हो जाती है। सस्ते दाम और पारंपरिक पत्तलों की कम उपलब्धता के कारण दुकानदार धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे महानगरों में रोज़ाना 6 से 8 लाख प्लेटों की खपत है, जबकि छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट जैसे जिलों में रोज़ाना 2 से 4 लाख प्लेटें बिक रही हैं।
पूरे मध्य प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1.5 से 2 करोड़ ऐसी प्लेटों/दोनों का उपयोग हो रहा है। इसके ज़रिए प्रदेश में रोज़ाना 50 से 80 लाख रुपये और सालाना 200 से 250 करोड़ रुपये का असंगठित व गैर-कानूनी डिस्पोजल कारोबार फल-फूल रहा है।
यह कोटिंग केवल इंसान के पेट को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी स्थायी नुकसान पहुँचा रही है। प्लास्टिक कोटिंग के कारण यह कागज़ न तो मिट्टी में गलता है और न ही आसानी से रीसायकल हो पाता है। नगरीय निकायों के सफाई मित्र इसे सामान्य कागज़ मानकर कचरे में फेंक देते हैं, जिससे रोज़ाना प्रदेश में कई टन बायो-नॉन-डिग्रेडेबल प्लास्टिक कचरा डंपिंग यार्डों में जमा हो रहा है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशन के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ को डायरेक्ट प्रिंटेड या प्लास्टिक कोटेड नॉन-फूड ग्रेड सामग्री में परोसना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद पूरे प्रदेश की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और थोक बाजारों में यह माल खुलेआम बेचा जा रहा है।
कानूनी प्रावधान: खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत प्रतिबंधित सिंगल-यूज़ प्लास्टिक व लेमिनेटेड सामग्री का उपयोग करने वाले व्यवसायियों पर 5,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना, सामग्री की जब्ती और बार-बार नियम तोड़ने पर होटल/संस्थान का लाइसेंस निरस्त करने तक की सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
निकायों का भी नहीं ध्यान:
प्लास्टिक कोडेट नॉन फूड ग्रेड सामग्री विक्रय पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही नगर निगम को भी कार्रवाई करना है लेकिन निकायों द़्वारा केवल पॉलिथिन विक्रय पर ही कभी-कभी कार्रवाई की जा रही है।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जबलपुर के डायरेक्टर डॉ. श्यामजी रावत ने कहा कि जब 70 से 80 डिग्री सेल्सियस गर्म खाद्य सामग्री इस प्लास्टिक परत पर रखी जाती है, तो प्लास्टिक में मौजूद थैलेट्स, बिस्फेनॉल-ए और स्याही में मौजूद कार्सिनोजेनिक कण पिघलकर भोजन में मिल जाते हैं। यह पेट का कैंसर, लिवर टॉक्सिसिटी, आंतों में सूजन, हार्मोनल असंतुलन और किडनी की बीमारियों का सीधा कारण बनता है। लगातार डिस्पोजल में गर्म चाय, नियमित रूप से ऐसी प्लेटों में गर्म या ठंडी खाद्य सामग्री खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है।
मध्य प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त नियंत्रक टीना यादव ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के खाद्य सुरक्षा और मानकों के तहत, गुणवत्तायुक्त खाद्य सामग्री के साथ-साथ उसकी पैकेजिंग से जुड़े भी कड़े नियम निर्धारित हैं। पैकेजिंग में नियमों का उल्लंघन होने पर विभाग द्वारा औचक जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, आम नागरिकों को भी इस संबंध में जागरूक किया जाएगा।
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, छिंदवाड़ा के क्षेत्रीय अधिकारी एम. पी. तिवारी का कहना है कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक और नियमों के विपरीत उपयोग किए जा रहे प्लास्टिक-कोटेड उत्पादों पर नगर निगम और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई की जाती है। पूर्व में भी ऐसी इकाइयों और विक्रेताओं पर शिकंजा कसा गया था। इस मामले में भी जल्द ही संयुक्त टीम का गठन कर शहर और जिले में व्यापक जांच अभियान चलाकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।