
Raipur Ganesh Utsav: महाराष्ट्र मंडल गणेश परंपरा को 91 वर्षों से लेकर आगे बढ़ रहा है। जहां अपनी परंपराओं, संस्कृति और देवी-देवताओं की झलक महाराष्ट्र मंडल परिवार ही नहीं, शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हुआ करता है। इस बार की खास अंदाज में गणपति बप्पा दर्शन देते हुए नजर आते हैं। समाज के वरिष्ठ बताते हैं कि शुरुआत नागरिक संवाद, जादू व कठपुतली से हुई जो महाराष्ट्र मंडल के गणेशोत्सव को नई पहचान दी है। महाराष्ट्र मंडल परिवार का गणेशोत्सव मनाने का गौरवशाली इतिहास 91 वर्ष पुराना है। विविध सांस्कृतिक मंचों की मौजूदगी सहित जादू, कठपुतली, नागरिक संवाद के आयोजन सीपी बरार क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे। जिसे राजधानी रायपुर के मंच में भी प्रदर्शित किया गया। वह परंपरा आज भी यथावत है।
महाराष्ट्र मंडल के पिछले 16 वर्षों से अध्यक्ष अजय मधुकर काले बताते हैं कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से प्रेरित होकर महाराष्ट्र मंडल ने साल 1936 से गणेशोत्सव की शुरुआत हुई। तब नागरिक संवाद सर्वाधिक लोकप्रिय था। उस दौर के मुख्य वक्ताओं में पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, खूबचंद बघेल, जय नारायण पांडे, हरि ठाकुर, रणवीर सिंह शास्त्री, शारदा चरण तिवारी, यशवंत गोविंद जोगलेकर, मोहन लाल पांडे, भगवती चरण शुक्ला, सुधीर मुखर्जी, पं. श्यामा चरण शुक्ल, गजानन माधव मुक्तिबोध, विनोद कुमार शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल जैसे अनेक ख्यातिलब्ध नामों की लंबी फेहरिस्त महाराष्ट्र मंडल के गणेश उत्सव में दर्ज है।
महाराष्ट्र मंडल के कार्यों और कार्यक्रमों में मार्च 1939 में उस समय विशेष महत्व मिला, जब आरएसएस के संस्थापक सरसंघ चालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने मंडल की प्रदेश स्तरीय सभा में संपूर्ण मराठी समाज से आह्वान किया था कि आपके सभी समाजसेवी कार्य व कार्यक्रम सर्वसमाज के लिए हों। इसका गहरा प्रभाव पड़ा और समाज आगे बढ़ा है।
महाराष्ट्र मंडल के गणेशोत्सव में नगर स्तरीय सुगम संगीत स्पर्धा, शालेय निबंध, वाद विवाद, चित्रकला, रंग भरो स्पर्धा, नागरिक संवाद, हिंदी नाटक जैसे कार्यक्रमों का आयोजन विशेष बनाते हैं। जब मुंबई और भोपाल के हिंदी व मराठी नाटक, भिलाई के कलाकारों का सुगम संगीत, महाराष्ट्र सरकार की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
महाराष्ट्राची आई, महाराष्ट्र की मां, महाराष्ट्र की देवियां, महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों की शक्तिपीठ एवं प्रमुख देवियों की झांकी बनाई गई है विभिन्न महाराष्ट्रीयन परिवारों की कुल देवियाें को विशष स्थान दिया गया है।